गेंहू और चावल के पोषक तत्वों में क्या अंतर है : डायबिटीज या शुगर के मरीजों को चावल क्यों नहीं खाना चाहिए


गेंहू और चावल के पोषक तत्वों में क्या अंतर है


पूरी दुनिया का पेट भरने का क्रेडिट अगर किसी को जाता है तो वे हैं गेंहू और चावल। ये दो खाद्यान्न पुरे विश्व में मुख्य भोजन के तौर पर प्रयोग में अति प्राचीन काल से ही आते रहे हैं। दक्षिण एशिआई देशों में जहाँ चावल की खेती बहुतायत में होती है वहीँ गेंहू की पैदावार लगभग विश्व के सभी भागों में होती है। गेंहू और चावल दोनों ही जहाँ ऊर्जा से लबालब होते हैं वहीँ इनमें खनिज और विटामिन्स की भी अच्छी मात्रा पायी जाती है। यही वजह है इसके इस्तेमाल में अकसर लोग दुविधा में पड़ जाते हैं कि किसका इस्तेमाल बेहतर होगा। खासकर डायबिटीज या शुगर के मरीजों को समझ नहीं आता गेंहू की रोटी खाये या चावल। रोटी खाएं तो क्यों ? आखिर चावल क्यों नुकसानदायक है ? इस पोस्ट में गेंहू और चावल दोनों के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारियां दी गयी हैं और साथ ही गेंहू और चावल में पाए जाने वाले पोषक तत्वों के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही गेंहू और चावल के पोषक तत्वों में क्या अंतर है इसकी जानकारी भी एक दिलचस्प अंदाज में दी गयी है

गेंहू : अनादि काल से मनुष्य का मुख्य भोजन

गेंहू पुरे विश्व में उगाई जाने वाली फसल है और दुनिया भर में लोगों के मुख्य आहार का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। गेंहू का उपयोग मुख्य रूप से आटे के रूप में किया जाता है जिससे रोटी, डबल रोटी, कुकीज, दलिया, केक, पेस्ट्रीज, नूडल्स आदि बनाया जाता है। गेंहू के अन्य उपयोग में बियर और शराब है जो इसके फ़र्मन्टेशन से तैयार किया जाता है।

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गेंहू का इतिहास

गेंहू का प्रयोग अनादि काल से ही होता आया है। प्रागैतिहासिक काल में भी गेंहू के प्रयोग के प्रमाण मिले हैं। आज हम जिस गेंहू का प्रयोग करते हैं वह उन प्राचीन नस्लों का संकर बीज है हालाँकि इस गेंहू का प्रयोग लगभग 7500 वर्ष पूर्व शुरू हो चूका था।

गेंहू वनस्पति शास्त्र के अनुसार

गेंहू का पौधा एक प्रकार का घास होता है। इसका वानस्पतिक नाम ट्रिटिकम एस्टीवम है। हालाँकि गेंहू की कई प्रजातियां पायी जाती हैं और उन आधार पर उनके वैज्ञानिक नाम अलग अलग हो सकते हैं। गेंहू पोएसी फैमिली का पौधा है। गेंहू एक रबी फसल है और इसकी फसल के लिए समशीतोष्ण जलवायु की जरुरत होती है। इसकी खेती भारत के उत्तरी भागों में तथा दुनिया में इसकी खेती चीन, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, रूस, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में होती है।

गेंहू के उपयोग

गेंहू का प्रयोग मुख्य रूप से इसे पीसकर आटे के रूप में किया जाता है। इसके आटे से रोटी, पावरोटी, बिस्किट समेत कई चीज़ें बनायीं जाती हैं। गेंहू के अन्य प्रयोगों में मैदा, सूजी, दलिया, नूडल्स, पाश्ता आदि हैं। 

