Rashtra Gaan Aur Rashtra Geet Me Kya Antar Hai



दोस्तों किसी भी देश के लिए उसका राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत उसकी अस्मिता और उसकी पहचान से जुड़ी हुई होती है। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत देश को एकसूत्र में पिरोने का भी कार्य करती है। यह देश की धरोहर होती है और सम्मान का प्रतिक होती है। हर देश का अपना एक राष्ट्रगान होता है। हमारे देश में भी हमारा राष्ट्रगान "जन गण अधिनायक जय है भारत भाग्य विधाता है" जो सभी राष्ट्रीय त्योहारों पर गाया जाता है। हमारे देश में राष्ट्रगान के अलावे एक राष्ट्र गीत भी है। इसे भी राष्ट्रीय त्योहारों पर गाया जाता है। हमारा राष्ट्रगीत "वंदे मातरम "है। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमारे अंदर देशभक्ति की भावना जगाता है और हम देश के लिए की गयी कुर्बानियों को याद करते हैं। कई बार लोगों के मन में सवाल उठते हैं कि जब दोनों गीतों को राष्ट्रीय महत्व के अवसरों पर गाया जाता है तो फिर इन दोनों में अर्थात राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में अंतर क्या है?  आईये आज हम इस पोस्ट के माध्यम से जानते हैं कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में क्या अंतर है। 

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राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में क्या अंतर है ?



  • राष्ट्रगान किसी देश का वह गीत होता है जो उस देश की सभी राष्ट्रीय महत्व के अवसरों पर अनिवार्य रूप से गाया जाता है जबकि राष्ट्र गीत हर उस अवसर पर गाना अनिवार्य नहीं है। 



  • हमारे देश का राष्ट्रगान "जन गण अधिनायक जय है भारत भाग्य विधाता है " जबकि हमारा राष्ट्रगीत "वंदे मातरम "है।



  • हमारे देश के राष्ट्रगान की रचना गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने की थी जबकि राष्ट्रगीत के रचयिता वंकिम चंद्र ने की। 



  • रविंद्र नाथ टैगोर ने राष्ट्रगान को मूल रूप से बांग्ला में लिखा था जिसे बाद में हिंदी और अंग्रेजी में अनुदित किया गया जबकि राष्ट्रगीत की रचना बांग्ला और संस्कृत में किया गया था। 



  • "जन गण अधिनायक जय है भारत भाग्य विधाता " की रचना रविंद्र नाथ टैगोर ने 1911 ईस्वी में की थी जबकि  "वंदे मातरम " की रचना इससे काफी पहले 1882 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की। 



  • "जन गण अधिनायक जय है भारत भाग्य विधाता" मूल रूप से रविंद्र नाथ टैगोर की नोबेल पुरस्कार प्राप्त कृति "गीतांजली" का अंश है जबकि "वंदे मातरम " बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के द्वारा रचित प्रसिद्ध उपन्यास "आनंद मठ" की एक कविता है। 



  • हमारे राष्ट्रगान को सबसे पहले 27 दिसंबर 1911  में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था जबकि हमारे राष्ट्रगीत को सबसे पहले 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया। 



  • दोनों गीतों को 24 जनवरी 1950 में भारतीय संविधान द्वारा क्रमशः राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया गया। राष्ट्रगान को  52 सेकंड में गाया जाने के नियम है राष्ट्रगीत को भी गाने में लगभग 52 सेकंड ही लगते हैं।  

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  • राष्ट्रगान बजाते समय कुछ नियम हैं जिनका पालन करना जरुरी होता है। इसके बजने के समय प्रत्येक नागरिक को सावधान मुद्रा में खड़े हो जाना चाहिए इसके साथ ही उनसे ये अपेक्षा की जाती है कि वे इसे दुहराएँ। राष्ट्रगीत बजने के समय ऐसा कोई नियम नहीं है। 

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