सांढ़ और बैल में क्या अंतर है: एक दिलचस्प और रोचक जानकारी



सांढ़ और बैल में क्या अंतर है: एक दिलचस्प और रोचक जानकारी

हमारा देश कृषि प्रधान देश रहा है। यहाँ प्राचीन काल से ही बैल और साँढ़ों को विभिन्न कार्यों में उपयोग में लाया जाता रहा है। आज के आधुनिक युग में भी जब अधिकांश कार्य करने के लिए मशीने आ गयी हैं तो भी साँढ़ों की महत्ता कम नहीं हुई है हाँ बैल अब बहुत कम दीखते हैं फिर भी गांव देहात में बहुत सारे काम अब भी बैलों के द्वारा होते हैं। आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे सांढ़ और बैल क्या हैं और सांढ़ और बैल में क्या अंतर है ?


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सांढ़ : डेरी उद्योग की नींव  


सांढ़ गोवंश पशुओं में नर जानवर होता है। यह लम्बा, तगड़ा, खूब मांसल और काफी ताकतवर होता है। सांढ़ सफ़ेद, काला या लाल भूरे रंग का होता है। यह सींग के साथ भी हो सकता है और बगैर सींग के भी। यह उनके नस्ल पर निर्भर करता है। सांढ़ स्वभावतः काफी उग्र और गुस्सैल होता है।

सांढ़ विज्ञानं की भाषा में बोलें तो बोस टोरस फॅमिली का सदस्य है। सांढ़ बोवाइन पशुओं में नर जानवर होता है। साँढ़ों का वजन करीब 1700 से 1800 पाउंड तक हो सकता है। सांढ़ पूर्णतः शाकाहारी होते हैं। ये अपने भोजन के लिए पत्तियों,घास, भूसे, खली आदि पर निर्भर होते हैं। सांढ़ अपने भोजन को अन्य बोवाइन पशुओं की तरह सीधे निगल जाते हैं और फिर बाद में उसे मुंह में वापस लाकर चबाते हैं। सांढ़ प्रायः बीस से पच्चीस साल तक जीवित रहते हैं।



सांढ़ डेरी उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। सांढ़ चुकि नर पशु होते हैं अतः गायों के गर्भधारण के काम आते हैं। पुराने जमाने में जब खेती हल और बैलों से होती थी और गाडी खींचने के लिए बैल की आवश्यकता पड़ती थी तब इन जानवरों का काफी महत्व था। आज जब बैलों की कोई ख़ास आवश्यकता नहीं है तब भी गायों के गर्भधारण के लिए सांढ़ की आवश्यकता होती है। कई देशों में सांढ़ संस्कृति के प्रतीक हैं और कई खेल तो साँढ़ों के साथ ही बनाये गए हैं। स्पेन का राष्ट्रिय खेल साँढ़ों की लड़ाई है। कई जगहों पर साँढ़ों की दौड़ भी होती है जिनका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व है।

बैल: एक बहुउपयोगी पशु

गोवंश पशुओं में गाय और सांढ़ के अलावा एक और पशु होता है जो बैल कहलाता है। वास्तव में बैल भी गोवंश में नर पशु के रूप में ही पैदा होता है किन्तु इसे बधिया कर के इसे काम लिया जाता है। बैल गायों से बड़े किन्तु साँढ़ों की अपेक्षा शांत और उपयोगी पशु होता है। बैल का प्रयोग गाडी खींचने और खेत जोतने में किया जाता है।

बैल को वास्तव में मानव की खोज कहा जा सकता है। इंसान को खेती के लिए हल चलाने के लिए, गाडी खींचने के लिए, कोल्हू में तेल पेरने के लिए, सिचाई के लिए किसी तगड़े, मजबूत और उपयोगी जानवर की आवश्यकता पड़ी। ऐसा जानवर जिसमे ताकत तो बहुत हो किन्तु आसानी से उसपर नियंत्रण किया जा सके। सांढ़ के अंदर वे सारे गुण मौजूद थे किन्तु उसको कण्ट्रोल करना सबके बस की बात नहीं। मानव ने इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए सांढ़ को बधिया बनाया और इसप्रकार उसे एक ऐसा जानवर मिला जो ताकत में तो सांढ़ की तरह होता है किन्तु उस पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है। बैल में वे सारे ही गुण मिलते हैं और उसे आसानी से नियंत्रित भी किया जा सकता है।


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प्राचीन काल से ही बैल मनुष्य की सहायता खेती से लेकर यातायात में करते आये हैं। बैल प्राप्त करने के लिए बछड़े को प्रायः उसके जन्म के पहले ही महीने में उसके वृषण को उसके शरीर से निकल दिया जाता है। वृषण बाद बछड़े शांत और संयमित हो जाते हैं। फिर जब वे बड़े होते हैं तब उन्हें उपयोग में लाया जाता है।

सांढ़ और बैल में क्या अंतर है: एक दिलचस्प और रोचक जानकारी

  • सांढ़ काफी आक्रामक और गुस्सैल होते हैं जबकि बैल शांत और आसानी से नियंत्रित होने वाले पशु हैं।

  • सांढ़ लम्बे, भारी और काफी तगड़े होते हैं किन्तु बैल साँढ़ों की तुलना में थोड़े लम्बे किन्तु वजन में थोड़े कम होते हैं।

  • साँढ़ नर पशु हैं और ये गायों के गर्भधारण में काम आते हैं बैल भी गोवंश के नर पशु होते हैं किन्तु इनका बधिया किया हुआ होता है इसलिए ये शुक्राणु उत्पन्न नहीं कर सकते और बच्चे पैदा करने के काबिल नहीं होते।

  • साँढ़ों का उपयोग कई खेलों में जैसे बुल फाइटिंग और सांढ़ रेस में किया जाता है जबकि बैलों की इस प्रकार कोई ख़ास प्रतियोगिता नहीं होती।
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  • सांढ़ कृषि और गाडी खींचने में लगभग नहीं काम आते वहीँ बैल कृषि और गाडी खींचने के काम आते हैं।

उपसंहार
इस प्रकार आपने जाना कि सांढ़ और बैल दोनों ही गोवंश पशुओं में नर प्राणी होते हैं। किन्तु सांढ़ बच्चा पैदा करने में सक्षम होते हैं जबकि बैलों के वृषण काट कर निकाल दिया जाता है और वे बधिया होते हैं। अतः साँढ़ों को वंशवृद्धि के लिए पाला जाता है वहीँ बैल कृषि तथा परिवहन कार्यों के काम लाये जाते हैं। सांढ़ गायों के बच्चे पैदा करने के लिए तथा दूध देने के लिए आवश्यक होते हैं।

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