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क्षत्रिय और राजपूत में क्या अंतर है

क्षत्रिय और राजपूत में क्या अंतर है


प्राचीन भारत का सामाजिक तानाबाना विभिन्न जातियों से बना होता था और हर जाति की अपनी भूमिका होती थी जो समाज के सभी लोगों के प्रति जिम्मेदार होती थी और समाज की शांति, सुरक्षा, आर्थिक कार्य, पथ प्रदर्शन और विकास में अपनी भूमिका निभाती थी। ये सभी जातियां मुख्य रूप से चार वर्णो के अंतर्गत आती थी जिनमे समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी क्षत्रियों, यज्ञ,देवताओं की पूजा और समाज के पथ प्रदर्शन की जिम्मेदारी ब्राह्मणों की, व्यापार की जिम्मेदारी वैश्य और सेवा कार्य की जिम्मेदारी शूद्र वर्ग की थी। समाज में इन चारों वर्णों की महत्वपूर्ण और अनिवार्य भूमिका थी। इन वर्णों में क्षत्रियों की भूमिका ब्राह्मणों के बाद काफी महत्वपूर्ण थी। ये जहाँ समाज और पशुओं की सुरक्षा करते थे वहीँ समाज को अच्छा शासन प्रदान करते थे ताकि समाज के लोग शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें। कालांतर में यह क्षत्रिय वर्ण क्षत्रिय जाति में परिणत हो गया और बाद में यह राजपूत के नाम से जाना जाने लगा। हालाँकि शुरू से ही इसमें अनेक जातियों का समावेश होता गया और कई जातियां इस वर्ग से बाहर भी होती गयी।

क्षत्रिय कौन हैं


प्राचीन भारतीय समाज चार वर्णों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में बंटा हुआ था। इन वर्णों के कार्य और जिम्मेदारियां निश्चित थीं। इनमे से ब्राह्मण यज्ञ और पुरोहित का कार्य करते थे वहीँ क्षत्रिय समाज की सुरक्षा के लिए जाने जाते थें। वैश्यों का व्यापार और शूद्रों के लिए सेवा कार्य निश्चित थे। इन वर्णों में क्षत्रिय अपनी वीरता और साहस के लिए जाने जाते थे और इस वर्ण में वैसे ही लोग होते थे जो सैन्य कुशलता में प्रवीण और शासक प्रवृति के होते थे। अतः युद्ध और सुरक्षा की जिम्मेदारी का निर्वाहन करने वाला वर्ण क्षत्रिय कहलाता था। इतिहास और साहित्य में कई क्षत्रिय राजाओं का वर्णन हुआ है जिनमे अयोध्या के राजा श्री राम, कृष्ण, पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप आदि प्रमुख हैं। क्षत्रियों के वंशज वर्तमान में राजपूत के रूप में जाने जाते हैं।

File:Hindu-society-caste-kshatriya.jpg - Wikimedia Commons

क्षत्रिय की उत्पत्ति


प्राचीन सिद्धांतों और मान्यताओं के अनुसार क्षत्रिय की उत्पत्ति ब्रह्मा की भुजाओं से हुई मानी जाती है। एक और कथा के अनुसार क्षत्रियों की उत्पत्ति अग्नि से हुई थी। कुछ लोग अग्निकुला के इस सिद्धांत विदेशियों को भारतीय समाज में शामिल होने के लिए किये गए शुद्धिकरण की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। अग्निकुला सिद्धांत का वर्णन चन्दवरदाई रचित पृथ्वीराज रासो में आता है जिसके अनुसार वशिष्ठ मुनि ने आबू पर्वत पर चार क्षत्रिय जातियों को उत्पन्न किया था जिसमे प्रतिहार, परमार, चौहान और चालुक्य या सोलंकी थे।


