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RAM और ROM में क्या अंतर है, हिंदी में जानकारी

RAM और ROM में क्या अंतर है 
किसी भी कंप्यूटर को ऑपरेट करने के लिए मेमोरी की आवश्यकता होती है। मेमोरी में उपस्थित कमांड्स ही कंप्यूटर को दिशा निर्देश देते हैं जिससे कि वह सुचारु रूप से काम कर पाता है और इच्छित परिणाम देता है। कंप्यूटर या मोबाइल की मेमोरी में ही उसके फंक्शन से सम्बंधित सारी सूचनाएं उपस्थित होती हैं। कंप्यूटर में मेमोरी दो तरह की होती है एक RAM तथा दूसरी ROM, दोनों ही मेमोरी मिलकर कंप्यूटर या मोबाइल को ऑपरेट करने में मदद करती हैं। RAM और ROM हैं तो दोनों मेमोरी किन्तु दोनों के फंक्शन, बनावट और क्षमता सहित कई अंतर होते हैं। 

RAM क्या होता है कंप्यूटर में आमतौर पर दो प्रकार की मेमोरी होती है एक फिक्स्ड या स्थाई मेमोरी और दूसरी अस्थाई मेमोरी। यह एक चिप के रूप में होता है। RAM कंप्यूटर में एक अस्थाई मेमोरी के रूप में काम करता है। इसमें उपस्थित सभी DATA या INFORMATION तभी तक रहते हैं जबतक कंप्यूटर ऑन रहता है। जैसे ही कंप्यूटर ऑफ होता है इसमें उपस्थित सभी डाटा डिलीट हो जाता है। यही कारण है कि इसे Volatile Memory कहा जाता है। वास्तव में कंप्यूटर के CPU में वर्तमान में जो कार्य…

परमाणु बम और हाइड्रोजन बम में क्या अंतर है,क्या हाइड्रोजन बम एटम बम से ज्यादा खतरनाक है


परमाणु बम, एटम बम या न्यूक्लिअर बम दुनियां के सबसे खतरनाक आविष्कारों में एक था। इस बम ने द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामों को पल भर में बदल कर रख दिया। एटम बम के अविष्कार ने दो बड़े शहरों को एक ही झटके में शमशान में बदलते देखा। किन्तु दुनियां ने कोई सबक नहीं सीखा और संसार में एटम बम प्राप्त करने की होड़ लग गयी। अभी तो यह कुछ भी नहीं था। फिर आया हाइड्रोजन बम जिसके विनाशकारी प्रभाव की कल्पना भी नहीं की जा सकती। सच कहा जाये तो मनुष्य ने इन दो अविष्कारों से अपनी कब्र खुद ही खोद ली है क्योंकि ये दोनों ही हथियार पूरी पृथ्वी को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे परमाणु बम और हाइड्रोजन बम दोनों में क्या अंतर है और दोनों में कौन ज्यादा खतरनाक है।


परमाणु बम या एटम बम क्या है 
परमाणु बम जिसे नाभिकीय बम भी कहा जाता है यह परमाणु की शक्ति का विध्वंशक प्रयोग है। इस विध्वंशक ऊर्जा की मात्रा इतनी अधिक होती है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती, लाखों लोग एक ही साथ मारे जा सकते हैं, एक बहुत ही बड़े क्षेत्र में एक साथ तबाही मचाई जा सकती है। एक अनुमान है कि एक हज़ार किलोग्राम से कुछ ज्यादा बड़े परमाणु बम इतनी ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं जितनी कई अरब किलोग्राम के परम्परागत विस्फोटक।
परमाणु बम न्यूक्लिअर फ्यूज़न या न्यूक्लियर फिशन के सिद्धांत पर आधारित होता है। इस प्रक्रिया में थोड़ी ही सामग्री से अत्यधिक ऊर्जा पैदा की जा सकती है। परमाणु बम बनाने की प्रक्रिया में या तो नाभिकीय फ्यूज़न यानि संलयन कराया जाता है या नाभिकीय विखंडन या फिर दोनों ही प्रक्रियायों के सम्मिलित अभिक्रियाओं को प्रयोग में लाया जाता है। एटम बम में मुख्यतः यूरेनियम या प्लूटोनियम के परमाणुओं का विखंडन कराया जाता है जिससे अपार ऊर्जा मिलती है। इस प्रक्रिया में परमाणु के नाभिक पर न्यूट्रॉनों से प्रहार किया जाता है। इस प्रक्रिया में एक विशाल ऊर्जा मुक्त होती है। इस प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन कहा जाता है। फिर नाभिकीय विखंडन की प्रक्रिया से अन्य न्यूट्रॉन भी मुक्त होते हैं। ये न्यूट्रॉन फिर वही क्रिया अन्य परमाणुओं के साथ करते हैं और उनका विखंडन होता है। इनके द्वारा मुक्त न्यूट्रॉन फिर वही प्रक्रिया अन्य परमाणुओं के साथ करते हैं और विखंडन होता रहता है। इस तरह से एक श्रंखला चलती रहती है और इन श्रंखलावद्ध तरीके से परमाणुओं का विखंडित होना चेन रिएक्शन कहलाता है। यह चेन रिएक्शन विस्फोट के परिमाण को काफी बढ़ा देता है और इस प्रकार इनसे मुक्त ऊर्जा असीमित और विकराल हो जाती है। 


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परमाणु बम का प्रयोग सबसे पहले द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुआ था जिसमे जापान का हिरोशिमा और नागासाकी शहर पूरी तरह से जल कर ख़ाक हो गया था। इसके विनाशकारी परिणाम हुए थे और चारों तरफ रेडिओएक्टिव विकरण फ़ैल गया था जिसका असर आज भी वहां पैदा होने वाले लोगों के अंदर देखा जा सकता है। आज के परमाणु बम द्वितीय विश्व युद्ध में प्रयोग किये गए परमाणु बम की तुलना में काफी बड़े और शक्तिशाली हैं।
हाइड्रोजन बम किसे कहते हैं 
एटम बम की भयावहता और विनाशकारी परिणामों से अभी दुनियां भली भाँती से परिचित भी नहीं हुई तबतक इंसान ने एक और विनाशकारी और विंध्वंशक हथियार की खोज कर ली। यह विनाशकारी हथियार और कोई नहीं बल्कि हाइड्रोजन बम की खोज थी जिसने पूरी दुनियां को तबाही के मुंहाने पर ला कर रख दिया है। हाइड्रोजन बम एटम बम की तुलना में और भी ज्यादा विध्वंशक और विनाशकारी होता है।

हाइड्रोजन बम परमाणु संलयन के सिद्धांत पर काम करता है। जब परमाणु बम का विस्फोट कराया जाता है तब बहुत अधिक ताप उत्पन्न होता है। यह उच्च ताप हाइड्रोजन परमाणु का फ्यूजन कर देता है जिससे अपार ऊष्मा और शक्तिशाली किरणे उत्पन्न होती हैं। यह ऊष्मा हाइड्रोजन को हीलियम में बदल देती है इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन के आइसोटोप्स का परस्पर मिलन होता है जिसमे दो एटम के न्युक्लियस आपस में मिलते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि विशाल शक्ति या ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस ऊर्जा का परिमाण सूर्य के स्रोत से उत्पन्न ऊर्जा से भी ज्यादा और गंभीर होती है। ये आइसोटोप्स हाइड्रोजन के ड्यूटेरियम और ट्राइटिरियम होते हैं 


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हाइड्रोजन बम का परिक्षण सबसे पहले अमेरिका ने किया था। इसके बाद रूस, चीन और फ़्रांस ने भी हाइड्रोजन बम तैयार कर लिया था। अभी हाल में उत्तर कोरिआ के द्वारा भी हाइड्रोजन बम का सफल परिक्षण किया गया है। हाइड्रोजन बम का प्रयोग अभी तक पूरी दुनियां में कहीं पर भी नहीं किया गया है।

परमाणु बम और हाइड्रोजन बम में क्या अंतर है 

  • एटम बम नाभिक के संलयन, विखंडन या फिर दोनों ही प्रक्रियाओं के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसके फलस्वरूप भयंकर ऊर्जा और ताप उत्पन्न होता है वहीँ हाइड्रोजन बम हाइड्रोजन के समस्थानिकों के संलयन के सिद्धांत पर कार्य करता है जिसके फलस्वरूप हीलियम का एक परमाणु बनता है और असीमित ऊर्जा उत्पन्न होती है।
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  • परमाणु बम के निर्माण में मुख्य रूप से यूरेनियम और थोरियम का प्रयोग किया जाता है जबकि हाइड्रोजन बम के निर्माण में हाइड्रोजन के दो आइसोटोप्स डुटेरियम और ट्राइटिरियम का प्रयोग किया जाता है।
  • एक हजार किलोग्राम से थोड़े अधिक के परमाणु बम टीएनटी के कई अरब किलोग्राम विस्फोटों से अधिक ऊर्जा और ताप उत्पन्न करते हैं जबकि हाइड्रोजन बम का विस्फोट कराने के लिए एटम बम के विस्फोट से उत्पन्न 50000000 डिग्री सेल्सियस ऊष्मा की आवश्यकता होती है जो कि सूर्य की ऊष्मा से भी अधिक होती है। इस विस्फोट से उत्पन्न ऊर्जा असीमित होती है।
  • परमाणु बम हाइड्रोजन बम नहीं होता किन्तु हर हाइड्रोजन बम एक परमाणु बम होता है।
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  • अभी तक दुनियां में परमाणु बम का दो बार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रयोग हो चूका है जबकि हाइड्रोजन बम का प्रयोग अभी तक दुनियां में किसी ने कहीं पर भी नहीं किया है।
इस प्रकार हम देखते हैं कि परमाणु बम की ही अगली पीढ़ी का बम हाइड्रोजन बम है जो भयावहता और विनाश में परमाणु बम से बहुत ज्यादा करीब एक हज़ार गुना ज्यादा घातक है। परमाणु बम और हाइड्रोजन बम दोनों ही परमाणु स्वरुप से छेड़छाड़ का परिणाम होती है जिसमे नाभिकीय विखंडन या नाभिकीय संलयन का सिद्धांत काम करता है। 

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