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जाइलम और फ्लोएम उत्तक में क्या अंतर है


Difference between Xylem and Phloem 



पौधों में जल तथा खनिज लवण को पत्तियों तक पहुंचाने तथा पत्तियों में तैयार भोजन को पौधे के पुरे शरीर में पहुंचाने के लिए पौधों में अपना एक पूरा जटिल तंत्र होता है। इसे पौधों का परिवहन तंत्र या ट्रांसपोर्ट सिस्टम कहते हैं। यह परिवहन तंत्र दो तरह के उत्तकों द्वारा संचालित होता है जाइलम और फ्लोएम। ये दोनों जाइलम और फ्लोएम उत्तक मिलकर संवहनी उत्तक प्रणाली का निर्माण करते हैं जिसे वैस्कुलर बंडल कहा जाता हैं। हालाँकि जाइलम और फ्लोएम दोनों ही अलग अलग तरह के जटिल संवहनी उत्तक हैं फिर भी दोनों एक साथ एक इकाई के रूप में काम करते हैं। जाइलम जल तथा अन्य मिनरल्स को जड़ों से लेकर पत्तियों तक पहुंचाता है जबकि पत्तियों द्वारा तैयार भोजन फ्लोएम के द्वारा पौधे के सभी भागों में पहुंचाया जाता है। 



Xylem Tissue
जाइलम और फ्लोएम उत्तक 


जाइलम किसे कहते हैं



जाइलम किसी पौधे के सबसे महत्वपूर्ण उत्तकों में से एक होता है। यह पौधे के वैस्कुलर सिस्टम का एक महत्वपूर्ण भाग होता है और पौधे में जड़ों द्वारा अवशोषित जल तथा घुलनशील मिनरल्स को पौधे के सभी भागों में पहुंचाने का कार्य करता है। जाइलम वैसे तो पौधे के सभी भागों में पाया जाता है किन्तु तने के मुख्य भाग या वुडी भाग में यह ज्यादा होता है।




जाइलम शब्द की उत्पत्ति एवं जाइलम उत्तक की संरचना


जाइलम शब्द की उत्त्पत्ति ग्रीक भाषा के 'xylon' से हुई है जिसका अर्थ होता है लकड़ी। वास्तव में अधिकांश जाइलम उत्तक पौधे के तने के लकड़ी वाले हिस्से में ही पाए जाते हैं। माइक्रोस्कोप से देखने पर जाइलम उत्तक का आकार स्टार की तरह दीखता है। जाइलम उत्तक में पायी जाने वाली अधिकांश कोशिकाएं डेड यानि मृत होती हैं। इन कोशिकाओं की सेल वाल मोटी और लिग्निन की बनी होती हैं। जाइलम वैस्कुलर बंडल के केंद्र में स्थित होती है और इसकी मात्रा फ्लोएम उत्तक से ज्यादा होती है। जाइलम उत्तक कई तरह कोशिकाओं से बनती है। इनमे Tracheids और Trachery मुख्य हैं। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य कोशिकाएं vessel elements पायी जाती हैं। ये कोशिकाएं tracheids से छोटी होती हैं। इन कोशिकाओं की कोशिका झिल्ली छिद्रित होती है जिससे आसानी से पानी तथा घुलनशील लवणों को अवशोषित करके उनके ट्रांसपोर्टेशन में मदद करती हैं।
इसके अतिरिक्त जाइलम उत्तक में parenchyma पाया जाता है। यह लम्बे रेशे की तरह होता है तथा पौधो के सॉफ्ट हिस्सों में सपोर्ट की तरह काम करता है। जाइलम उत्तक की उत्पत्ति एक्टिव रुट सेल्स तथा apical meristem से होती है। बड़े तथा कठोर पेड़ों में प्राइमरी जाइलम के चारों ओर रिंग की तरह सेकेंडरी जाइलम का निर्माण होता जाता है। धीरे धीरे प्राइमरी जाइलम की कोशिकाएं मृत हो जाती हैं और प्राइमरी जाइलम केवल सहारा प्रदान करने का कार्य करता है। ऐसी स्थिति में सेकेंडरी जाइलम जल तथा मिनरल्स के परिवहन का कार्य करती है। 


जाइलम 



Kinds of Xylem 


जाइलम सभी पौधों चाहे वह काष्ठीय (woody) पौधा है या अकाष्ठीय ( Non woody), पाया जाता है। काष्ठीय पौधों में meristem जिसे vascular cambium कहा जाता है सेकेंडरी जाइलम का निर्माण करता है। 
काष्ठीय पेड़ों में जाइलम दो प्रकार का पाया जाता है प्राइमरी जाइलम तथा सेकेंडरी जाइलम। 