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गेंहू के पोषक तत्व

गेंहू में वे सारी खूबियां हैं जो एक भोजन में होना चाहिए। यह भरपूर ऊर्जा का स्रोत है। 100 ग्राम गेंहू के आटे में करीब 339 किलो कैलोरीज ऊर्जा, 72 ग्राम कार्बोहाइड्रेट्स, 14 ग्राम प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स, खनिज आदि समेत जीवन के कई आवश्यक तत्व पाए जाते हैं। गेंहू की रोटी का ग्लाइसेमिक करीब 62 के आस पास होता है।





Wheat flour 100 g
Calories
339 Kcal
Water
69%
Carbohydrates
72.57 g
Protein
13.7 g
Fat
1.87 g
Fiber
12.2 g
Sugar
0.41 g
Thiamine(B1)
39%
Riboflavin(B2)
18%
Niacin(B3)
42%
Vit B6
26%
Vit B5
20%
Vit B9
11%
Calcium
3%
Iron
30%
Magnesium
39%
Zinc
31%
Phosphorus
49%
Potassium
9%

चावल : लगभग आधी दुनिया का मुख्य आहार

चावल दुनिया में सबसे लोकप्रिय मुख्य भोजनों में से एक है। पुरे विश्व में यह लगभग आधे से अधिक देशों में मुख्य आहार है। भारत सहित एशिआ के कई देशों में यह खूब चाव से खाया जाता है। चावल को मुख्य रूप से उबाल कर भात बना कर खाया जाता है किन्तु भात के अलावे भी चावल कई अन्य रूप से खाने के काम आता है जैसे खिचड़ी, बिरयानी, तहरी, खीर, चूड़ा, भूंजा, आटे के रूप में आदि। चावल का एक अन्य उपयोग शराब बनाने में भी होता है। इनके अलावा भी चावल के कई अन्य उपयोग हैं जैसे चावल का सिरप, चावल का दूध और चावल की भूसी का तेल आदि।

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मनुष्य चावल कब से प्रयोग कर रहा है

चावल को इंसानों के उपयोग में आने वाला सबसे पुराने अनाज के रूप में माना जाता है। इसकी उत्पत्ति लगभग पांच से सात हज़ार साल पहले की मानी जाती है। विश्व की कई प्राचीन सभ्यताओं में जिसमे भारत और चीन शामिल है इसके उगाने के प्रमाण मिले हैं। संस्कृत में चावल को तंदुल, तमिल में अरिसि कहा जाता। है।

चावल वनस्पति शास्त्र के अनुसार

चावल एक घास प्रजाति का पौधा है जिसका वानस्पतिक नाम ओरिज़ा सटाइवा (एशिआई) या ओरिज़ा ग्लोबेरिमा (अफ़्रीकी चावल) होता है। यह पौधा ग्रेमिनी फ़ैमिली से सम्बन्ध रखता है। चावल के पौधे को धान कहा जाता है। चावल वास्तव में इसी पौधे का बीज होता है। इसका पौधा एक मीटर से कुछ ऊँचा होता है। धान एक खरीफ फसल है और इसके लिए भरपूर पानी चाहिए होता है।

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चावल में पाए जाने वाले पोषक तत्व

चावल में भरपूर कैलोरीज पायी जाती है। 100 ग्राम चावल में करीब 130 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है। यह करीब 73 के आस पास होता है। ज्ञातव्य हो कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स वह मान होता है जो किसी खाद्य पदार्थ के रक्त में शर्करा बढ़ाने की स्पीड को दर्शाता है। चावल मे करीब 69 प्रतिशत तक पानी होता है। इसके अलावा 28.1 ग्राम कार्बोहायड्रेट, 2.9 ग्राम प्रोटीन ,0.2 ग्राम वसा, कुछ मात्रा में ओमेगा एसिड, थोड़ी मात्रा में मिनरल्स और फाइबर होता है। ब्राउन राइस में फाइबर की मात्रा करीब 1.8 प्रतिशत होती है यही कारण है ब्राउन राइस बेहतर माना जाता है।



