Visit blogadda.com to discover Indian blogs राज्यपाल और उपराज्यपाल अथवा लेफ्टिनेंट गवर्नर में क्या अंतर है

राज्यपाल और उपराज्यपाल अथवा लेफ्टिनेंट गवर्नर में क्या अंतर है

राज्यपाल और उपराज्यपाल अथवा लेफ्टिनेंट गवर्नर में क्या अंतर है


भारत में शासन की दृष्टि से दो तरह की सरकारों का प्रावधान है एक संघीय शासन व्यवस्था और दूसरी राज्य शासन व्यवस्था। केंद्र को अपने सभी राज्य सरकारों के साथ समन्वय बना कर चलना होता है। इसके लिए हर राज्य में केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में राज्यपाल की नियुक्ति की जाती है। भारत में 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश हैं। केंद्रशासित प्रदेशों में जम्मू और कश्मीर, पुड्डुचेरी और दिल्ली में भी विधान सभा की व्यवस्था की गयी है और इन राज्यों में राज्यपाल की तरह का एक पद सृजित किया जाता है जिसे उप राज्यपाल कहा जाता है। अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासक की नियुक्ति की जाती है। आज के पोस्ट में हम जानेंगे कि राज्यपाल और उपराज्यपाल में क्या अंतर होता है। राज्यपाल और उपराज्यपाल का पद समान होते हुए भी दोनों में कई अंतर होता है। इसके साथ ही हम देखेंगे राज्यपाल क्या होता है, राज्यपाल की नियुक्ति, राज्यपाल के लिए आवश्यक योग्यता और राज्यपाल के अधिकार क्या क्या हैं ?

राज्यपाल और उपराज्यपाल अथवा लेफ्टिनेंट गवर्नर में क्या अंतर है



राज्यपाल


राज्यपाल क्या होता है

राज्यपाल की नियुक्ति कैसे होती है

राज्यपाल के लिए आवश्यक योग्यताएं

राज्यपाल का कार्यकाल कितने समय का होता है

राज्यपाल के कार्य और अधिकार

राज्यपाल क्या होता है


भारत का संविधान संघात्मक है। इसमें संघ और राज्य दोनों में शासन का प्रावधान किया गया है। भारतीय संविधान का भाग VI देश के संघीय ढाँचे के महत्त्वपूर्ण हिस्से यानी राज्यों से संबंधित है। संविधान के अनुच्छेद 152 से 237 तक राज्यों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।संविधान के भाग 6 में राज्य शासन के लिए प्रावधान किया गया है। राज्य की शासन पद्धति भी संसदीय है। जिस प्रकार केंद्र में शासन प्रमुख के रूप में राष्ट्रपति होता है उसी प्रकार राज्यों में एक संवैधानिक प्रमुख की व्यवस्था की गयी है। राज्यों के इस संवैधानिक प्रमुख को राज्यपाल कहा जाता है। वह राज्य की कार्यपालिका का प्रमुख होता है। भारतवर्ष में राज्यपाल राज्य में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है इसके साथ ही राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख की भूमिका भी निभाता है। इस प्रकार राज्यपाल केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच की कड़ी के रूप में कार्य करता है। राज्यपाल राज्य में मंत्री परिषद् की सलाह के अनुसार कार्य करता है। राज्यपाल अपने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति भी होते हैं। 7 वे संशोधन 1956 के तहत एक राज्यपाल एक से अधिक राज्यो के लिए भी नियुक्त किया जा सकता है।

राज्यपाल की नियुक्ति कैसे होती है

अनुच्छेद 153 के मुताबिक, देश में प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल होगा। साथ ही एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार भारत के राष्ट्रपति के द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति की जायेगी। परन्तु वास्तव में राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर करता है। राज्यपाल की नियुक्ति के सम्बन्ध में दो परम्पराओं का पालन प्रायः किया जाता रहा है

किसी व्यक्ति को उस राज्य का राज्यपाल नहीं नियुक्त किया जाएगा, जिस राज्य का वह निवासी है।

राज्यपाल की नियुक्ति से पहले सम्बन्धित राज्य के मुख्यमंत्री से विचार विमर्श किया जाएगा।

