वामपंथ क्या है : वामपंथ और दक्षिणपंथ में क्या अंतर है


वामपंथ और दक्षिणपंथ में क्या अंतर है





किसी भी समाज में असमानता और शोषण उसका एक स्वाभाविक और अनिवार्य पहलु है। समाज की यह असमानता और शोषण समाज में शोषक और शोषित वर्गों को जन्म देता है। समाज में यह वर्गों का अंतर कई बार वर्ग संघर्ष को जन्म देता है। इस वर्ग संघर्ष के पीछे इन वर्गों की विचारधारायें काम करती है जिसका जन्म परिस्थितियों की वजह से स्वाभाविक रूप से होता है। जहाँ शोषित समाज की भावना और प्रयास रहता है कि कुछ ऐसा हो जिससे समाज में असमानता और शोषण समाप्त हो जाए वहीँ समाज का एक वर्ग ऐसा होता है जो पुरातन व्यवस्था को बनाये रखना चाहता है। इस वर्ग के अनुसार असमानता प्राकृतिक है और समाज के विकास में इसका योगदान है। ये दो विचारधाराएं एक दूसरे के धुर विरोधी हैं और इन्हीं विचारधाराओं ने वामपंथ और दक्षिणपंथ आन्दोलनों को जन्म दिया और लगभग पुरे विश्व की राजनीती में इन दोनों विचारधाराओं ने अपना असर दिखाया है। चूँकि दोनों ही सिद्धांत एकदम एक दूसरे के विपरीत हैं अतः कुछ राजनीतिक आंदोलन इन दोनों से निरपेक्ष मध्यम मार्ग लेकर चलती हैं और दोनों ही विचारधाराओं की अच्छी और उपयोगी बातों का अनुसरण करती हैं और विचारधाराओं की कट्टरता को नकारती हैं। इस तरह की राजनीती मध्यममार्गी कहलाती हैं। इसी तरह कुछ राजनितिक दल मध्यममार्ग से कुछ ज्यादा और वामपंथ की तरफ कुछ ज्यादा झुकाव को लेकर चलते हैं। इन दलों को समाजवादी या फार लेफ्ट दल या सेंटर लेफ्ट कहा जाता है। कुछ दल कई मामलों में दक्षिणपंथ से प्रभावित होते हैं पर उनका ज्यादा झुकाव माध्यम मार्ग की तरफ होता है। 





वामपंथ क्या है


वामपंथ वास्तव में एक विचार है जो समानता और शोषणमुक्त समाज की कल्पना पर आधारित है। इस विचारधारा को मानने वाले राजनीतिज्ञ दल सामाजिक समता और समाजवाद का समर्थन करते हैं और किसी भी प्रकार के आनुवंशिक पदाधिकार का विरोध करते हैं। ये लोग वंचितों के अधिकारों के लिए प्रयासरत रहते हैं। वामपंथ उत्पादन के सभी संसाधनों पर राज्य का अधिकार मानते हैं। कट्टर वामपंथ वास्तव में मजदूरों और कृषकों के अधिकारों के लिए संघर्ष की एक प्रतिक्रियात्मक विचारधारा है जो समानता और शोषणमुक्त समाज के लिए प्रायः क्रांति की आवश्यकता पर बल देता है। यही वजह है यह पुरी तरह से पूंजीवाद और राजशाही के खिलाफ होता है। यह बाज़ारवाद और मुनाफाखोरी को गलत मानता है।

वामपंथ में सरकार के दायित्व


वामपंथ कई मामलों में सरकार को सामाजिक सुरक्षा, जनस्वास्थ्य, निशुल्क जन शिक्षा, रोजगार,पर्यावरण, कठोर श्रम कानून आदि के लिए उत्तरदायी मानता है और इन क्षेत्रों में सीधे सरकार की भागीदारी चाहता है। यही वजह है साम्यवाद, समाजवाद , सहकारितावाद और उदारवाद सभी वामपंथ खेमे में आते हैं।

