खिचड़ी और तहरी में क्या अंतर है


खिचड़ी और तहरी में क्या अंतर है 



खिचड़ी और तहरी दोनों ही भारत भर में घर घर बनने वाला व्यंजन है। खिचड़ी और तहरी दोनों के बनाने में मुख्य रूप से चावल का प्रयोग किया जाता है। ये दोनों ही व्यंजन देखने में इतने समान लगते हैं कि कोई भी धोखा खा जाये। खिचड़ी और तहरी दोनों ही बिलकुल ही अलग अलग व्यंजन हैं और दोनों की अपनी अपनी खासियतें हैं।

खिचड़ी की रोचक जानकारी 


खिचड़ी भारत मे घर घर बनने वाला एक बहुत ही लोकप्रिय और प्राचीन व्यंजन है। यह मुख्य रूप चावल और दाल से बनाया जाता है। यह स्वादिष्ट तथा बहुत ही सरलता से पचने वाला भोज्य पदार्थ है। इसी वजह से इसे मरीजों को तथा छोटे शिशुओं के प्रथम अन्नाहार के रूप में दिया जाता है। 


खिचड़ी का इतिहास 

खिचड़ी बहुत ही प्राचीन व्यंजन है। संस्कृत में इसका वर्णन खिच्चा के रूप में किया गया है। वैदिक साहित्य में इसे क्रूसरन्न कहा गया है है। ग्रीक राजा सेल्यूकस ने अपने भारत अभियान में इसका वर्णन एक लोकप्रिय व्यंजन के रूप में किया है। खिचड़ी की चर्चा प्राचीन यात्री इब्ने बतूता, अकबर की आईने अकबरी, जहांगीर से सम्बंधित लेखों में भी मिलता है। खिचड़ी भारत के आस पास के देशों में भी लोकप्रिय है। मिश्र में खिचड़ी की तरह का एक व्यंजन कोषारी या कुशारी काफी प्रसिद्ध है। 


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खिचड़ी के इंग्रेडिएंट्स और प्रकार 
खिचड़ी मुख्य रूप से चावल और दाल से तैयार की जाती है किन्तु इसमें कभी कभी सब्ज़ी जैसे मटर, गोभी भी मिलाकर बनाया जाता है। खिचड़ी बनाने के लिए प्रायः रहर की दाल का प्रयोग किया जाता है किन्तु मरीजों के लिए जब खिचड़ी बनायी जाती है तो इसमें मुंग की दाल का प्रयोग किया जाता है। व्रतों में भी उपवास के दौरान साबूदाने की खिचड़ी का सेवन किया जाता है। 

खिचड़ी का धार्मिक महत्त्व 

खिचड़ी का प्रयोग प्रायः सब्ज़ी, चोखा, दही, पापड़ आदि के साथ किया जाता है। हिन्दुओं में मान्यता है कि शनिवार को खिचड़ी का सेवन करने से विपत्ति टलती है। कुछ त्योहारों में भी खिचड़ी खाने का रिवाज है जैसे मकर संक्रांति। इसके अलावा दुर्गा पूजा पर भी कुछ जगहों पर खिचड़ी का प्रसाद बाटा जाता है।

तहरी क्या है

तहरी एक मसालेदार चावल की एक डिश है जिसमे चावल के साथ साथ आलू तथा अन्य सब्ज़ियां भी मिलाकर पकाई जाती है। वैसे तो तहरी को अवधी व्यंजन माना गया है किन्तु यह डिश अवध के साथ साथ भारत के कई अन्य क्षेत्रों में भी लोकप्रिय है।

तहरी का इतिहास 

हैदराबाद में तो तहरी खासी लोकप्रिय है। हैदराबाद को तहरी का जन्मस्थान कहा जाय तो कोई गलत नहीं होगा। तहरी को बिरयानी का शाकाहारी वर्जन भी बोला जाता है और माना जाता है कि चावल के इस तरीके से बनाने की खोज वास्तव में दक्षिण के मुस्लिम नवाबों के यहाँ काम करने वाले हिन्दू मुनिबों के लिए किया गया था जो शाकाहारी थे और बिरयानी के शौकीन थे। तहरी को दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जब मीट की कीमते आसमान छू रही थी तब और भी ज्यादा लोकप्रियता हासिल हुई। 

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तहरी के इंग्रेडिएंट्स 

तहरी बनाने के लिए चावल में आलू तथा अन्य सब्ज़ियों को मिलाया जाता है जो कि बिरयानी बनाने के तरीके से एकदम उलट है। बिरयानी में मीट में चावल मिलाया जाता है। वैसे तो तहरी मुख्य रूप से शाकाहारी व्यंजन है किन्तु कुछ जगहों पर खासकर बांग्लादेश और पाकिस्तान में चावल में रेड मीट मिलकर भी इसे तैयार किया जाता है। तहरी की चर्चा हो और कश्मीर की चर्चा न हो ऐसा हो नहीं सकता। कश्मीर में तहरी के दीवाने घर घर मिल जायेंगे। कश्मीर में ठेले वाले भी तहरी बेचते नज़र आ जायेंगे। 


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पानी पूरी और फुचका में क्या अंतर है 

खिचड़ी और तहरी में क्या अंतर है

  • खिचड़ी चावल और दाल से बनाया जाने वाल एक बहुत ही लोकप्रिय व्यंजन है वहीँ तहरी में मुख्य रूप से चावल और आलू पड़ता है।

  • खिचड़ी अत्यंत ही प्राचीन व्यंजन है जिसका उल्लेख वैदिक साहित्य में भी मिलता है वहीँ तहरी मुगलों के समय बिरयानी के नक़ल पर शाकाहारी व्यंजन के रूप में विकसित किया गया व्यंजन है।
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  • खिचड़ी सरलता से पचने वाला व्यंजन है। इसी वजह से इसे मरीजों और शिशुओं को दिया जाता है। तहरी मसालेदार भोजन है और इसे मरीजों को नहीं दिया जा सकता।

  • खिचड़ी का धार्मिक महत्त्व भी है वहीँ तहरी का कोई धार्मिक महत्त्व नहीं है।

  • खिचड़ी में मसाले का प्रयोग हो भी सकता है और नहीं भी किन्तु तहरी में मसाला एक अनिवार्य घटक है।
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  • खिचड़ी में दाल आवश्यक घटक है वहीँ तहरी में आलू और अन्य सब्ज़ियां होना आवश्यक है।


इस तरह से हम देखते हैं कि खिचड़ी और तहरी एकदम अलग अलग डिश होते हुए भी दोनों बेहद लोकप्रिय भारतीय व्यंजन हैं। खिचड़ी जहाँ अपने पौष्टिक और सुपाच्य होने की वजह से मरीजों के लिए एक उत्तम आहार है वहीँ तहरी शाकाहारी लोगों के लिए एक तरह से बिरयानी है।




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