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चील, बाज़ और गिद्ध में क्या अंतर है : एक रोचक जानकारी

चील, बाज़ और गिद्ध में क्या अंतर है : एक रोचक जानकारी 

चील : एक शिकारी पक्षी

चील एक शिकारी पक्षी है जो अपने तेज, शक्तिशाली और अचानक झपट्टे के लिए मशहूर है। यह एक माध्यम आकर की बेहद आक्रामक चिड़िया है जो छोटे छोटे जंतुओं का शिकार करती है। ये गिद्ध की तुलना में छोटी और हलकी होती है।
चील Accipitridae फैमिली से सम्बन्ध रखने वाला प्राणी है। यह माध्यम आकार का पक्षी है। चील का सर छोटा, चोंच भी छोटी किन्तु नुकीली और पॉइंटेड होती है पर पंख लम्बे और संकरे होते हैं। चील का चेहरा आंशिक रूप से नंगा होता है। इसकी पूंछ अंग्रेजी के V शेप में होती है। अलग अलग प्रजातियों में इनके आकार और वजन में अंतर पाया जाता है। इनका वजन 270 ग्राम से 1 किलोग्राम से अधिक हो सकता है। इनका आकर 34 सेंटीमीटर से 66 सेंटीमीटर तक हो सकता है। सबसे छोटा मिसिसिपी काइट 34 से 37 सेंटीमीटर के होते हैं जबकि रेड काइट सबसे लम्बे 60 से 66 सेंटी मीटर तक के पाए जाते हैं। 



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चील अन्टार्टिका को छोड़कर प्रायः दुनिया भर में पाया जाता है। चील प्रायः घोंघों, सरीसृपों,मछली, गौरैयों और कीड़े मकोड़ों का शिकार करते हैं। कुछ चील मृतजीवों को भी खाते हैं।



चील काफी ऊँची उड़ान भरते हैं। ये अपने पंखों को फड़फड़ा कर काफी ऊंचाई पर चले जाते हैं और फिर वहां से वे ग्लाइड करते हुए उड़ते हैं। चील अपने शिकार की खोज में ग्लाइड करते हैं।
चील की कई प्रजातियां हैं जैसे रेड काइट, ब्लैक काइट, ब्रह्मनि काइट, स्नैल काइट आदि।
चील अंडे देने के पहले घोसला बनाते हैं। ये अपना घोसला काफी ऊंचाई पर बनाते हैं। कई बार ये अपना घोसला ऊँचे और चट्टानों के किनारे जो किसी अन्य के पंहुच से बाहर हो वहां पर बनाते हैं। चील एक ही मादा के साथ पुरे मैटिंग सीजन में रहते हैं। कई चील तो आजीवन एक ही मादा के साथ रहते हैं। ये एक बार में प्रायः एक से तीन अंडे देते हैं। बच्चे लगभग एक महीने तक सेने के बाद निकलते हैं।


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बाज़: दुनियां में सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी

बाज़ एक खूंखार शिकारी पक्षी होता है जो छोटे छोटे जंतुओं को अपना शिकार बनाता है। यह काफी तेज गति से उड़ने में माहिर होते हैं और पलक झपकते ही अपना शिकार ले उड़ते हैं। 

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बाज़ काफी मजबूत पक्षी होता है जिसकी छाती की माँसपेशियन सुदृढ़ और काफी विकसित होती हैं। इनके पंख लम्बे और स्ट्रीमलाइन आकार के होते हैं जो इन्हे तेज उड़ने में सहायता पँहुचाते हैं। बाज़ के शरीर की लम्बाई 13 से 23 इंच होती है और इसके पंख लगभग 29 से 47 इंच लंबे होते हैं। बाज़ की नाक पर एक ट्यूबर सेल होती है जो रफ़्तार में इसे सांस लेने में मदद करती है। मादा बाज़ आकार में नर से ज्यादा बड़ी होती हैं। ये नीले, भूरे ये सलेटी रंग के होते हैं जिसमे पेट तथा गर्दन पर सफ़ेद धब्बे होते हैं। बाज़ के पंख पतले तथा मुड़े हुए होते हैं। 

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बाज़ दुनियां में सबसे तेज उड़ने वाले पक्षी होते हैं। इनकी गति लगभग 320 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। बाज़ आसमान ही नहीं बल्कि जमीन पर भी सबसे तेज दौड़ता है। बाज़ बत्तख, चमगादड़, चूहे, गिरगिट आदि का शिकार करते हैं। बाज़ करीब 17 वर्षों तक जीवित रहते हैं। मादा बाज़ एक बार में 3 से 5 अंडे देती हैं। ये दो से तीन वर्षों में प्रजनन करती हैं।