वामपंथ शब्द कहाँ से आया



वामपंथ को वामपंथ कहने के पीछे एक कहानी है और इस कहानी की शुरुवात फ़्रांस से हुई। सन 1789 में फ्रांस के राष्ट्रीय असेम्बली में संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए बैठक बुलाई गई थी। फ़्रांस के राजा लुई 16 को कितना अधिकार मिलना चाहिए, इस पर चर्चा होनी थी। सभा में उच्च वर्ग और पादरी वर्ग के साथ साथ मजदुर वर्ग के सदस्य भी थें। उच्च तथा पादरी वर्ग के लोग सामान्य तथा साधारण मजदूरों के साथ साथ नहीं बैठना चाहते थे। अतः वे उनसे अलग पीठासीन अधिकारी के दायीं ओर बैठ गए। यह वर्ग राजशाही का समर्थक था और समाज की पुरातन व्यवस्था को बनाये रखने के पक्ष में थे। दूसरी तरफ आम जन से आये हुए सदस्यों का मत राजशाही का विरोध करना था। ये लोग पीठासीन अधिकारी के बायीं ओर बैठे। यहीं से इन लोगों के लिए लेफ्ट विंग तथा पुरातन व्यवस्था के समर्थक के लिए राइट विंग शब्द प्रयोग होना शुरू हुआ। बाद के कुछ वर्षों में अखबारों ने इन शब्दों का खूब इस्तेमाल किया। हालाँकि बीच के कुछ वर्षों में फिर ये टर्म लुप्त हो गए। पुनः 1814 फ्रांस में संवैधानिक राजशाही शुरू होने पर लिबरल और कंजर्वेटिव पार्टियों के सदस्यों के बैठने की व्यवस्था बाएं और दाएं हो गयी। स्थानीय समाचारपत्रों ने भी इन विचारधाराओं के लिए लेफ्ट और राइट शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। बाद में यही कांसेप्ट दुनिया के अन्य हिस्सों में भी प्रयोग होने लगा। बहुत सारे देशों में हालाँकि इसे बैठने की व्यवस्था से कोई लेना देना नहीं है। लेफ्ट और राइट का यह कांसेप्ट बाद में अन्य राजनीतिक पार्टियों एक पैमाना बन गया और सभी राजनीतिक दल अपने को इसी के सन्दर्भ में सेंटर, सेंटर लेफ्ट, सेंटर राइट, एक्सट्रीम लेफ्ट और एक्सट्रीम राइट के रूप में पेश करने लगे।


Street, Banner, Action, Resist


वामपंथ के सिद्धांत


वामपंथ समाज में अंतिम व्यक्ति तक विकास और समानता की वकालत करता है। यह समाज में परिवर्तन और नए विचारों की वकालत करता है और परम्परा, अन्धविश्वास और कुरीतियों की हमेशा खिलाफत करता है। कट्टर वामपंथ में धर्म और जाति का कोई स्थान नहीं है हालाँकि उदार वामपंथ धर्मनिरपेक्ष समाज की वकालत करता है। वामपंथ हमेशा से परिवर्तन और सुधार का पक्षधर रहा है और इसके लिए वह क्रांति के लिए भी तैयार रहता है। वामपंथ पूंजीपतियों पर ज्यादा टैक्स लगाने का हिमायती होता है। वामपंथ के समर्थक समलिंगी विवाह को स्वीकार करते हैं वे मृत्युदंड के प्रायः खिलाफ होते हैं और इमिग्रेशन के पक्ष में होते हैं।

कौन हैं वामपंथी पार्टियां



सैद्धांतिक रूप से देखा जाय तो अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी ब्रिटेन की लिबरल पार्टी वामपंथ को फॉलो करती हैं वहीँ भारत के सन्दर्भ में देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी, शिव सेना और एआईएमआईएम को छोड़ बाकी सारी पार्टियां वामपंथ का अनुसरण करती हैं। इनमे कम्युनिस्ट पार्टियां एक्सट्रीम लेफ्ट तथा समाजवादी पार्टी, आप, कांग्रेस आदि राजनितिक पार्टियां कहीं न कहीं सेंटर लेफ्ट में आती हैं।

