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बार कोड तथा QR कोड में क्या अंतर है?


दोस्तों आज के इस डिजिटल युग में अधिकांश काम मशीनों और कंप्यूटर की सहायता से निष्पादित किये जा रहे हैं। इससे न केवल काम तीव्र गति से हो रहे हैं बल्कि त्रुटिहीन भी हो रहे हैं। कंप्यूटर से वस्तुओं के फ़ास्ट लेन देन करने के लिए हर वस्तु पर एक कोड की आवश्यकता होती है। यह कोड प्रायः खड़ी लाइन में या चौकोर खाने के रूप में वस्तुओं और उत्पादों पर छपी रहती हैं। इन्हें बार कोड या QR कोड कहा जाता है। आइये आज हम जानते हैं कि ये बार कोड और QR कोड क्या होते हैं और उनमे क्या अंतर होता है ?
बार कोड क्या है?
बार कोड एक ऐसा चिन्ह या कोड होता है जिसमे विभिन्न सूचनाओं को संगृहीत किया जाता है और जरुरत पड़ने पर उसे निकाला जा सकता है। यह सूचनाओं का लीनियर रिप्रजेंटेशन या रैखिक प्रस्तुतीकरण होता है जिसे ऑप्टिकल डिवाइस के माध्यम से रीड किया जाता है। बार कोड में संख्याएँ, चिह्न और अक्षर हो सकते हैं।  इन्हे कई वर्टीकल मोटी पतली पैरेलल रेखाओं के माध्यम से दर्शाया जाता है। इन लाइन्स के बीच दूरी कम ज्यादा हो सकती है। इसका मैट्रिक्स वन डायमेन्सन में होता है। 


बार कोड का सबसे पहले प्रयोग कमर्शियल कामों के लिए 1974 में किया गया था। उस समय इसे च्युइंग गम के पैकेट के ऊपर इस्तेमाल किया गया था। 
बार कोड में ब्लैक एंड वाइट वर्टीकल लाइन का प्रयोग किया जाता है।  इन रेखाओं में एक से लेकर नौ अंकों का प्रयोग होता है। हर नंबर में सात लाइन को चुना जाता है और हर लाइन के लिए अलग अलग नंबर होते हैं। जब इनको स्कैन किया जाता है तो सफ़ेद लाइन वापस परावर्तित हो जाती है जबकि ब्लैक लाइन ऑब्जर्व हो जाती हैं। परावर्तित लाइन को एक और ऑब्जर्व लाइन के लिए जीरो की वैल्यू होती है। बार कोड स्कैनर उसे सात सात से डिवाइड करके उसके अंदर की छिपी हुई जानकारी को डिकोड कर लेता है। 



बार कोड का प्रयोग आज कल हर जगह हो रहा है किन्तु इसका ज्यादा प्रयोग सुपर मार्किट की दुकानों पर होता है। इसका प्रयोग वस्तुओं के नाम, मैन्युफैक्चरिंग, आइटम कोड  आदि जानकारी के लिए किया जाता है। बार कोड को रीड करने के लिए बार कोड स्कैनर का प्रयोग किया जाता है।  आज कल स्मार्ट फोन में भी इसको रीड करने के फीचर आ गए हैं। 
बार कोड दो प्रकार का होता है वन डायमेन्सन बार कोड तथा टू डायमेन्सन बार कोड।
QR Code क्या है? 

QR कोड को हम बार कोड का ही विस्तृत रूप कह सकते हैं। यह वास्तव में 2 डायमेन्सन बार कोड  होता है।  QR कोड का पूरा नाम क्विक रिस्पांस होता है। इसके माध्यम से टेक्स्ट, कॉन्टेक्ट्स, फोटो, म्यूजिक आदि कई तरह की सूचनाओं को संगृहीत किया जा सकता है। इसमें सफ़ेद बैक ग्राउंड पर स्क्वायर डॉट्स आदि के माध्यम से सूचनाओं को एकत्रित किया जाता है। इसमें तीन कोनों में स्क्वायर ब्लॉक होते है तथा साथ ही टाइमिंग लाइन के साथ एरर कनेक्शन ब्लॉक होते है। 

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QR कोड का सबसे पहले 1994 में प्रयोग किया गया था। इसे जापानी कंपनी देंसो वेव के द्वारा तैयार किया गया था। इसे सबसे पहले ऑटोमोबाइलस के कई पार्ट्स को स्कैन करने के लिए किया गया था। 
QR कोड में तीन कोनों में तीन स्क्वायर ब्लॉक, टाइमिंग लाइन के साथ एरर कनेक्शन ब्लॉक तथा डॉट्स होते हैं। ये 4 by 2 ब्लॉक होते हैं। इन ब्लॉक में नंबर सेट होते हैं। ब्लैक ब्लॉक और वाइट स्पेस के माध्यम से विभिन्न जानकारियों का पूरा सेट होता है।  
QR कोड का उपयोग विभिन्न जानकारियों के आदान प्रदान के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से पेमेंट का लेन देन, पासवर्ड बताने के लिए, एक डिवाइस से दूसरी डिवाइस में डाटा ट्रांसफर करने में किया जाता है। 



बार कोड तथा QR कोड में क्या अंतर है ?


  • बार कोड 1 डायमेन्सन में प्रयोग होता है जबकि QR कोड 2 डायमेन्सन में प्रयोग किया जाता है। 

  • बार कोड में पैरलल वर्टीकल रेखाओं के माध्यम से डाटा संगृहीत किया जाता है जिसमे विभिन्न दूरियों पर कुछ मोटी कुछ पतली रेखाएं होती हैं वहीँ QR कोड में स्क्वायर, डॉट्स आदि के माध्यम से सूचनाओं को संगृहीत किया जाता है। 

  • बार कोड के द्वारा टेक्स्ट, अंक आदि को संगृहीत किया जाता है जबकि QR कोड में टेक्स्ट, अंक , फोटो, म्यूजिक, पासवर्ड आदि कई सूचनाएं संगृहीत की जा सकती है। 

  • बार कोड में बहुत कम जानकारी एकत्रित की जाती है जबकि QR कोड में बहुत ज्यादा जानकारी एकत्रित की जा सकती है। 

  • बार कोड को बार कोड स्कैनर के माध्यम से रीड किया जाता है वही QR कोड को 2 D स्कैनर तथा स्मार्ट फ़ोन में कई एप्स के माध्यम से डिकोड किया जा सकता है। 

  • बार कोड का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त होने पर स्कैनर इसे पढ़ नहीं सकता किन्तु QR कोड का कुछ हिस्सा नहीं रहने पर भी इसे डिकोड किया जा सकता है। 






Comments

  1. बहुत ही अछि जानकारी अखिलेश जी।। धन्यवाद।। और लिखते रहिये और साथ में SEO भी करते रहिए👌👌

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