काजल और आईलाइनर में क्या अंतर है

काजल और आईलाइनर में क्या अंतर है



क्लियोपैट्रा के सौंदर्य की जब भी बात होती है तो उसके आँखों के मोटे मोटे काजल का जिक्र जरूर आता है जो उसके आँखों और सम्पूर्ण चेहरे को अनुपम और अनोखा सौंदर्य प्रदान करते हैं। काजल प्राचीन काल से ही महिलाओं की आँखों को सुन्दर, करारे, कटीले और तीक्ष्ण बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं। आज भी महिलाओं के वैनिटी बॉक्स में काजल और आई लाइनर का होना अनिवार्य है। आई लाइनर वैसे तो काजल की तरह ही आँखों के किनारों को कलर प्रदान करते हैं पर कई मायनों में इसका रोल आँखों को निखारने में कुछ ज्यादा ही होता है। आज के पोस्ट में आइए पढ़ते हैं काजल और आई लाइनर के बारे में कई रोचक बातें और साथ ही देखते हैं कि काजल और आई लाइनर में क्या अंतर है 

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काजल : आँखों को शरबती और मदमस्त बनाये

काजल एक सौंदर्य प्रसाधन है जो आँखों को एक अच्छा शेप और आकर्षक बनाने के काम आता है। यह आँखों की बाहरी रेखा को उभरता है और उन्हें सुन्दर और कटीले बनाता है। कई बार तो यह आँखों की दृष्टि तेज करने के लिए तो कई बार बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।



काजल शब्द हिंदी भाषा का है जो अरबी भाषा के कोहल से अपना सम्बन्ध रखता हुआ प्रतीत होता है। अरबी भाषा में इसे सुरमा भी कहा जाता है। कोहल का प्रयोग कांस्य युग के जमाने से ही होता आया है। मिस्र, मध्य पूर्व अफ्रीका और दक्षिण एशियाई देशों में यह खूब प्रयोग में लाया जाता रहा है। मिस्र में प्राचीन युग में दो तरह के काजल प्रयोग में लाये जाते थे उदजु और मेस्डेमेट। उदजु ताम्बे के हरे अयस्क मैलाकाइट से बनाया जाते थे जबकि मेस्डेमेट में लेड जो एंटिमनी सल्फाइड या गैलना से प्राप्त होता था पड़ता था। अफगानिस्तान में महिलाएं सुरमे में बादाम का तेल मिलकर प्रयोग करती थीं। 

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काजल का प्रयोग ज्यादातर आँखों की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए किया जाता है। सौंदर्य प्रसाधन के अतिरिक्त तेज धुप और संक्रमण से भी आँखों की रक्षा करने के लिए काजल लगाने का रिवाज़ है। कुछ लोग आँखों की रौशनी बढ़ाने के लिए भी इसका प्रयोग करते हैं। भारत और आस पास के देशों में माना जाता है कि काजल आँखों को ठंडक पंहुचाता है। छोटे छोटे बच्चों को नज़र से बचाने के लिए भी भारत में काजल का टीका लगाने का रिवाज है।

काजल मुख्यतः प्राकृतिक पदार्थों से बने होते हैं। इसको बनाने में कई तरह के पेड़ पौधों का रस जैसे मोनाशा, चन्दन, अरंडी का तेल, देसी घी कुछ खनिजों से प्राप्त तरल जैसे कार्सिलेन्गनी, स्टेबनाइट, मंजल आदि का प्रयोग होता है। ये काजल को औषधीय गुण प्रदान करते हैं। इसी वजह से काजल का कोई हानिकारक प्रभाव आँखों पर नहीं पड़ता। सामान्य भारतीय घरों में सरसो के तेल के दिए को जलाकर उसके धुंए से कार्बन प्राप्त किया जाता है जिसे देसी घी मिलकर काजल तैयार किया जाता है। कई बार दिए की बाती के अंदर हल्दी का भी प्रयोग किया जाता है। बाजार में काजल पेंसिल के रूप में भी मिलता है।

आईलाइनर : जो आँखों को जादुई बना दे

आईलाइनर आँखों के मेक अप का एक प्रोडक्ट है जो आँखों को स्पष्ट, कटीले और आकर्षक बनाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। आईलाइनर लगाने का मुख्य उद्द्येश्य आँखों को एक निश्चित आकार और शेड देना होता है। इसे आखों के इर्द गिर्द तथा पलकों पर लगाया जाता है। यह आँखों को पुरे चेहरे में हाइलाइटेड कर देता है। इससे आँखें तीखी ,चमकदार और उभरी हुई मालुम पड़ती है और चेहरा बेहद आकर्षक हो जाता है। यही कारण है कि आईलाइनर एक प्रमुख सौंदर्य उत्पाद माना जाता है। 