वामपंथ के दुष्प्रभाव 



वामपंथ वैसे तो सामाजिक समानता की वकालत करता है किन्तु कई बार यह व्यक्तिगत श्रम और प्रतिभा का उचित मूलयांकन नहीं कर पाता। परिश्रमी और प्रतिभाशाली व्यक्ति इस वजह से हतोत्साहित होते हैं और इसका असर समाज के विकास पर पड़ता है। कई बार वामपंथ चरम की ओर बढ़ता है और यह तानाशाही में तब्दील हो जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकार कुचले जाते हैं। व्यवस्था परिवर्तन और सुधार के नाम पर चले आंदोलन में फिर परिवर्तन अस्वम्भाव सा हो जाता है।


दक्षिणपंथ क्या है



वामपंथ की तरह ही दक्षिणपंथ भी राजनीति की एक विचारधारा है। यह विचारधारा वामपंथ के ठीक विपरीत है और यह समाज के ऐतिहासिक रिवाज,परंपरा, संस्कृति, सामाजिक वर्गीकरण और धार्मिक पहचान को अक्षुण्ण रखना चाहती है। दक्षिणपंथ अपने गौरवशाली इतिहास और परंपरा के साथ साथ सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन नहीं चाहता। दक्षिणपंथ धर्म को शासन का आधार मानता है। दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रभावित राजनीतिक पार्टियां सामाजिक असमानता, शोषण और शोषित को प्राकृतिक और समाज के लिए अपरिहार्य मानती हैं।


दक्षिणपंथ शब्द कहाँ से आया


दक्षिणपंथ शब्द का उद्भव फ़्रांसिसी क्रांति से 1789 से हुआ माना जाता है। फ़्रांस की नेशनल एसेम्बली में मोनार्की के पक्षधर उच्च वर्ग और पादरी लोगों के प्रतिनिधि एसेम्बली में दायीं ओर बैठते थे। उस दौर के अख़बारों ने इसी वजह से इन दलों को राइट विंग लिखना शुरू किया।आगे चलकर पुरे विश्व की राजनीति में इसी सन्दर्भ में पुरातन सामाजिक व्यवस्था बनाये रखने वाले दलों के लिए दक्षिणपंथी शब्द का प्रयोग होने लगा। 




दक्षिणपंथ के सिद्धांत


दक्षिणपंथ या राइट विंग इमिग्रेशन को सांस्कृतिक विरासत के लिए खतरा मानता है इसी वजह से यह विचारधारा इमीग्रेशन के खिलाफ है। दक्षिणपंथ उद्द्यमियों और धनाढ्य लोगों पर उदार या कम टैक्स की वकालत करता है। इनका मानना है इनका राज्य के विकास में योगदान होता है अतः कठोर टैक्स लगाकर इन्हे हतोत्साहित नहीं करना चाहिए। दक्षिणपंथी विचारधारा में सरकारों की सीमित भूमिका होती है। यहाँ तक कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाएं भी सरकार अपने हाथ में रखना नहीं चाहती। दक्षिणपंथी समलिंगी विवाह को अप्राकृतिक और गैर कानूनी मानते हैं। इस विचारधारा के अंतर्गत मृत्युदंड को स्वीकार किया जाता है। सामाजिक ऊंच नीच, गरीबी अमीरी आदि असमानता को दक्षिणपंथ में स्वाभाविक और प्राकृतिक माना जाता है और इसे समाज के विकास के लिए आवश्यक समझा जाता है। दक्षिणपंथ और पूँजीवाद एक ही सिक्के के दो पहलु माने जाते हैं।

