भार और द्रव्यमान में क्या अंतर है

भार और द्रव्यमान में क्या अंतर है 



आमतौर पर किसी वस्तु के भार और द्रव्यमान को एक ही मान लिया जाता है। किन्तु यह सही नहीं है। विज्ञान की दृष्टि में भार और द्रव्यमान दोनों दो बाते होती हैं और एक की जगह दूसरे को हम प्रयोग नहीं कर सकते हैं। किसी वस्तु का परिमाण वस्तु पर लगे बाहरी बल से प्रभावित नहीं होता है और यह अपरिवर्तनीय होता है जबकि भार उसपर लगे बल का समानुपाती होता है।

भार क्या होता है 

भार की परिभाषा क्या होती है 

किसी वस्तु का भार उस वस्तु पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिणाम होता है। चूँकि किसी वस्तु के भार में उस पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल की मुख्य भूमिका होती है अतः वस्तु का भार स्थान के साथ साथ परिवर्तनशील होता है। गुरुत्वाकर्षण बल को प्रायः अंग्रेजी भाषा के 'g' अक्षर से दर्शाया जाता है। g का मान पृथ्वी पर ही ध्रुवों के मुकाबले विषुवत रेखा पर अधिक होता है। इसके अतिरिक्त अन्य ग्रहो और उपग्रहों पर भी g का मान भिन्न भिन्न होता है। इसी वजह से किसी वस्तु का भार अलग अलग जगहों पर अलग अलग होता है। चन्द्रमा का गुरुत्वबल पृथ्वी की तुलना में छठवां हिस्सा होता है। अतः पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार चन्द्रमा पर उसके भार छह गुणा होता है। 

कमानीदार तुला - विकिपीडिया
किसी वस्तु का भार उस पर लग रहे बल का परिणाम है जो उस वस्तु पर लगने वाले g की दिशा पर निर्भर करता है। चूँकि भार में वस्तु की मात्रा और दिशा दोनों ही होती है अतः भार को सदिश राशि कहा जाता है। भार का SI मात्रक न्यूटन होता है। भार को कमानीदार तुला द्वारा मापा जाता है।

भार हमेशा ही वस्तु के परिमाण और उस पर लगने वाले गुरुत्व बल के गुणनफल के बराबर होता है।

चूँकि किसी वस्तु का भार उस पर लगने वाले गुरुत्व बल पर निर्भर करता है अतः किसी वस्तु का भार शून्य भी हो सकता है। ऐसी स्थिति अंतरिक्ष में आती है जहाँ भारहीनता का अनुभव होता है। 

Micro-g environment - Wikipedia

द्रव्यमान क्या है 

द्रव्यमान की परिभाषा क्या है 

किसी वस्तु में उस्पस्थित पदार्थ की मात्रा को उसका द्रव्यमान कहते हैं। वास्तव में यह उस वस्तु के जड़त्व की माप होती है। किसी वस्तु के द्रव्यमान पर किसी अन्य बाहरी बल का कोई प्रभाव नहीं होता है अतः द्रव्यमान हमेशा स्थिर और अपरिवर्तनीय होता है। यह पदार्थ का आतंरिक गुण होता है। यही वजह है कि भार के विपरीत किसी वस्तु का द्रव्यमान में स्थान परिवर्तन से में कोई अंतर नहीं आता। यहाँ तक कि किसी वस्तु का द्रव्यमान जितना पृथ्वी पर है उतना ही किसी भी अन्य ग्रह या उपग्रह या चन्द्रमा पर होगा। 

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द्रव्यमान में चूँकि वस्तु का केवल परिमाण होता है अतः यह एक अदिश राशि है। द्रव्यमान का SI मात्रक किलोग्राम होता है। इसे ग्राम और मिलीग्राम में भी मापा जाता है। किसी वस्तु का द्रव्यमान को मापने के लिए साधारण तुला की आवश्यकता पड़ती है।

किसी वस्तु का द्रव्यमान कभी भी शून्य नहीं हो सकता है।

भार और द्रव्यमान में क्या अंतर है 


  • किसी पदार्थ का भार उस पर लगे हुए गुरुत्वाकर्षण बल पर निर्भर करता है जबकि किसी पदार्थ का द्रव्यमान उस पदार्थ में उस्पस्थित द्रव्य की मात्रा होती है।


  • किसी पदार्थ का भार स्थान परिवर्तन के साथ बदल जाता है। पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार चन्द्रमा पर उसी वस्तु के भार से अलग होता है। वहीँ किसी वस्तु का द्रव्यमान हर जगह एक समान रहता है।
पदार्थ - विकिपीडिया

  • किसी वस्तु का भार शून्य हो सकता है यदि उस पर लगा गुरुत्व बल शून्य हो जाए। ऐसी घटना अंतरिक्ष में होती है जहाँ गुरुत्वाकर्षण शून्य होता है और भारहीनता की स्थिति आती है। किसी वस्तु का द्रव्यमान किसी भी परिस्थिति में शून्य नहीं हो सकता।


  • भार सदिश राशि होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसमें परिमाण के साथ साथ इसकी दिशा पृथ्वी के गुरुत्व केंद्र की तरफ होती है जबकि द्रव्यमान एक अदिश राशि होती है।


  • भार को कमानीदार तुला द्वारा मापा जा सकता है किन्तु द्रव्यमान को किसी सामान्य तुला से भी मापा जा सकता है।


  • भार का SI मात्रक न्यूटन होता है जबकि द्रव्यमान का SI मात्रक किलोग्राम होता है
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  • किसी वस्तु का भार उसके द्रव्यमान और उसपर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के गुणनफल के बराबर होता है जबकि किसी वस्तु का द्रव्यमान उसके आयतन और घनत्व के गुणनफल के बराबर होता है
उपसंहार

इस प्रकार हम देखते हैं किसी वस्तु का भार और उसका द्रव्यमान दोनों दो चीज़ें होती हैं। भार वस्तु के परिमाण पर लगे हुए बल को इंगित करता है। इसी वजह से इसका मान उस पर लगे बल के आधार पर घटता बढ़ता है। दूसरी तरफ किसी वस्तु के द्रव्यमान पर किसी तरह के बल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह उस पदार्थ की मात्रा होती है। यह हमेशा नियत होती है।

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