आईलाइनर आँखों के सौंदर्य को निखारने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे आँखों को एक निश्चित आकार देने के साथ साथ कई तरह से उभार भी लाया जाता है। आईलाइनर से आँखों को नार्मल शेप, विंगड शेप, स्मोकी आईज स्टाइल, टाइट आईलाइनर स्टाइल दिया जाता है। महिलाएं अपने हिसाब से अलग अलग शेड देने के लिए इसका प्रयोग करती हैं।

आईलाइनर बाजार में आसानी से उपलब्ध होने वाली सौंदर्य सामग्री है। यह कई तरह की होती है जैसे पेंसिल आईलाइनर, लिक्विड आईलाइनर, जेल आईलाइनर, पॉवडर आईलाइनर,वैक्स आईलाइनर,शिमर आईलाइनर आदि। आईलाइनर कई रंगों में भी आते हैं जैसे काले, भूरे, चटकीले, पेस्टल, कोल्ड सिल्वर, गोल्डन और सफ़ेद आदि। 

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आईलाइनर के निर्माण में कई रासायनिक पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। कई आईलाइनर में मोम, स्टेराइल हेप्टोनेट , लोहे के ऑक्साइड, टाइटेनियम डाई ऑक्साइड ,अमोनियम एक्रिलेट्स, को पॉलीमर ग्लिसरीन, मिनिरल आयल, सुगन्धित पदार्थ,मॅग्नेशियम सिलिकेट आदि कई पदार्थों का बहुतायत में प्रयोग किया जाता है। आईलाइनर में इन पदार्थों की मौजूदगी की वजह से इसे आँखों के लिए बहुत स्वास्थकर नहीं माना जाता।

काजल और आईलाइनर में क्या अंतर है

  • काजल का प्रयोग आँखों में ऊपरी और निचले पलकों के किनारे को काला करने के लिए किया जाता है वहीँ आई लाइनर का प्रयोग आँखों की ऊपरी और निचली पलकों के बाहरी भागों को कलर करने के लिए होता है जिससे आँखें अच्छी तरह से शेप्ड हो जाएँ।
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  • काजल का प्रयोग महिलाएं, बच्चे और कई बार पुरुष भी करते हैं जबकि आई लाइनर का प्रयोग केवल महिलाएं करती हैं।

  • सौंदर्य प्रसाधन के साथ साथ काजल का औषधीय प्रयोग भी होता है। माना जाता है कि यह आँखों को शीतलता प्रदान करता है, संक्रमण से बचाता है और दृष्टि को तेज करता है। वहीँ आई लाइनर का प्रयोग केवल आँखों के सौंदर्य को बढ़ाने के लिए किया जाता है।

  • काजल का प्रयोग बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए भी किया जाता है जबकि आई लाइनर के साथ ऐसी कोई बात नहीं होती।
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  • काजल आँखों के अंदर चले जाने पर यह आँखों को कोई नुकसान नहीं पंहुचता है जबकि आई लाइनर आँखों के अंदर जाने पर आँखों को नुकसान पंहुचा सकता है।

  • काजल केवल काले रंग में ही उपलब्ध होता है जबकि आई लाइनर कई शेड्स में उपलब्ध होते हैं।
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  • काजल आँखों को गहरा दिखने में मदद करता है जबकि आई लाइनर आँखों को बड़ा और उभरा हुआ और ख़ास आकार में दिखाने में सहायता पंहुचाता है।

  • काजल प्रायः पेंसिल और क्रीमी टेक्सचर में उपलब्ध होता है जबकि आई लाइनर लिक्विड, वैक्स, जेल, पाउडर और पेंसिल में मिलता है।

  • काजल के निर्माण में प्राकृतिक पदार्थों का प्रयोग किया जाता है जबकि आई लाइनर को बनाने में कई रासायनिक पदार्थों का प्रयोग किया जाता है।

  • काजल को घर पर भी बड़े ही आसानी से तैयार किया जा सकता है वहीँ आई लाइनर को घर पर प्रायः नहीं बनाया जा सकता।
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उपसंहार

काजल और आई लाइनर न केवल आँखों को आकर्षक बनाते हैं बल्कि इनका आपके व्यक्तित्व को निखारने में भी ख़ासा रोल रहता है। काजल जहाँ आँखों के लिए सौंदर्य के साथ साथ अपने औषधीय गुणों के लिए प्रयोग में आती है वहीँ आई लाइनर आँखों की खूबसूरती को निखारने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। काजल और आई लाइनर दोनों में कई अंतर होते हुए भी दोनों का मुख्य उद्द्येश्य एक ही है।

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