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भाषा क्या है, साहित्य क्या है ? भाषा और साहित्य में क्या अंतर है?


Difference Between Language and Literature


भाषा मानव जाति के सर्वोत्तम आविष्कारों में से एक है, जिसके बिना हम अपने ज्ञान, विचारों, विचारों, भावनाओं को साझा नहीं कर पाते इसके साथ ही किसी अन्य व्यक्ति के साथ क्रोध, उत्तेजना, घबराहट, भय व्यक्त नहीं कर पाते । यहां हम केवल मौखिक भाषा की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि संचार के माध्यम के रूप में उपयोग की जाने वाली सभी प्रणालियों की बात कर रहे हैं। भाषा ध्वनियों, प्रतीकों और अर्थों का एक बौद्धिक निकाय है जो व्याकरणिक नियमों और संरचना द्वारा नियंत्रित होती है।

इसके विपरीत, साहित्य को लिखित रूप में मौजूद ज्ञान के किसी भी निकाय के रूप में समझा जा सकता है, जिसका उपयोग भाषा के उपयोग के साथ संस्कृति, परंपरा, जीवन के अनुभवों आदि के बारे में अपने विचारों, विचारों और विचारों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। अब, भाषा और साहित्य के बीच अंतर के बारे में बात करने के लिए आगे बढ़ते हैं।

भाषा और साहित्य की जब भी बात होती है कई लोग कन्फ्यूज्ड हो जाते हैं। कई तो भाषा और और साहित्य दोनों को एक ही समझ बैठते हैं। भाषा और साहित्य को समझने के लिए पहले हमें समझना होगा कि भाषा क्या है, साहित्य क्या है ? भाषा और साहित्य में क्या अंतर है आदि।


भाषा क्या है, साहित्य क्या है ? भाषा और साहित्य में क्या अंतर है?



भाषा क्या है, साहित्य क्या है ? भाषा और साहित्य में क्या अंतर है?


भाषा और साहित्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। भाषा के बिना साहित्य की कल्पना नहीं की जा सकती और साहित्य के बिना भाषा का विकास असंभव सा प्रतीत होता है। अतः दोनों ही एक दूसरे के अनुपूरक हैं। भाषा विचारों को प्रकट करने का माध्यम है तो वहीँ साहित्य विचारों, कल्पनाओं और कलाओं को सहेजने और संरक्षित करने का साधन है। इसके साथ ही यह भाषा को भी परिष्कृत और संरक्षित करता है।


भाषा क्या है

भाषा वह साधन है, जिसके द्वारा मनुष्य बोलकर, सुनकर, लिखकर व पढ़कर अपने मन के भावों या विचारों का आदान-प्रदान करता है। दूसरे शब्दों में- जिसके द्वारा हम अपने भावों को लिखित अथवा कथित रूप से दूसरों को समझा सके और दूसरों के भावो को समझ सके उसे भाषा कहते है। सार्थक शब्दों के समूह या संकेत को भाषा कहते है।
'भाषा' शब्द संस्कृत के 'भाष्' धातु से बना है जिसका अर्थ है बोलना या कहना अर्थात् भाषा वह है जिसे बोला जाए। भाषा व्याकरणिक नियमों द्वारा शासित प्रतीकों और अर्थों की एक अमूर्त प्रणाली है। भाषा को मुख्य रूप से दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है: मौखिक भाषा (जिस भाषा में हम बोलते हैं) और लिखित भाषा। भाषा के कई अध्ययन क्षेत्र भी हैं जैसे ध्वन्यात्मकता, आकृति विज्ञान, वाक्य रचना , शब्दार्थ , आदि।

भाषा क्या है, साहित्य क्या है ? भाषा और साहित्य में क्या अंतर है?


भाषा की परिभाषा




"Literature, a general term which in default of precise definition, may stand for the best expression of the best thought reduced to writing. Its various forms are the result of political circumstances securing the predominance of one social class which is thus enabled to propagate its ideas and sentiments."


