स्वेज नहर और पनामा नहर के बीच क्या अंतर है : एक रोचक जानकारी

स्वेज नहर और पनामा नहर के बीच क्या अंतर है 


स्वेज नहर और पनामा नहर दोनों ही मानव निर्मित किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। इन दोनों नहरों ने संसार को न केवल गति दी बल्कि इन दोनों ही नहरों ने पुरे विश्व के व्यापार को एक नयी ऊंचाइयों पर पंहुचाया है। इन दोनों ही नहरों ने दूरियों को घटाया है और नए रास्तों को बनाया है। स्वेज नहर और पनामा नहर मानव श्रम और इंजीनियरिंग का अद्भुत कौशल और नमूना हैं। आइए देखते हैं दोनों ही नहरों के बारे में कुछ दिलचस्प बातें और यह भी देखते हैं स्वेज नहर और पनामा नहर में क्या अंतर है 
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स्वेज नहर कहाँ है
स्वेज नहर के निर्माण के पूर्व यूरोप और अमेरिका जाने वाले जहाज़ों को पुरे अफ्रीका महादेश की परिक्रमा करना पड़ता था। उस समय इन स्थानों पर जाने में न केवल समय बहुत ज्यादा लगता था बल्कि खर्च भी ज्यादा बैठता था। परेशानी जो होती थो सो अलग। इस नहर ने इन समस्याओं से मुक्ति दिलाकर व्यापार के नए रास्ते खोल दिए। आज यह समुद्री मार्ग के सबसे व्यस्त रास्तों में से एक है। 


स्वेज नहर का इतिहास 
स्वेज नहर लाल सागर और भूमध्य सागर को जोड़ने के लिए बनायी गयी नहर है। इसका निर्माण 1858 में शुरू होकर करीब दस वर्षों में पूरा हुआ। इसका निर्माण एक फ़्रांसिसी इंजीनियर फर्डिनैंड की देखरेख में हुआ। स्वेज नहर पनामा नहर से करीब दुगुनी लम्बी है। इसकी लम्बाई 168 किलोमीटर और चौड़ाई 60 मीटर है। यह नहर 16.5 मीटर गहरी है। सन 1869 में इस नहर को यातायात के लिए खोला गया। शुरू शुरू में इस नहर का उपयोग केवल दिन के समय ही किया जाता था किन्तु 1887 से इसे रात में भी जहाज पार होने लगें। शुरू शुरू में इस नहर को पार करने में 36 घंटे का समय लग जाता था किन्तु आज इसे पार करने में जहाज़ों को 12 से 16 घंटे का समय लगता है। 

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स्वेज नहर पर किसका नियंत्रण है 

स्वेज नहर वर्तमान में मिस्र के नियंत्रण में है किन्तु शुरू में इसपर स्वेज कैनाल कंपनी का नियंत्रण हुआ करता था। इस कंपनी में आधे शेयर फ़्रांस के थे और बाकी आधे शेयर तुर्की, मिस्र और कई अन्य अरब देशों के थें। बाद में ब्रिटिश शासकों ने मिस्र और तुर्की के शेयर खरीद लिए। फिर इस पर अंग्रेजों का आधिपत्य हो गया जो बाद में मिस्र ने 1956 में इसका राष्ट्रीयकरण करके इसे अपने अधिकार में कर लिया। 

स्वेज नहर से क्या लाभ हुए 

स्वेज नहर बन जाने से पूर्वी अफ्रीका, ईरान, अरब, भारत, पाकिस्तान, श्री लंका, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों का यूरोप और अमेरिका से सीधा रास्ता बन गया। इसके पहले इन देशों के जहाज़ों को पुरे अफ्रीका महादेश की परिक्रमा करनी पड़ती थी। स्वेज नहर ने लगभब 6000 मील की दुरी को कम कर दिया है। इस नहर की वजह से जहाँ समय कम लगता है वहीँ ढुलाई का खर्च भी कम हो गया। इस नहर ने व्यापार को सरल और तीव्र बनाया है। 


स्वेज नहर में जहाजों 11 से 16 किलोमीटर प्रति घंटा की चाल से चलने की अनुमति है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि इससे ज्यादा की गति से किनारों के टूटने का खतरा हो जाता है। इस नहर से एक बार में दो जहाज एक साथ पार नहीं हो सकते। अतः एक जहाज के निकल जाने के बाद ही दूसरा जहाज निकलता है।

पनामा नहर : एक रोचक जानकारी

पनामा नहर पनामा में स्थित एक मानव निर्मित नहर है जो प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर को जोड़ती है। पनामा नहर की वजह से जहाज़ों को दक्षिण अमेरिका के हार्न अंतरीप की परिक्रमा नहीं करनी पड़ती और उनका काफी समय और ईंधन बच जाता है। यह नहर संसार के व्यस्ततम जलमार्गों में से एक है। 