दक्षिणपंथ में व्यवस्था परिवर्तन को अनावश्यक और अस्वीकार्य माना जाता है। असमानता और वर्ग विभेद प्रतिभावान और मेहनतकश लोगों का पारितोषिक समझा जाता है। यह भेद लोगों के अंदर एक प्रतियोगिता की भावना जगाती है और हर कोई अपने सामाजिक स्तर को ऊँचा करने के लिए मेहनत करता है। मेहनत का लाभ जब व्यक्तिगत और स्वयं का होता है तो हर कोई के अंदर मेहनत की लालसा और होड़ पैदा होने लगती है। इससे समाज का भी विकास होता है। दक्षिणपंथ पीढ़ी दर पीढ़ी के अनुभवों को सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक व्यवस्था के रूप में स्वीकार कर उससे लाभ लेना चाहता है।


दक्षिणपंथ के दुष्प्रभाव

 
दक्षिणपंथ विचारधारा के अनेक पहलुओं के साथ साथ इसके कुछ भयंकर दुष्प्रभाव भी हैं। दक्षिणपंथ समाज में असमानता पैदा करता है। सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से समाज का एक बड़ा वर्ग वंचित हो जाता है। दक्षिणपंथ में अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा मुश्किल होती है। उग्र दक्षिणपंथ फासीवाद और नाज़ीवाद की ओर ले जाता है। 




वामपंथ और दक्षिणपंथ में क्या अंतर है


  • वामपंथ विचारधारा सामाजिक समानता के लिए व्यवस्था परिवर्तन को उचित और आवश्यक मनाता है जबकि दक्षिणपंथ सामाजिक असमानता को प्राकृतिक और अपरिहार्य मानता है और व्यवस्था परिवर्तन को अनुचित और अनावश्यक मानता है।

  • वामपंथ जाति, वर्ण, धर्म, राष्ट्र और सीमा को नहीं मानते वहीँ दक्षिणपंथ जाति,वर्ण, धर्म और राष्ट्र को मानते हैं।
  • वामपंथ राज्य के व्यापक उत्तरदायित्व को जरुरी समझता है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार को राज्य की जिम्मेवारी माना जाता है। दक्षिणपंथ में सरकार का दायित्व बहुत ही सीमित होता है।

  • वामपंथ जब सॉफ्ट होता है तो वह समाजवाद और अन्य सेंटर लेफ्ट दल के रूप में सामने आता है वहीँ दक्षिणपंथ जब सॉफ्ट होता है तो वह उदारवादी दक्षिणपंथ के रूप में सामने आता है।

  • वामपंथ जब उग्र होता है तो तानाशाही के रूप में सामने आता है जबकि दक्षिणपंथ जब अपने चरम पर होता है तो फासीवाद का रूप ले लेता है।

  • उग्र वामपंथ को छोड़ अन्य वामपंथी धर्मनिरपेक्ष समाज की परिकल्पना करते हैं वहीँ दक्षिणपंथ में धर्मनिरपेक्षिता का कोई स्थान नहीं है।


उपसंहार 


वामपंथ और दक्षिणपंथ एकदम से एक दूसरे के विपरीत दो अलग अलग ध्रुवों पर खड़ी विचारधाराएं हैं जिनके आधारभूत मूल सिद्धांत ही एक दूसरे से अलग हैं। पुरे विश्व की राजनितिक विचारधाराएं इन दोनों के ही गिर्द घूमती हैं। वामपंथ जब कट्टरता की तरफ बढ़ता है तो वह तानाशाही में तब्दील हो जाता है इसी तरह दक्षिणपंथ में जब कट्टरता आ जाती है तो वह फासीवाद का रूप ले लेती है।


Ref:
https://en.wikipedia.org/wiki/Left-wing_politics
https://en.wikipedia.org/wiki/Right-wing_politics
https://en.wikipedia.org/wiki/Left%E2%80%93right_political_spectrum
https://www.diffen.com/difference/Left_Wing_vs_Right_Wing
https://www.quora.com/What-is-the-difference-between-the-left-wing-and-the-right-wing-What-is-the-difference-on-a-basic-level-and-on-a-hardcore-politician-level
https://www.youtube.com/watch?v=xYdvj28s6bk
https://www.history.com/news/how-did-the-political-labels-left-wing-and-right-wing-originate
https://www.youtube.com/watch?v=MjbKuEwNq0E&t=826s

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