लाइफ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस में क्या अंतर है

लाइफ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस में क्या अंतर है 



मृत्यु प्रायः अनिश्चित होती है और इसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। ऐसे में यदि आय अर्जन करने वाले की मृत्यु हो जाय तो उसका परिवार बिखर जाता है। घर चलाना, बच्चों की पढाई, शादी विवाह सब मुश्किल हो जाता है। वैसे तो मृत्यु को टाला नहीं जा सकता किन्तु कमाने वाले व्यक्ति की अनुपस्थिति में परिवार को यदि उचित राशि मिल जाये तो आश्रितों की परेशानियों को कुछ कम जरूर किया जा सकता है। इन्शुरन्स यानि बीमा की अवधारणा इसी उद्द्येश्य की पूर्ति के लिए किया गया था। लोग अपने परिवार की सुरक्षा और मदद के लिए बीमा करवाते हैं। जीवन का बीमा दो तरह से किया जाता है एक फुल लाइफ इन्शुरन्स और दूसरा टर्म इन्शुरन्स। आज के इस पोस्ट के माध्यम से इन दोनों तरह के बीमा में अंतर को हम जानेंगे। 



लाइफ इंश्योरेंस 

जीवन बीमा एक क़ानूनी करार होता है जो पालिसी होल्डर और बीमा कंपनी के बीच किया जाता है जिसके द्वारा बीमा कंपनी पालिसी होल्डर को एक आश्वासन देती है कि पालिसी होल्डर की मृत्यु की स्थिति में करार में तय राशि उसके द्वारा नामांकित उत्तराधिकारी को दिया जाएगा। इस करार को जारी रखने के लिए पालिसी होल्डर को एक निश्चित राशि एक निश्चित अवधि के लिए एक पूर्वनिर्धारित समयांतराल पर देते रहना होता है।



लाइफ इंश्योरेंस या जीवन बीमा का इतिहास 

जीवन बीमा की शुरुवात प्राचीन रोम से मानी जा सकती है जहाँ शवों को दफ़न करने के लिए एक क्लब की स्थापना की गयी थी। इस क्लब का काम सदस्यों की मृत्यु पर उनके अंतिम संस्कार के खर्चों को वहन करना तथा वंचित लोगों को आर्थिक रूप से सहायता करना होता था। 1693 में एडमंड हैली ने जीवन बीमा की सबसे पहली लाइफ टेबल की रचना की थी किन्तु आधुनिक गणितीय और सांख्यिकीय लाइफ टेबल 1750 के दशक में जेम्स डॉडसन के द्वारा तैयार किया गया। आधुनिक काल में जीवन बीमा की शुरुवात करने वाली सबसे पहली कंपनी की स्थापना 1706 में विलियम टैल्बॉट और सर थॉमस एलन के द्वारा लन्दन में की गयी थी। इस कंपनी का नाम एमीकेबल सोसाइटी था।

जीवन बीमा यानि लाइफ इंश्योरेंस द्वारा व्यक्ति किसी के जीवित  नहीं रहने की दशा में क्षति का आकलन करके अनुमानित राशि का इंश्योरेंस कराता है। इसके लिए उसे एक निश्चित अंतराल पर कुछ राशि जमा करनी होती है। इस राशि को प्रीमियम कहते हैं। बीमा की अवधि पूर्ण होने पर बीमाधारक को वायदे के अनुसार मैच्युरिटी की रकम प्राप्त होती है और यदि इस अवधि ले बीच में धारक की मृत्यु होती है तो उसके द्वारा नामांकित उत्तराधिकारी को बीमा की राशि प्रदान की जाती है।

भारत में लाइफ इंश्योरेंस बीमा और बचत दोनों मिश्रण के तौर पर प्रचलित है। इसमें बीमाधारक निश्चित अवधि तक प्रीमियम जमा करता है और मैच्युरिटी पर बीमाधारक को बीमाधन, बोनस के अलावा अतिरिक्त बोनस दिया जाता है। इसके अलावा बीमा अवधि के पूर्व मृत्यु होने पर बीमा के समय करार की गयी राशि नॉमिनी को दी जाती है। यह राशि प्रायः प्रीमियम की 10 से 30 गुनी तक होती है।

टर्म इंश्योरेंस 

जीवन बीमा की तरह टर्म इन्शुरन्स भी एक तरह का लाइफ कवर होता है और व्यक्ति की मृत्यु पर नामित उत्तराधिकारी को इन्शुरन्स की राशि देने का वायदा करता है किन्तु टर्म इन्शुरन्स लाइफ इन्शुरन्स की तुलना में थोड़ा अलग होता है। टर्म इन्शुरन्स व्यक्ति के जीवन का बीमा एक निश्चित अवधि या सीमित अवधि के लिए होता है। इस निश्चित और सीमित अवधि के समाप्त हो जाने पर यह अप्रभावी हो जाता है। टर्म इंश्योरेंस एक बहुत ही लोकप्रिय बीमा स्कीम होता है और इसकी लोकप्रियता की मुख्य वजह इसका प्रीमियम काफी सस्ता होना होता है। जी हाँ टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम काफी कम होता है। किन्तु टर्म इंश्योरेंस लाइफ इंश्योरेंस की तरह बचत प्लान नहीं होने की वजह मैच्युरिटी पर कोई धनराशि नहीं मिलती। 