-Encyclopedia Britannica



भाषा की कुछ अन्य परिभाषाएं :

प्लेटो ने सोफिस्ट में विचार और भाषा के सम्बन्ध में लिखते हुए कहा है कि विचार और भाषा में थोड़ा ही अंतर है। विचार आत्मा की मूक या अध्वन्यात्मक बातचीत है और वही शब्द जब ध्वन्यात्मक होकर होठों पर प्रकट होती है तो उसे भाषा की संज्ञा देते हैं।

स्वीट के अनुसार ध्वन्यात्मक शब्दों द्वारा विचारों को प्रकट करना ही भाषा है।वेन्द्रीय कहते हैं कि भाषा एक तरह का चिह्न है। चिह्न से आशय उन प्रतीकों से है जिनके द्वारा मानव अपना विचार दूसरों के समक्ष प्रकट करता है। ये प्रतीक कई प्रकार के होते हैं जैसे नेत्रग्राह्य, श्रोत्र ग्राह्य और स्पर्श ग्राह्य। वस्तुतः भाषा की दृष्टि से श्रोत्रग्राह्य प्रतीक ही सर्वश्रेष्ठ है।

ब्लाक तथा ट्रेगर- भाषा यादृच्छिक भाष् प्रतिकों का तन्त्र है जिसके द्वारा एक सामाजिक समूह सहयोग करता है।

स्त्रुत्वा – भाषा यादृच्छिक भाष् प्रतीकों का तन्त्र है जिसके द्वारा एक सामाजिक समूह के सदस्य सहयोग एवं समृपर्क करते हैं।

ए. एच. गार्डिबर का मन्तव्य है-"The common definition of speech is the use of articulate sound symbols for the expression of thought." अर्थात् विचारों की अभिव्यक्ति के लिए जिन व्यक्त एवं स्पष्ट भ्वनि-संकेतों का व्यवहार किया जाता है, उनके समूह को भाषा कहते हैं।


डॉक्टर श्यामसुंदर दास के अनुसार : मनुष्य और मनुष्य के बीच वस्तुओं के विषय में अपनी इच्छा और मत का आदान प्रदान करने के लिए व्यक्त ध्वनि संकेतों का जो व्यवहार होता है उसे भाषा कहते हैं।


कामताप्रसाद गुरु के अनुसार : भाषा व साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को भलीभांति प्रकट कर सकता है और दूसरे के विचारों को स्पष्टता से समझ सकता है।




प्रायः भाषा को लिखित रूप में व्यक्त करने के लिये लिपियों की सहायता लेनी पड़ती है। भाषा और लिपि, भाव व्यक्तीकरण के दो अभिन्न पहलू हैं। एक भाषा कई लिपियों में लिखी जा सकती है और दो या अधिक भाषाओं की एक ही लिपि हो सकती है। उदाहरणार्थ पंजाबी, गुरूमुखी तथा शाहमुखी दोनो में लिखी जाती है जबकि हिन्दी, मराठी, संस्कृत, नेपाली इत्यादि सभी देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं।
भारतीय संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं की संख्या 22 है। 1950 में भारतीय संविधान की स्थापना के समय में, मान्यता प्राप्त भाषाओं की संख्या 14 थी।





भाषा के मुख्य तत्व (bhasha ke mukhya tatva)


भाषा के मुख्य तथा अनिवार्य तत्व निम्नलिखित हैं

1. वाक्य

भाषा का प्रमुख कार्य विचार-विनिमय हैं तथा यह कार्य वाक्यों द्वारा संपन्न होता हैं। अतः वाक्य ही भाषा में सर्वाधिक स्वाभाविक तथा महत्त्वपूर्ण अंग माना जाता हैं।

2. पद

वाक्य का निर्माण पदों से होता हैं, अतः वाक्य के बाद पद-रचना भाषा का अंग हैं।

3. शब्द

रूप अथवा पद का आधार शब्द हैं। अतः भाषा का एक तत्व शब्द भी हैं।

4. ध्वनि

शब्द का आधार ध्वनि हैं। यह भी भाषा का महत्वपूर्ण अंग हैं।

5. अर्थ

भाषा की आत्मा अर्थ हैं। यदि वाक्य, पद, शब्द तथा ध्वनि भाषा के शरीर हैं, तो 'अर्थ' भाषा की आत्मा हैं।




साहित्य क्या है



साहित्य किसी भी प्रकार की लिखित या बोली जाने वाली सामग्री को दर्शाता है, जिसे एक कला रूप माना जाता है, जिसका भाषा के उपयोग के कारण कुछ बौद्धिक मूल्य होता है, जो इसके सामान्य उपयोग से अलग होता है। साहित्य कोई भी ऐसा काम हो सकता है जो कलात्मक हो, एक स्पष्ट कल्पना के साथ विकसित हो और जो किसी क्षेत्र की संस्कृति, भाषा, प्राचीन समय या मानव समाज के व्यवहार पैटर्न को दर्शाता हो। यह समाज के आधुनिकीकरण का सूचक है। यह पाठक को एक पूरी तरह से नई दुनिया से परिचित कराता है या किसी परिचित चीज को एक अलग कोण या दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है।

भाषा क्या है, साहित्य क्या है ? भाषा और साहित्य में क्या अंतर है?