प्राइमरी जाइलम : प्राइमरी जाइलम का निर्माण procambium के विकास के दौरान होता है। इसके चारों ओर सेकेंडरी जाइलम रिंग की तरह स्थित होता है। प्राइमरी जाइलम की कोशिकाएं प्रायः मृत होती हैं और यह मुख्यतः पेड़ के सपोर्ट का कार्य करता है। 

सेकेंडरी जाइलम : इसका निर्माण vascular cambium के विकास के साथ होता है। यह प्राइमरी जाइलम के चारोँ ओर गोल रिंग के समान स्थित होता है। जल तथा खनिजों का ट्रांसपोर्टेशन मुख्यतः इसी के द्वारा होता है। 


जाइलम कोशिकाएं 



जाइलम उत्तक के कार्य 


जाइलम का मुख्य कार्य जड़ द्वारा अवशोषित जल तथा घुलनशील खनिज लवणों को पत्तियों तक पहुँचाना है। जाइलम को इस कार्य के लिए कोई अलग से ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती है। प्रकाश संश्लेषण तथा वाष्पोत्सर्जन के दौरान पौधों में जो जल की कमी होती है उसकी भी पूर्ति जाइलम के द्वारा होती है। इसके अतिरिक्त कई पौधों में जाइलम पौधों को सीधा खड़ा होने में मदद करता है। जाइलेम, पौधे को यांत्रिक शक्ति (Mechanical Strength) प्रदान करता है और स्टेम को मजबूत रहने में मदद करता है। जाइलेम वाष्पशील (Transpiration) और प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के माध्यम से खोए हुए पानी के अणुओं की कुल मात्रा को पूरा करता है।
जाइलम उत्तक द्वारा जल और घुलनशील खनिज लवण का परिवहन बिना किसी ऊर्जा के स्वतः होता रहता है।

जाइलम द्वारा जल तथा घुलनशील अवयवों को पत्तियों तथा अन्य भागों तक पहुंचाने में दो बल कार्य करते हैं। 


Transpirational Pull :
पौधों की पत्तियों की mesophyll कोशिकाओं द्वारा वातावरण में वाष्पोत्सर्जन होता रहता है। इस की वजह से पत्तियों में हुए रिक्त स्थान में एक खिचाव पैदा होता है और यह खिचाव पृष्ठ तनाव उत्पन्न करता है। यही पृष्ठ तनाव की वजह से जाइलम में एक निगेटिव बल लगता है और यह बल मिटटी से पानी को ऊपर खींच लेता है।

Root Pressure : जड़ों के अंदर osmosis की वजह से एक बल पैदा होता है जो मिटटी से जल को जड़ो में प्रवेश कराता है।




What is Phloem Tissue





पौधों की पत्तियों और हरे भागों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के फलस्वरूप तैयार घुलनशील कार्बनिक यौगिकों को पौधों के सभी भागों में पौधे के जिस अंग के द्वारा पहुंचाया जाता है उसे फ्लोएम कहते हैं। फ्लोएम एक vascular tissue है जो vascular bundle का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और पौधे के परिवहन तंत्र का निर्माण करता है।

फ्लोएम शब्द की उत्पत्ति फ्लोएम उत्तक की संरचना


फ्लोएम शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द "Phloios" से हुई है जिसका अर्थ छाल होता है। वास्तव में पौधों की छाल का अधिकांश हिस्सा फ्लोएम ही होता है।

फ्लोएम उत्तक vascular bundle के चारों ओर किनारे की तरफ स्थित होता है और इसकी मात्रा जाइलम उत्तक से काफी कम होती है। फ्लोएम उत्तक का निर्माण कई तरह की कोशिकाओं द्वारा होता है जिनमे sieve tubes  (छिद्रित नलिकाएं), companion cells, फ्लोएम फाइबर, फ्लोएम parenchyma प्रमुख हैं। ये जीवित कोशिकाएं होती हैं और ये लिग्निफ़िएड नहीं होती हैं। फ्लोएम फाइबर सेल्स लम्बी होती हैं। sieve tubes की दीवारें क्षैतिज रूप से छिद्रित होती हैं जिससे होकर घुलनशील भोजन का परिवहन होता है। Phloem parenchyma companion cells और albuminous cells की बनी होती हैं और ये sieve cells को सहारा प्रदान करती हैं। इनके अतिरिक्त sclerenchyma cells भी फ्लोएम उत्तक को सहारा और कठोरता प्रदान करती हैं।


फ्लोएम


Function of Pholem


फ्लोएम उत्तक का मुख्य कार्य प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में तैयार भोजन जिसमे शुगर और एमिनो अम्ल शामिल हैं तथा अन्य पोषक तत्वों पौधों के सभी भागों में पहुँचाना है। फ्लोएम का प्रवाह ऊपर नीचे दोनों तरफ होता है। फ्लोएम जड़ों, बल्ब (Bulbs) और Tubers जैसे अंगों के भंडारण के लिए पौधों के प्रकाश संश्लेषक क्षेत्रों द्वारा संश्लेषित शर्करा का परिसंचरण करता है। इसके अतिरिक्त यह पूरे पौधे में प्रोटीन और mRNAs के परिवहन के लिए जिम्मेदार है।


