Maleria Aur Typhoid Me Kya Antar Hai


मलेरिआ और टाइफाइड में क्या अंतर है 


दोस्तों हमारे देश के साथ साथ कई उष्णकटिबंधीय देशों में जहाँ बारिश अच्छी खासी होती है वहां बरसात और उसके बाद के सीजन में कई बीमारियों को प्रकोप रहता है। इन्ही बीमारियों में मलेरिया और टाइफाइड भी प्रमुख हैं। वैसे तो दोनों बीमारियों में मरीज को तेज बुखार और कमजोरी महसूस होती है मरीज थका थका सा दीखता है फिर भी दोनों बीमारियां एकदम से अलग हैं। कई बार लोग इन्हें सामान्य बुखार समझ कर लापरवाही कर बैठते हैं और स्थिति गंभीर हो जाती है। कई बार कुछ लक्षणों के आधार पर लोग टाइफाइड की जगह मलेरिया का इलाज कराने लगते हैं जो कि स्थिति को और बिगाड़ देता है। दोनों बीमारियां संक्रमण, लक्षण, उपचार आदि में एकदम अलग अलग हैं। आइए देखते हैं दोनों बीमारियों में क्या फर्क है :



मलेरिआ और टाइफाइड में क्या अंतर है 

  • मलेरिया मरीज को जहाँ मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है वहीँ टाइफाइड का कारण एक बैक्टीरिया है जो गंदे संक्रमित पानी और भोजन द्वारा फैलता है।

  • मादा एनोफिलीज मच्छर जब किसी संक्रमित व्यक्ति को काटती है तो मरीज के रक्त से प्लाज्मोडियम नामक एककोशिकीय जीव उसके लार में चला जाता है फिर जब वे किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटती है तो वह प्लाज्मोडियम उसके रक्त में मिल जाता है जहाँ उसके लाल रक्त कणों में पहुंच कर तुरत वह अपनी संख्या में वृद्धि करने लगता है और उस व्यक्ति के अंदर मलेरिया के लक्षण आने लगते हैं। टाइफाइड गंदे जल और दूषित भोजन के द्वारा फैलता है। इसमें पानी या भोजन के माध्यम से एक तरह का बैक्टीरिया मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है जिसका नाम Salmonella Typhi है।


  • मलेरिया में जहाँ कम्कपी, बुखार, मिचली, उलटी, पेटदर्द, चक्कर आना, पसीने निकलना और कभी कभी डायरिया के लक्षण पाए जाते हैं वहीँ टाइफाइड में पेट दर्द, त्वचा पर रैशेज, कमजोरी थकान के साथ साथ उच्च तापमान के लक्षण दीखते हैं। टाइफाइड के लक्षण अवस्था बदलने पर परिवर्तित होते जाते हैं। इसकी सात सात दिनों की चार अवस्थाएं होती हैं। पहली अवस्था मरीज को उच्च तापमान, पेट में दर्द, नाक से रक्तस्राव, खांसी और थकान महसूस होती है। दूसरी अवस्था में बुखार के साथ साथ ह्रदय गति का कम होना, कब्ज़ या पेट ख़राब होना हो सकता है। तीसरी अवस्था में शरीर पर लाल चकते हो सकते हैं वहीँ आखरी अवस्था में धीरे धीरे सारे सिम्टम्स गायब हो जाते हैं।
  • जहाँ मलेरिया की जांच के लिए मरीज का ब्लड टेस्ट कराया जाता है वहीँ टाइफाइड के केस में यह ब्लड के अलावा स्टूल, यूरिन और बोन मेरो की भी जांच की जाती है।
  • मलेरिया का पता लगाने के लिए कम्पलीट ब्लड काउंट (CBC) टेस्ट, मलेरियल पैरासाइट टेस्ट और रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट आदि कराया जाता है। टाइफाइड का पता लगाने के लिए विडाल टेस्ट, टाइफाइड टेस्ट, बोन मेरो टेस्ट, और स्टूल टेस्ट किया जाता है।


  • मलेरिया के उपचार के लिए विभिन्न तरह की एंटी मलेरियल दवाएं आती है जिनमे amodiaquine , lumefantrine, mefloquine sulfadoxine या pyrimeyhamine आदि मुख्य हैं। टाइफाइड के ट्रीटमेंट में मुख्यतः एंटीबायोटिक दवाएं जैसे सिप्रोफ्लोक्सासिन olfloxacin आदि दवाओं का प्रयोग किया जाता है।

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