"सहितस्य भावः साहित्यम" जिसमे सहित का भाव है उसे साहित्य कहते हैं। "सहित" शब्दों से साहित्य की उत्पत्ति है अतएव, धातुगत अर्थ करने पर साहित्य शब्द में मिलन का एक भाव दृष्टिगोचर होता है। वह केवल भाव का भाव के साथ, भाषा का भाषा के साथ, ग्रन्थ का ग्रन्थ के साथ मिलन है।

भाषा के माध्यम से अपने अंतरंग की अनुभूति, अभिव्यक्ति कराने वाली ललित कला ‘काव्य’ अथवा ‘साहित्य’ कहलाती है। (ललित कला अथवा अँग्रेजी का Fine Art शब्द उस कला के लिए प्रयुक्त होता है, जिसका आधार सौंदर्य या सुकुमारता है। शब्द और अर्थ का सहभाव ही साहित्य है। कुछ विद्वानों के अनुसार हितकारक रचना का नाम साहित्य है।

संस्कृत में एक शब्द है वांड्मय। भाषा के माध्यम से जो कुछ भी कहा गया, वह वांड्मय है। साहित्य एक ऐसा शब्द है जिसे लिखित और कभी-कभी बोली जाने वाली सामग्री के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। एक विषय के रूप में, इसे केवल लिखित कार्य के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। पूरे इतिहास में साहित्य की व्याख्या के लिए विभिन्न परिभाषाओं का उपयोग किया गया है । कभी-कभी साहित्य को उच्च और स्थायी कलात्मक मूल्य वाले कलात्मक कार्यों के रूप में परिभाषित किया जाता है।

साहित्य के संदर्भ में संस्कृत की इस परिभाषा में मर्म है – शब्दार्थो सहितौ काव्यम। यहाँ शब्द और अर्थ के साथ भाव की आवश्यकता मानी गयी है। इसी परिभाषा को व्यापक करते हुए संस्कृत के ही एक आचार्य विश्वनाथ महापात्र नें “साहित्य दर्पण” नामक ग्रंथ लिख कर “साहित्य” शब्द को व्यवहार में प्रचलित किया। संस्कृत के ही एक आचार्य कुंतक व्याख्या करते हैं कि जब शब्द और अर्थ के बीच सुन्दरता के लिये स्पर्धा या होड लगी हो, तो साहित्य की सृष्टि होती है। केवल संस्कृतनिष्ठ या क्लिष्ट लिखना ही साहित्य नहीं है न ही अनर्थक तुकबंदी साहित्य कही जा सकेगी। वह भावविहीन रचना जो छंद और मीटर के अनुमापों में शतप्रतिशत सही भी बैठती हो, वैसी ही कांतिहीन हैं जैसे अपरान्ह में जुगनू। अर्थात, भाव किसी सृजन को वह गहरायी प्रदान करते हैं जो किसी रचना को साहित्य की परिधि में लाता है।


संक्षेप में “साहित्य” - शब्द, अर्थ और भावनाओं की वह त्रिवेणी है जो जनहित की धारा के साथ उच्चादर्शों की दिशा में प्रवाहित है।



हिन्दी विद्वानों द्वारा साहित्य की परिभाषा - आचार्य रामचन्द्र शुक्ला - ' कविता जीवन और जगत की अभिव्यक्ति है।
आचार्य महावीर प्रसाद त्रिवेदी - अन्तकरण की दिप्तीयों के चित्र का नाम कविता है।

● जयशंकर प्रसाद - काव्य आत्मा की संकलात्मक अनुभूति है।

● सुमित्रानन्दपंत - कविता हमारे परिपूर्ण क्षणों की वाणी है।
अंग्रेज़ी विद्वानों द्वारा साहित्य की परिभाषा - कॉलरिज ने लिखा है - poetry is the best words in their best order '
अर्थात् - सर्वोत्तम शब्द अपने सर्वोत्तम क्रम में कविता होता है।
वर्डसवर्थ ने लिखा है - poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings, it takes its origin from emotions recollected in tranquillity.
अर्थात् - कविता प्रबल अनुभूतियों का सहज उद्रेक है, जिसका स्रोत शान्ति के समय में स्मृत मनोवेगों से फूटता है।

● मैथ्थू आरनॉल्ड ने लिखा है - poetry is, at bottom a criticism of life.
अर्थात् - कविता अपने मूल रूप मे जीवन की आलोचना है।

● चैम्बर्स कोश लिखते है - poetry is the art of expressing in melodious words, thoughts which are the creations of imagination and feelings.
अर्थात् - कल्पना और अनुभूति से उत्पन्न विचारों को मधुर शब्दों में अभिव्यक्त करने को कला, कविता है।

भाषा क्या है, साहित्य क्या है ? भाषा और साहित्य में क्या अंतर है?


साहित्य के तत्व

साहित्य के मुख्यतः चार तत्व निर्धारित किए गए है - 1) भाव 2) कल्पना 3 ) बुध्दि 4) शैली । साहित्य में सर्वप्रमुख तत्व 'भाव' ही है | भाव तत्व साहित्य में सर्वाधिक प्रभाव उत्पन्न करनेवाला होता है । 'भाव' को साहित्य की आत्मा कहा जाता है ।

भाव

साहित्य का सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रभावशाली तत्व भाव होता है। भाव ही कवि को प्रेरणा देता है। अतः जितना अच्छा भाव होगा कविता उतनी ही अच्छी होगी।


कल्पना

भावों के चित्रण के लिए कल्पना का होना आवश्यक है। कल्पना शक्ति की वजह से रचनाएँ जीवंत और हमारे आस पास लगने लगती हैं।

बुद्धि या विचार

विचार तत्व ही भावों और कल्पनाओं के अनुरूप उचित शब्दों के चयन की योग्यता निर्धारित करता है। भाव एवं कल्पना के अनुसार शब्दों का चयन साहित्य को औचित्यपूर्ण और प्रभावशाली बनाता है।

शैली

काव्य के कला पक्ष से सम्बंधित इस तत्व को शब्द तत्व भी कहा जाता है। रचनाकार जिस भाषा, जिस पद्धति से अपनी अनुभूति को अभिरंजित करता है, उसे शैली कहा जाता है।



भाषा और साहित्य में क्या अंतर है 

  • भाषा अभिव्यक्ति की विधि है, जबकि साहित्य इस प्रकार के अभिव्यक्तियों का संग्रह है।

  • भाषा संचार का माध्यम है। अगर हम साहित्य के बारे में बात करते हैं, तो यह भाषा की सुंदरता में कुछ जोड़ता है।


  • भाषा व्याकरणिक नियमों द्वारा शासित प्रतीकों और अर्थों की एक अमूर्त प्रणाली है जबकि साहित्य लिखित कार्यों को संदर्भित करता है, विशेष रूप से जिन्हें श्रेष्ठ या स्थायी कलात्मक मूल्य माना जाता है।

  • भाषा मौखिक तथा लिखित दोनों ही रूपों में प्रयोग की जाती है वहीँ साहित्य ज्यादातर लिखित कार्य का अध्ययन करता है।

  • साहित्य के माध्यम से भाषा का अध्ययन किया जा सकता है और साहित्य भी भाषा का अध्ययन करता है।
भाषा क्या है, साहित्य क्या है ? भाषा और साहित्य में क्या अंतर है?


  • भाषा सबसे पहले अस्तित्व में आई जबकि साहित्य की उत्पत्ति बाद में मानी जाती है।

  • भाषा के बिना साहित्य का अस्तित्व नहीं हो सकता। जबकि साहित्य के बिना भाषा हो सकती है।

  • भाषा अध्ययन नियम और संरचना; यह साहित्य से अधिक तकनीकी है जबकि साहित्य विभिन्न लेखकों के कार्य और शैलियों का अध्ययन करता है; यह एक अधिक सौंदर्य विषय है।


भाषा और साहित्य के इस अध्ययन से एक बात स्पष्ट होती है की भाषा और साहित्य एक दूसरे के अस्तित्व के लिए आवश्यक है। भाषा प्रतीकों और चिन्हों के माध्यम से एक दूसरे के विचारों को समझने समझाने का माध्यम है तो वहीँ साहित्य उन विचारों को भाषा की सहायता से सहेजने का साधन है।


Ref:

https://www.sahityashilpi.com/2010/09/blog-post_20.html

https://www.sahityashilpi.com/2008/09/blog-post_3518.html

https://shwetashindi.blogspot.com/p/blog-page_78.html

https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE

https://www.freejankari.com/2022/03/bhasha-kise-kahate-hain.html

https://www.easyhindivyakaran.com/hindi-bhasha/

https://keydifferences.com/difference-between-literature-and-language.html#:~:text=Literature%20refers%20to%20the%20body,living%20organisms%20through%20arbitrary%20signals.&text=Written%20works%20with%20intellectual%20thoughts%20and%20contemplation.

https://www.differencebetween.com/difference-between-language-and-vs-literature/



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