फ्लोएम 


Difference between Xylem and Phloem 


जाइलम और फ्लोएम उत्तक में क्या अंतर है


  • जाइलम एक संवहनी पादप उत्तक है जो पौधों में जल तथा घुलनशील खनिजों के परिवहन का कार्य करता है वहीँ फ्लोएम भी एक संवहनी पादप उत्तक है किन्तु यह प्रकाश संश्लेषण के उपरांत तैयार घुलनशील कार्बनिक यौगिकों को पौधे के सभी भागों में पहुंचाने का कार्य करता है।


  • जाइलम उत्तक नलिकाकार संरचना होती हैं जिनमे क्रॉस वाल्स अनुपस्थित होता है वहीँ फ्लोएम उत्तक नलिकाकार लम्बी संरचना होती हैं जिनमे पतली छलनी वाली ट्यूब के साथ दीवार मौजूद होती है।


  • जाइलम उत्तक vascular bundle के केंद्र में उपस्थित होता है वहीँ फ्लोएम vascular bundle के चारों ओर किनारे किनारे होता है।

  • जाइलम के फाइबर या तंतु छोटे होते हैं जबकि फ्लोएम के फाइबर बड़े होते हैं।

  • जाइलम पौधों की जड़ों, तने और पत्तियों में पाये जाते हैं। फ्लोएम पौधे के तने और पत्तियों में पाया जाता है यह बाद में जड़ों,फलों और बीजों में स्थान्तरित और विकसित होते हैं।

  • जाइलम में प्रवाह की दिशा एकल होती है केवल नीचे से ऊपर की ओर वहीँ फ्लोएम में द्रवों का प्रवाह दोनों दिशा में होती है।

  • जाइलम टिश्यू में Tracheids, Vessel Elements जाइलम पैरेन्काइमा और जाइलम फाइबर कोईशिकाएँ पाई जाती हैं वहीँ फ्लोएम के निर्माण में Companion Cells, Sieve Tubes, Bast Fibres, फ्लोएम फाइबर और फ्लोएम पैरेन्काइमा कोशिकाओं का योगदान होता है।
जाइलम और फ्लोएम 


  • जाइलम उत्तक में पैरेन्काइमा कोशिकाओं को छोड़कर अन्य सभी मृत कोशिकाएं होती हैं जबकि फ्लोएम में Bast Fibre को छोड़कर सभी जीवित कोशिकाएं होती हैं।

  • जाइलम की कोशिका भित्ति मोटी और लिग्निफ़िएड होती है वहीँ फ्लोएम में कोशिका भित्ति पतली होती है और यह लिग्निफ़िएड भी नहीं होती।

  • Vascular Bundle में जाइलम टिश्यू की मात्रा फ्लोएम की तुलना में ज्यादा होती है।

  • जाइलम मिटटी से जल तथा खनिज को पौधों के सभी भागों में पहुंचाता है जबकि फ्लोएम पत्तियों तथा हरे भागों से प्रकाश संश्लेषण के दौरान बने भोजन तथा अन्य पोषक तत्वों सहित एमिनो अम्ल आदि को पौधे के सभी भागों में पहुंचाता है।

  • जाइलम पौधे को यांत्रिक शक्ति प्रदान करने के साथ साथ तने को मजबूती प्रदान करता है वहीँ फ्लोएम पौधे की जड़ों, बल्ब और Tubers जैसे अंगों में भण्डारण के लिए आवश्यक शुगर का परिसंचरण करता है।

  • जाइलम वाष्पोरसर्जन और प्रकाश संश्लेषण में मुक्त पानी के अणुओं की कुल मात्रा की पूर्ति करता है जबकि फ्लोएम पौधे में प्रोटीन तथा mRNA का परिवहन करता है।

  • जाइलम में जाइलम वाहिकाएं तथा Tracheids जल तथा खनिज का परिवहन करते हैं वही फ्लोएम में Sieve Tubes तथा Sieve Plates के माध्यम से परिवहन होता है।


उपसंहार 

जाइलम और फ्लोएम संयुक्त रूप से Vasuclar Bundle का निर्माण करती हैं जो पौधों में परिवहन के प्रति उत्तरदायी होता है। ये दोनों उत्तक मिलकर पौधों में परिवहन तंत्र बनाते हैं जिसमे जाइलम जड़ों से जल तथा खनिज को ऊपर पत्तियों तक पहुंचाता है वहीँ फ्लोएम पत्तियों में तैयार भोजन को पौधे के सभी भागों में ले जाने का कार्य करता है।

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