पनामा नहर की लम्बाई क्या है 
पनामा नहर की लम्बाई 72 किलोमीटर है जबकि चौड़ाई 90 मीटर है। इसकी न्यूनत्तम गहराई 12 मीटर की है। इस नहर का निर्माण पनामा स्थल डमरू मध्य को काट कर किया गया है।

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पनामा नहर का इतिहास 

पनामा नहर को बनाने का कई बार प्रयास किया गया। स्पेन के राजा और रोमन साम्राज्य के सम्राट चार्ल्स पंचम ने 1534 इस योजना के सर्वेक्षण के आदेश दिए परन्तु इस मार्ग को बनाने का पहला प्रयास 1658 में स्कॉटलैंड के द्वारा किया गया किन्तु ख़राब परिस्थितियों और दशाओं के कारण इसे 1700 में छोड़ दिया गया। 1855 में विलियम कनिश के सर्वेक्षण और 1877 में आर्मंड रेक्लास और लुसियन के सर्वेक्षणों ने इस प्रयास को आगे बढ़ाया। बाद में 1881 में स्वेज नहर के निर्माणकर्ता फरडीनैंड डी लेसप के नेतृत्व में इसका निर्माण आरम्भ कराया गया। किन्तु इसमें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और करीब बाइस हजार लोगों की मृत्यु हो गयी। इसके बाद इसे छोड़ दिया गया। फिर एक कंपनी कम्पनी नौवेल्ले दू कैनाल डे पनामा द्वारा प्रयास किया गया किन्तु वह भी सफल नहीं हो पाया। बाद में अमेरिकी सरकार ने कोलंबिया सरकार के साथ संधि करके 1904 में इसका कार्य आरम्भ कराया और इस तरह से 1914 में इसे पूरा कर लिया गया। 

पनामा नहर कब बन कर तैयार हुआ 
पनामा नहर का निर्माण 14 अगस्त 1914 को पूर्ण हुआ था और 15 अगस्त 1914 से इसे आवागमन के लिए खोल दिया गया था। पनामा नहर संसार के व्यस्ततम जलमार्गों में से एक है। इस नहर से होकर प्रतिदिन 42 जलपोत गुजर सकते हैं। 

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पनामा नहर से क्या लाभ हुए 
पनामा नहर के बन जाने से पूर्वी अमेरिका और पश्चिमी अमेरिका के बीच की दुरी काफी कम हो गयी। इस नहर से गुजर कर करीब 8000 मील की दुरी को कम किया जा सकता है। इस नहर की वजह से जहाज़ों को दक्षिण अमेरिका के हॉर्न अंतरीप के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। पनामा नहर को पार करने में जहाज़ों को करीब 8 घंटे का समय लगता है।

पनामा नहर पर पनामा देश का अधिकार है और वही इसकी देखरेख करता है।

स्वेज नहर और पनामा नहर के बीच क्या अंतर है

  • स्वेज नहर लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ने के लिए बनाया गया है जबकि पनामा नहर प्रशांत महासागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ती है।

  • स्वेज नहर 1868 में बन कर तैयार हुई थी जबकि पनामा नहर का निर्माण 1914 में पूर्ण हुआ था।

  • स्वेज नहर पर मिश्र का अधिकार है वहीँ पनामा नहर पर पनामा देश का अधिकार है।
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  • स्वेज नहर की लम्बाई करीब 168 किलोमीटर और चौड़ाई करीब 60 मीटर है वहीँ पनामा नहर की लम्बाई करीब 72 किलोमीटर और चौड़ाई करीब 90 किलोमीटर है।

  • स्वेज नहर में एक दिन में 24 जहाज पार हो सकते हैं वहीँ पनामा नहर से एक दिन में 42 जहाज पार हो सकते हैं।

  • स्वेज नहर से एशिआ और यूरोप के बीच आवागमन काफी सरल हो गया और ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, भारत, पाकिस्तान,अरब , पूर्वी अफ्रीका से यूरोप के बीच करीब 6000 मील की दुरी कम हो गयी वहीँ पनामा नहर के बन जाने से पूर्वी अमेरिका और पश्चिमी अमेरिका के बीच करीब 8000 मील का फासला कम हो गया।

  • स्वेज नहर के निर्माण में कम समय और पनामा नहर की अपेक्षा एक तिहाई धन लगा था जबकि पनामा नहर के निर्माण में अधिक समय और अधिक धन व्यय हुआ था।

उपसंहार :


स्वेज नहर और पनामा नहर दोनों ने समुद्र मार्ग से दूरियों को काफी कम कर दिया और यही इनके बनाने का उद्देश्य भी था। पहले जहाँ पश्चिम अमेरिका से पूर्वी अमेरिका के देशों में जलपोतों से जाना काफी खर्चीला और काफी समय लगने वाला कार्य था। उसी तरह एशिआ और यूरोप के बीच जाने के लिए अफ्रीका महादेश को घूम कर जाना पड़ता था। इन दोनों ही नहरों ने व्यापार को तीव्र और सस्ता बनाने में काफी मदद की है। ये दोनों ही नहर मानव निर्मित एक चमत्कार से कम नहीं हैं।

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