इस प्रथा का पालन 1967 तक राज्यपालों की नियुक्ति में किया गया किन्तु इसके बाद दूसरी प्रथा को समाप्त कर दिया गया और मुख्यमंत्री से विचार विमर्श किये बिना ही राज्यपाल की नियुक्ति की जाने लगी।

राज्यपाल के लिए आवश्यक योग्यताएं


संविधान के अनुच्छेद 157 और अनुच्छेद 158 में राज्यपाल के पद हेतु आवश्यक पात्रता निर्धारित की गईं है जो निम्नलिखित हैं:

  • वह भारतीय नागरिक हो।
  • उसकी उम्र कम-से-कम 35 वर्ष हो।
  • वह न तो संसद के किसी सदन का सदस्य हो और न ही राज्य विधायिका का।
  • वह किसी लाभ के पद पर न हो।
  • वह राज्य विधानसभा का सदस्य चुने जाने के योग्य हो।
  • वह पागल या दिवालिया घोषित न किया जा चुका हो।

राज्यपाल और उपराज्यपाल अथवा लेफ्टिनेंट गवर्नर में क्या अंतर है



राज्यपाल का कार्यकाल कितने समय का होता है

वैसे तो राज्यपाल का कार्यकाल पांच वर्षों का होता है किन्तु उसे इस अवधि के पूर्व भी हटाया जा सकता है। राज्यपाल के कार्यकाल के सम्बन्ध में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्यपाल पांच वर्षो के उपरान्त भी अपने पद पर बने रह सकते हैं जब तक कि नया उत्तराधिकारी पद ग्रहण न करले।

राज्यपाल के कार्य और अधिकार

राज्य के राज्यपाल के कई कार्य और अधिकार निर्धारित किये गए हैं। कुछ प्रमुख निम्न हैं

  • राज्यपाल को राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति का अधिकार होता है। इसके अतिरिक्त वह राज्य के कई महत्वपूर्ण पदों पर जैसे राज्य के महाधिवक्ता, राज्य लोक सेवा आयोग अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों आदि की नियुक्ति करता है।

  • राज्यपाल को विधान मंडल का सत्र बुलाने और समाप्त करने का अधिकार है। राज्य के मंत्री परिषद् की सिफारिश पर वह विधान सभा को भंग भी कर सकता है।

  • अनुच्छेद 175 के अनुसार राज्यपाल विधान सभा के सत्र को तथा जिस राज्य में दो सदन है उनके संयुक्त सत्र को सम्बोधित कर सकता है।

  • यदि विधानसभा में एंग्लो इंडियन समुदाय का उचित प्रतिनिधित्व नहीं हुआ हो तो राज्यपाल इस समुदाय से एक सदस्य को नामित कर सकता है।

  • विधान परिषद् वाले राज्यों में राज्यपाल विधान परिषद् के कुल सदस्यों का 1/6 कला, विज्ञानं,साहित्य आदि क्षेत्रों से आने वाले विशिष्ट और अनुभवी लोगों को नामित करता है।

  • राज्य की विधानसभा से पारित किसी भी बिल पर राज्यपाल की सहमति आवश्यक होती है।

  • राज्यपाल की सहमति प्राप्त होने के बाद ही राज्य का वार्षिक वित्तीय बजट विधानमंडल में पेश किया जाता है। इसके अतिरिक्त राज्यपाल की सहमति होने पर ही किसी अनुदान की मांग की जा सकती है।

  • अनुच्छेद 161 के अनुसार राज्य सूची के अंतर्गत आने वाले विषयों से सम्बंधित हुए अपराध में राज्यपाल अपराधी की सजा को कम, स्थगित या क्षमा कर सकता है।

उपराज्यपाल या लेफ्टिनेंट गवर्नर LG


उपराज्यापल क्या होता है

उपराज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है


उपराज्यपाल की नियुक्ति कितने वर्षों के लिए होती है


उपराज्यपाल के कार्य



उपराज्यापल क्या होता है

भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इनमे सभी राज्यों के साथ साथ दिल्ली और पुड्डुचेरी और जम्मू और कश्मीर में अपनी विधान सभाएं हैं और निर्वाचित सरकारें (वर्तमान में केवल दिल्ली और पुड्डुचेरी) हैं। इनमे राज्यों की कार्यपालिका का प्रमुख राज्यपाल होता है जो मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करता है किन्तु तीन केंद्र शासित राज्य दिल्ली, पुड्डुचेरी और जम्मू और कश्मीर में इनकी जगह उपराज्याल का पद होता है जो केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर शासन करता है। उप राज्यपाल को अंग्रेजी में लेफटिनेंट गवर्नर या संक्षेप में LG भी कहा जाता है। अन्य सभी केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासक नियुक्त होते हैं।