बाज़ अंटार्टिका के अलावा पूरी दुनियां में पाया जाता है। इसकी 1500 से 2000 प्रजातियां होती हैं। 

गिद्ध : सबसे तेज दृष्टि वाला पक्षी

शिकारी पक्षियों का जब भी जिक्र होता है तो उसमे गिद्ध का नाम सबसे ऊपर आता है। गिद्ध शानदार शिकारी होते हैं जो अपने बड़े डील डौल, ताकत और अपने भारी वजन के साथ साथ एक पैनी और बड़ी चोंच से आसानी से पहचान में आ जाते हैं। गिद्ध अपनी तेज आँख और मुर्दाखोरी की वजह से काफी मशहूर हैं। इन्हें प्रकृति का सफाईकर्मी भी कहा जाता है। 

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गिद्ध एक बड़ा शिकारी पक्षी है बल्कि यह सबसे बड़े शिकारी पक्षियों में से एक होता है। बड़े होने के साथ साथ गिद्ध काफी वजनी भी होते हैं। इनका वजन 1.5 किलोग्राम से लेकर 11 किलोग्राम तक हो सकता है। गिद्ध की लम्बाई 56 सेंटीमीटर लेकर 130 सेंटीमीटर तक होती है। इनके शरीर का वजन और माप अलग अलग प्रजातियों में अलग अलग होती है। इसी तरह अलग अलग प्रजातियों में गिद्धों के पंखों का फैलाव भी भिन्न भिन्न होता है। यह 1.30 मीटर से लेकर 2.6 मीटर तक होता है। ये पक्षियों की फैमिली Vulturidae से सम्बन्ध रखते हैं। गिद्ध प्रायः कत्थई और काले रंग के होते हैं। इनकी चोंच आगे की ओर मुड़ी और मजबूत होती है। किन्तु इनके पंजे मजबूत नहीं होते हैं। गिद्धों के गर्दन पर रोयें नहीं होते हैं। 

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गिद्धों की पुरे विश्व में लगभग 21 प्रजातियां इस समय पायी जाती हैं। विश्व में गिद्धों की संख्या तेजी से घट रही है। इसका मुख्य कारण इसका ऐसे जीवों के मृत शरीर को खाना है जिन्हे पशुपालकों द्वारा दर्दनाशक दवा डिक्लोफेनाक दिया गया हो। ऐसे जानवर का मांस खाने से गिद्धों के गुर्दे ख़राब हो जाते हैं और उनकी मौत हो जाती है। इसके अलावा बहुत सारे गिद्धों को शिकार करके मनुष्य मार देता है। इसी वजह से गिद्ध आज लुप्तप्रायः जीवों में शामिल है।
गिद्ध पांच वर्ष में प्रजनन के योग्य होते हैं। ये एक बार में एक से दो अंडे देते हैं। यदि किसी वजह से इनके अंडे नष्ट हो गए हो तो फिर ये अगले साल तक प्रजनन नहीं करते। गिद्ध अपना घोसला खड़ी चट्टानों के मध्य या काफी ऊँचे पेड़ों पर बनाते हैं।
गिद्ध की नज़र बहुत ही तेज मानी जाती है। ये काफी ऊंचाई से ही अपना शिकार देख लेते हैं। गिद्ध छोटे छोटे जंतुओं, मुर्गी के बच्चों को, मछलियों को अपना शिकार बनाते हैं। गिद्ध अपने भोजन में हड्डियों को भी काफी मात्रा में शामिल करते हैं। इनका पेट इन हड्डियों को आसानी से पचा लेता है। गिद्ध को प्रकृति का सफाईकर्मी भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये मरे हुए जानवरों के शरीर को खा कर वातावरण साफ़ करते हैं। मरे हुए जानवर पर बैठ कर खाने से इनके पैरों में कई बैक्टेरिया आदि लग जाते हैं जिससे इनके बीमार होने का खतरा होता है किन्तु इनकी पेशाब कीटाणुनाशक का काम करती है और ये अपने पैरों को उसी से धो लेते हैं। 


गिद्ध अपने शिकार पर नजर रखने के लिए काफी ऊंचाई पर उड़ते हैं। इनकी सबसे ऊँची उड़ान 1973 में रूपेल्स वेंचर के द्वारा आइवरी कोस्ट में दर्ज की गयी थी जब ये एवेरेस्ट से भी ऊँचे लगभग 37000 फ़ीट की ऊंचाई पर उड़ रहे थे।


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