ईमेल में cc और bcc में क्या अंतर है



आज के इस युग में ईमेल के महत्त्व को कौन नहीं जनता ? किसी भी ऑफिस में इसे एक अतिआवश्यक साधन माना जाता है जिससे कि सूचनाओं का प्रामाणिक आदान प्रदान किया जाता है। यह हमारे समय और कागज़ दोनों को बचाता है। ईमेल में ईमेल किसको भेजा जाय इसके लिए हमारे पास तीन ऑप्शन होते हैं पहला To इसमें ईमेल जिसको भेजा जाता है उसका ईमेल एड्रेस दिया जाता है। इसी के नीचे एक दूसरा ऑप्शन होता है जिसमे cc लिखा रहता है इसमें उन लोगों के ईमेल एड्रेस होते हैं जिनके पास इस मेल की कॉपी भेजी जाती है। तीसरा और सबसे आखरी ऑप्शन होता है bcc का, इसमें उन लोगों का ईमेल एड्रेस होता है जिनको हम गुप्त रूप से इसी ईमेल की एक कॉपी भेजते हैं।

ईमेल भेजने के ये तीनों ही ऑप्शन बड़े काम के होते हैं और हमारे विभिन्न उद्द्येश्यों को पूरा करते हैं। इनके द्वारा एक ही साथ कई लोगों को ईमेल भेजा जा सकता है।

आईये देखते हैं इन तीनों विकल्पों के काम क्या क्या हैं और उनका प्रयोग हम कैसे कर सकते हैं 


Computers, Mails, Screen, Communication


ईमेल में To क्यों होता है



ईमेल जिसको सम्बोधित करके लिखा जाता है उसका ईमेल एड्रेस इस लाइन में लिखा जाता है। इसमें दिए गए ईमेल आईडी वाले व्यक्ति उस ईमेल में लिखी बातों के रिप्लाई के लिए सीधे सीधे उत्तरदायी होते हैं। ईमेल में मांगे गए विवरण या काम को कराने की जिम्मेदारी इनकी ही होती है।




ईमेल में cc क्या होता है



To के नीचे cc वाली लाइन आती है। इसमें उन लोगों के एड्रेस होते हैं जिनको हम चाहते हैं कि उस ईमेल की एक प्रति मिले। इसमें कई लोग हो सकते हैं। cc का फुलफॉर्म होता है कार्बन कॉपी। ईमेल का यह भाग कार्बन कॉपी की तरह ही काम करता है। इसमें दिए गए सभी पतों पर उसी ईमेल की कॉपी चली जाती है। ईमेल में यह बड़े ही काम का होता है। इसके द्वारा हम उन सभी लोगों को जानकारी में रखना चाहते हैं कि अमूक व्यक्ति को यह पत्र भेजा गया है और उनपर इस काम को करने की जिम्मेवारी है या उनको यह सूचना दी गयी है। मान लीजिए किसी कर्मचारी को ऑफिस से निकाला गया और यही बात ऑफिस का मैनेजर ऑफिस के सभी अन्य कर्मचारियों को बताना चाहता है तो वह cc के द्वारा सभी को उस मेल की एक कॉपी भेज कर अवगत करा सकता है। cc की एक और खास बात यह है कि इसमें किनको किनको यह ईमेल भेजा गया है यह पता होता है। अब यदि कोई ईमेल किसी कर्मचारी को किया जाय और साथ में उसमे उसके ऊपर के अधिकारी को cc में रखा जाए तो इस ईमेल को प्राप्त करने वाला कर्मचारी उस मेल को स्वाभाविक रूप से गंभीरता से लेगा चुकि उसके बॉस को मालुम है कि ईमेल किसको किया गया है और कब किया गया है।




ईमेल में bcc क्या होता है



cc की तरह bcc भी ईमेल का एक उपयोगी हिस्सा है। यह cc के ठीक नीचे होता है। bcc का फुलफॉर्म होता है ब्लाइंड कार्बन कॉपी। जैसा कि नाम से स्पष्ट है इसमें जिनके ईमेल एड्रेस होते हैं उनको यह पता नहीं चलता है कि ईमेल किनको किनको भेजा गया है। हाँ यह अलग बात है कि bcc वालों को यह पता होता है कि ईमेल में To में कौन है। किन्तु To में जिनकी ईमेल आईडी है उनको यह पता नहीं होता कि bcc में कौन कौन हैं अर्थात उनके अलावा और किनको किनको यह ईमेल भेजी गयी है। ईमेल का यह फीचर ईमेल के रिकॉर्ड रखने के लिए होता है।

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cc और bcc में क्या अंतर है



  • cc का फुलफॉर्म होता है कार्बन कॉपी वहीँ bcc का फुल फॉर्म होता है ब्लाइंड कार्बन कॉपी।

  • cc में जिन लोगों की ईमेल आईडी होती है उन सबों को पता होता है कि ईमेल किसको किसको भेजा गया है पर bcc में जिन लोगों की ईमेल आईडी होती है उन्हें यह पता नहीं चल पाता कि उनके अलावा ईमेल और किनको किया गया है।

  • cc के द्वारा हम ईमेल के प्राइमरी रेसिपिएंट को सचेत करते हैं कि यही ईमेल अन्य लोगों के पास भी गया है अतः काम में पारदर्शिता है और जवाबदेही है पर bcc में चूकि किसी को पता नहीं चलता तो इस तरह की बात नहीं होती।

  • cc में चूँकि सबका नाम दीखता है अतः रिप्लाई करते समय सबको रिप्लाई किया जा सकता है और इसमें रिप्लाई लिस्ट का भी पता चलता है जबकि bcc में रिप्लाई छिप जाता है।

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दोस्तों, इस प्रकार हमने आज देखा ईमेल में To ,cc और bcc क्यों होते हैं और इनका क्या काम है।हमने यह भी देखा कि ईमेल में cc और bcc में क्या अंतर है। ईमेल के ये तीनों ही हिस्से अति उपयोगी हैं और ये हमारे काम को आसान बनाते हैं।

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