उपराज्यपाल या लेफिटनेंट गवर्नर केंद्र शासित प्रदेश का मुख्य प्रशासक होता है और केंद्र सरकार उपराज्यपाल के द्वारा उस प्रदेश में शासन करती है। राज्यों में मुख्यमंत्री के सारे अधिकार केंद्रशासित प्रदेशों में उपराज्यपाल को मिले होते हैं। दिल्ली का लेफ्टिनेंट गवर्नर या उप-राज्यपाल, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली का संवैधानिक प्रमुख है. इस पद का सृजन पहली बार सितंबर 1966 में किया गया था. दिल्ली के सबसे पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर आदित्य नाथ झा, आईसीएस थे।


भारतीय संविधान के भाग VIII के अंतर्गत अनुच्छेद 239-241 में केंद्र शासित प्रदेशों के सम्बन्ध में उपबंध हैं. हालाँकि सभी केंद्र शासित प्रदेश एक ही श्रेणी के हैं लेकिन उनकी प्रशासनिक पद्धित में एकरूपता नहीं है.प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन राष्ट्रपति के द्वारा संचालित होता है जो कि एक प्रशासक के माध्यम से किया जाता है. ध्यान रहे कि केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासक, राष्ट्रपति का एजेंट होता है ना कि राज्यपाल की तरह राज्य का प्रमुख।


राज्यपाल और उपराज्यपाल अथवा लेफ्टिनेंट गवर्नर में क्या अंतर है


उपराज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है

उपराज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति के द्वारा होती है।

उपराज्यपाल की नियुक्ति कितने वर्षों के लिए होती है

उपराज्यपाल की नियुक्ति पांच वर्षों के लिए की जाती है।

उपराज्यपाल के कार्य

  • उपराज्यपाल विधानसभा के सत्र बुलाना, विधानसभा का विघटन और स्थगन करना की जिम्मेदारी निभाता है।

  • उपराज्यपाल किसी भी मुद्दे पर या लंबित विधेयक पर राज्य विधान सभा को सन्देश भेजने का अधिकार रखता है। इस सन्देश पर हुई कार्यवाही की रिपोर्ट राज्य विधानसभा को उपराज्यपाल को देनी होती है।



  • विधान सभा में किसी बिल को उप-राज्यपाल की सहमती के बिना पेश नही किया जायेगा यदि वह बिल कर लगाने, हटाने, कर में छूट देने, वित्तीय दायित्वों से सम्बंधित कानून में परिवर्तन, राज्य की समेकित निधि के विनिमय आदि सम्बन्ध में हो।

राज्यपाल और उपराज्यपाल अथवा लेफ्टिनेंट गवर्नर में क्या अंतर है


  • राज्यपाल किसी राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है जबकि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर, पुड्डुचेरी और दिल्ली में उपराज्यपाल की नियुक्ति केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर होता है।

  • किसी राज्य में राज्यपाल की शक्तियां नाममात्र की होती हैं। सारी शक्तियां मुख्यमंत्री और उसके मंत्री मंडल में निहित होती है वहीँ उपराज्यपाल अपने केंद्र शासित प्रदेश में वास्तविक प्रशासक होता हैं। इन प्रदेशों में मुख्यमंत्री की शक्तियां नाममात्र की होती है।

  • राज्यपाल अपने राज्य में मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है जबकि उपराज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति नहीं करता है। केंद्रशासित प्रदेशों में(जहाँ मुख्यमंत्री का प्रावधान है) मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।


उपसंहार

राज्यपाल और उपराज्यपाल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं। इसमें राज्यपल पूर्ण राज्यों में जबकि उपराज्यपाल विधानसभाओं वाले केंद्रशासित प्रदेशों में नियुक्त किये जाते हैं। अधिकारों की बात करें तो उपराज्यपाल अपने राज्य में राज्यपाल की तुलना में काफी शक्तिशाली होते हैं।



टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां