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शिया और सुन्नी मुसलमानों में क्या अंतर है

शिया और सुन्नी मुसलमानों में क्या अंतर है

ईसाई धर्म के बाद अगर दुनिया में किसी धर्म के अनुयायी हैं तो वह इस्लाम धर्म के हैं। दुनियां में पचास से भी ज्यादा देश मुस्लिम बाहुल्य हैं। इसके अलावा मुस्लिम पूरी दुनिया के करीब करीब हर देश में हैं। इस्लाम के अनुयायिओं की इतनी संख्या होते हुए भी यह मजहब कई सम्प्रदायों में बंटा हुआ है जिसमे शिया और सुन्नी प्रमुख हैं। वैसे तो शिया और सुन्नी दोनों ही इस्लाम को ही मानने वाले हैं पर कई बातों में शिया और सुन्नी दोनों में अंतर है। आईये देखते हैं शिया और सुन्नी क्या हैं और शिया और सुन्नी दोनों में क्या अंतर है 


शिया मुस्लिम और उनका इतिहास इस्लाम धर्म कई सम्प्रदायों में बंटा हुआ है। शिया मुस्लिम भी इन्ही में से एक होते हैं। शिया मुस्लिमों का पुरे इस्लाम में सुन्नियों के बाद दूसरा स्थान है। वैसे तो इनकी संख्या पूरी मुस्लिम आबादी का केवल 15 प्रतिशत ही है। शिया मुस्लिमों का इतिहास मोहम्मद साहेब की मृत्यु के बाद से ही शुरू होता है। शियाओं के उदय की वास्तविक वजह उत्तराधिकार विवाद था। सन 632 में मोहम्मद साहेब की मृत्यु के पश्चात् उनकी ग़दीर की वसीयत के मुताबिक ह…

MLA और MLC में क्या अंतर है



राज्यों का शासन चलाने के लिए उनकी अपनी विधान मंडल होती है। इस विधान मंडल में चुने हुए प्रतिनिधि जनता के हित में शासन सम्बन्धी प्रस्तावों पर चर्चा करते हैं। कई राज्यों में विधान मंडल के दो सदन होते हैं एक विधान सभा तथा दूसरी विधान परिषद्। इन सदनों के सदस्यों को क्रमशः MLA और MLC कहा जाता है। यद्यपि ये दोनों विधान मंडल के सदस्य होते हैं तो भी इनके निर्वाचन, न्यूनत्तम आयु, कार्यावधि आदि में काफी अंतर होता है। आज इस पोस्ट में हम जानेगे MLA और 
MLC क्या होते हैं और उन दोनों में क्या अंतर होता है


MLA क्या होता है और MLA का फुलफॉर्म क्या होता है


MLA किसी विधान सभा का सदस्य होता है। यह किसी खास क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधि होता है। MLA का फुलफॉर्म होता है Member of Legislative Assembly . इसे हिंदी में विधायक या विधानसभा सदस्य भी कहते हैं। MLA चूँकि जनता का प्रतिनिधि होता है अतः वह जनता की समस्याओं को विधान सभा में उठाता है। इसके साथ ही वह कई अन्य जिम्मेदारियों का वहन करता है जैसे राज्य की जनता के हित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना, विधेयक पारित करवाना आदि। MLA की कार्यावधि पांच साल होती है। MLA बनने के लिए न्यूनत्तम आयु पच्चीस साल है। MLA वही व्यक्ति बन सकता है जो भारत का नागरिक हो और किसी विधान सभा क्षेत्र का मतदाता हो। उसे मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। MLA का चुनाव सीधे जनता द्वारा प्रत्यक्ष मतदान के द्वारा होता है।


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MLC क्या होता है

MLC का फुलफॉर्म क्या होता है




MLA के तरह 
MLC भी विधान मंडल का सदस्य होता है किन्तु यह विधान सभा का नहीं बल्कि विधान परिषद् का सदस्य होता है। एमएलसी का फुलफॉर्म Member of Legislative Council होता है। MLC का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष मतदान से नहीं होता है।MLC का कार्यकाल छह साल का होता है। एमएलसी बनने की न्यूनत्तम आयु 30 साल होती है। MLC बनने के लिए उम्मीदवार को मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए तथा उस राज्य के मतदाता सूचि में उसका नाम होना चाहिए। साथ ही उसे दिवालिया नहीं होना चाहिए। एमएलसी का चुनाव विधायकों द्वारा, नगर पालिका, नगरनिगम, बोर्डों, निकायों के सदस्यों द्वारा ,रजिस्टरड स्नातकों द्वारा होता है। कुछ एमएलसी को राज्यपाल मनोनीत करते हैं जो कला,शिक्षा, विज्ञानं,खेल , साहित्य आदि क्षेत्रों में विशिष्टता रखते हैं। 


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MLA और MLC में क्या अंतर है 

  • MLA का फुलफॉर्म होता है Member of Legislative Assembly जबकि एमएलसी का फुल फॉर्म होता है Member of Legislative Council
  • MLA किसी राज्य की विधान सभा का सदस्य होता है जबकि एमएलसी किसी राज्य के विधान परिषद् का सदस्य होता है।
  • MLA चुने जाने के लिए न्यूनत्तम उम्र 25 वर्ष होती है जबकि एमएलसी चुने जाने की न्यूनत्तम उम्र 30 साल होती है।

  • MLA का निर्वाचन जनता के द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव में होता है जबकि एमएलसी का चुनाव अप्रत्यक्ष चुनाव द्वारा होता है।

  • MLA का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है जबकि एमएलसी की कार्यावधि छह साल होती है।

  • पूरी विधान सभा में केवल एक MLA को राजयपाल आवश्यकतानुसार मनोनीत कर सकते हैं किन्तु राजयपाल द्वारा विधान परिषद् में कई एमएलसी जो विज्ञानं, कला, खेल, साहित्य आदि क्षेत्रों में विशिष्ट योग्यता रखने वालों में से मनोनीत किये जाते हैं।

इस तरह हमने देखा कि MLA और एमएलसी दोनों क्या हैं और इनमे क्या अंतर है। MLA और 
MLC दोनों हमारी जनता के प्रतिनिधि हैं और राज्य की शासन व्यवस्था में इनका काफी योगदान होता है।

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