Car, Accident, Silhouette, Victim
टर्म लाइफ इंश्योरेंस वास्तव में एक आकस्मिक डेथ बेनिफिट होता है। इसका मुख्य उद्द्येश्य बीमाकर्ता के परिवार को उसकी मृत्यु के उपरांत आर्थिक क्षतिपूर्ति करना होता है जिससे उसके आश्रित को जीवन यापन, शादी विवाह, पढाई, ऋण उन्मोचन आदि में कोई परेशानी न हो। पालिसी धारक की आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवार को सुरक्षा प्रदान करना ही टर्म इंश्योरेंस का मुख्य उद्द्येश्य होता है। टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम काफी कम और शर्ते भी काफी सरल होती हैं। एक 30 वर्ष के युवक का एक करोड़ का टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम मात्र पांच सौ रुपये के आस पास प्रति माह हो सकता है। इसके प्रीमियम कम होने की वजह इसमें निवेश जैसी कोई चीज़ का न होना होता है। प्रीमियम की राशि का उपयोग जोखिम कवर करने में किया जाता है। पालिसी समाप्त होने पर पालिसी धारक को कोई मैच्युरिटी लाभ नहीं मिलता है। 

टर्म इंश्योरेंस कहाँ कराया जा सकता है 

भारत में कई बीमा कंपनियों में टर्म इंश्योरेंस की पालिसी लिया जा सकता है जैसे जीवन बीमा निगम, मैक्स, एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई, भारती अक़्सा, आईडीबीआई, बजाज, बिरला सन लाइफ आदि। 


लाइफ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस में क्या अंतर है 



  • लाइफ इंश्योरेंस में बीमित व्यक्ति की मृत्यु पर बीमित के नॉमिनी को डेथ बेनिफिट का लाभ मिलता है और मृत्यु न होने की दशा में बीमित व्यक्ति को मेच्यूरिटी बेनिफिट मिलता है वहीँ टर्म इंश्योरेंस में उस टर्म के दौरान बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर नॉमिनी को बीमा का लाभ मिलता है किन्तु टर्म पीरियड के ख़त्म होने पर उसे कोई मेच्यूरिटी का लाभ नहीं मिलता है।

  • लाइफ इंश्योरेंस में चूँकि निवेश भी किया जाता है अतः इसका प्रीमियम ज्यादा होता है वहीँ टर्म इंश्योरेंस में निवेश नहीं होता है अतः कम प्रीमियम में भी ज्यादा राशि का बीमा कराया जा सकता है।

  • लाइफ इंश्योरेंस को एक खास अवधि के बाद बंद कर दिया जाय तो भी उसे मैच्युरिटी के समय जमा धन कुछ कटौती के पश्चात मिलेगा किन्तु टर्म इंश्योरेंस में प्रीमियम भरना बंद करते ही रिस्क कवर ख़त्म हो जाता है।
  • लाइफ इंश्योरेंस एक रेगुलर इनकम वालों के लिए उपयुक्त होता है जबकि टर्म इंश्योरेंस उनके लिए उपयुक्त है जिनकी कमाई रेगुलर तथा स्थिर नहीं है।
Child Protection Services, Cps
  • लाइफ इंश्योरेंस बीमा और बचत दोनों का मिलाजुला रूप होता है जबकि टर्म इंश्योरेंस में केवल और केवल बीमा होता है।
  • लाइफ इंश्योरेंस के पालिसी बांड के अगेंस्ट में लोन लिया जा सकता है किन्तु टर्म इंश्योरेंस के अगेंस्ट में लोन नहीं लिया जा सकता। 
उपसंहार 

लाइफ इंश्योरेंस और टर्म प्लान दोनों ही व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात् परिवार की सहायता के लिए होते हैं और दुःख की घडी में परिवार को कम से कम आर्थिक संकट से उबार सकते हैं। लाइफ इंश्योरेंस चूँकि एक तरह की बचत योजना होती है अतः बीमा अवधि के पश्चात बीमित को उसका लाभ मिलता है वहीँ टर्म इंश्योरेंस बहुत कम प्रीमियम में बीमाधारक के परिवार को उच्च सुरक्षा प्रदान करती है। 


Post a Comment

0 Comments