Rice 100 g
Calories
130 Kcal
Water
69%
Carbohydrates
28.1 g
Protein
2.9 g
Fat
0.2 g
Fiber
0.4 g
Sugar
0.05 g
Thiamine(B1)
2%
Riboflavin(B2)
1%
Niacin(B3)
3%
Vit B6
3%
Calcium
1%
Iron
2%
Magnesium
3%
Phosphorus
6%
Potassium
1%
Zinc
1%

गेंहू और चावल के पोषक तत्वों में क्या अंतर है

Difference Between Nutritional Values Of Wheat And Rice

  • गेंहू के आटे से बने डिशेज में फाइबर की प्रचुर मात्रा पायी जाती है वहीँ चावल में इसकी मात्रा बहुत कम पायी जाती है। यही वजह है गेंहू पेट और स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक माना जाता है।

  • गेंहू के आटे से बने व्यंजनों का पाचन धीमी गति से होता है। अतः काफी देर तक पेट खाली महसूस नहीं होता है। वहीँ चावल आसानी से और शीघ्र पच जाता है जिससे जल्दी ही भूख लग जाती है।

  • गेंहू में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा पायी जाती है जबकि चावल में कैल्शियम की बहुत थोड़ी मात्रा पायी जाती है।

  • गेंहू के आटे से बनी रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा नहीं होता है वहीँ चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स उच्च होता है। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों को चावल से परहेज रखने की सलाह दी जाती है।

  • गेंहू में जिंक, फॉस्फोरस, आयरन आदि मिनिरल्स की प्रचुर मात्रा पायी जाती है जबकि चावल में इन मिनिरल्स की मात्रा कम पायी जाती है।

  • गेंहू में प्रोटीन की अच्छी मात्रा पायी जाती है जबकि चावल में यह बहुत कम पाया जाता है।

  • गेंहू विटामिन बी काम्प्लेक्स का अच्छा स्रोत है जबकि चावल में यह बहुत कम पाया जाता है।

  • गेंहू में कार्बोहाइड्रेट्स चावल की तुलना में काफी अधिक पाया जाता है।

  • गेंहू के आटे के 100 ग्राम से करीब 329 किलो कैलोरीज ऊर्जा प्राप्त होती है जबकि चावल की इतनी ही मात्रा 130 किलो कैलोरीज ऊर्जा प्रदान करती है।

डायबिटीज या शुगर के मरीजों को चावल क्यों नहीं खाना चाहिए

गेंहू और चावल के पौष्टिक तत्वों की तुलना की जाय तो गेंहू के 100 ग्राम आटे के की रोटी 100 चावल की तुलना में काफी अधिक ऊर्जा और कार्बोस उत्पन्न करता है। इसके साथ ही गेंहू में फाइबर की मात्रा चावल की तुलना में काफी अधिक होती है। साथ ही मिनरल्स और विटामिन्स भी गेंहू की रोटी में चावल की तुलना में अच्छी मात्रा में मिलता है। सबसे मुख्य बात गेंहू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स चावल की तुलना में कम होता है और यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स के मान में माध्यम श्रेणी का माना जाता है।ग्लाइसेमिक इंडेक्स वह मान होता है जो किसी खाद्य पदार्थ के रक्त में शर्करा बढ़ाने की स्पीड को दर्शाता है। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों को चावल की अपेक्षा गेंहू की रोटी खाने की सलाह दी जाती है। 

उपसंहार 

गेंहू और चावल दोनों ही मनुष्य के पेट की क्षुधा को अति प्राचीन काल से ही शांत करते आये हैं। गेंहू जहाँ पोषक तत्वों और फाइबर के मामले में चावल से बेहतर होने की वजह से पेट और स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है वहीँ चावल अपने स्वाद और सुपाच्य होने की वजह से काफी लोकप्रिय भोजन की सूचि में शुमार होता है।


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