ऋग्वैदिक शासन प्रणाली में शासक के लिए राजन और राजन्य शब्दों का प्रयोग किया गया है। उस समय राजन वंशानुगत नहीं माना जाता था। वैदिक काल के अंतिम अवस्था में राजन्य की जगह क्षत्रिय शब्द ने ले ली जो किसी विशेष क्षेत्र पर शक्ति या प्रभाव या नियंत्रण को इंगित करता था। संभवतः विशेष क्षेत्र पर प्रभुत्व रखने वाले क्षत्रिय कहलाये। महाभारत के आदि पर्व के अंशअवतारन पर्व के अध्याय 64 के अनुसार क्षत्रिय वंश की उत्पत्ति ब्राह्मणो द्वारा हुई है।


कुरुक्षेत्र युद्ध - विकिपीडिया

प्राचीन साहित्यों से पता चलता है कि क्षत्रिय वर्ण आनुवंशिक नहीं था और यह किसी जाति विशेष से सम्बंधित नहीं था। जातकों, रामायण और महाभारत ग्रंथों में क्षत्रिय शब्द से सामंत वर्ग और युद्धरत अनेक जातियां जैसे अहीर, गड़ेडिया, गुर्जर, मद्र, शक आदि का भी वर्णन हुआ है। वास्तव में क्षत्रिय समस्त राजवर्ग और सैन्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करता था। क्षत्रिय वर्ग का मुख्य कर्तव्य युद्ध काल में समाज की रक्षा के लिए युद्ध करना तथा शांति काल में सुशासन प्रदान करना होता था।

राजपूत कौन हैं



राजपूत अपने स्वाभिमान, वीरता, त्याग और बलिदान के लिए जाने जाते थे। अदम्य साहस और देशभक्ति उनमे कूट कूट कर भरी होती थी। राजपूत राजपुत्र का ही अपभ्रंश माना जाता है और इनमे राजाओं के पुत्र, सगे सम्बन्धी और अन्य राज्य परिवार के लोग होते थे। चूँकि राजपूत शासक वर्ग से सम्बन्ध रखते थे अतः इनमे मुख्य रूप से क्षत्रिय जाति के लोग होते थे। हालाँकि शासक वर्ग की कई जातियां शासन और शक्ति की बदौलत राजपूत जाति में शामिल होती गयी। हर्षवर्धन के उपरांत 12 वीं शताब्दी तक का समय राजपूत काल के रूप में जाना जाता है। इस समय तक उत्तर भारत में राजपूतों के 36 कुल प्रसिद्ध हो चुके थे। इनमे चौहान, प्रतिहार, परमार, चालुक्य, सोलंकी, राठौर, गहलौत, सिसोदिया, कछवाहा, तोमर आदि प्रमुख थे। 


Rajput Warriors Carvings | Rajput (from Sanskrit raja-putra,… | Flickr


राजपूतों का इतिहास एवं उत्पत्ति


राजपूतों की उत्पत्ति के विषय में इतिहास विशेषज्ञों का मत एक नहीं रहा है। कई इतिहासकारों का मानना है कि प्राचीन क्षत्रिय वर्ण के वंशज राजपूत जाति के रूप में परिणत हो गयी। कुछ विद्वान खासकर औपनिवेशिक काल में यह मानते थे कि क्षत्रिय विदेशी आक्रमणकारियों जैसे सीथियन और हूणों के वंशज हैं जो भारतीय समाज में आकर रच बस गए और इसी समाज का हिस्सा बन गए। कर्नल जेम्स टाड और विलियम क्रूक क्षत्रियों के सीथियन मूल को मानते थे। वी ए स्मिथ क्षत्रियों का सम्बन्ध शक और कुषाण जैसी जातियों से भी जोड़ते हैं। ईश्वरी प्रसाद और डी आर भंडारकर ने भी इन सिद्धांतों का समर्थन किया है और राजपूतों को इनका वंशज मानते हैं। वहीँ कुछ अन्य विद्वान राजपूतों को वैसे ब्राह्मण मानते थे जो शासन करते थे। आधुनिक शोधों से पता चलता है कि राजपूत विभिन्न जातीय और भौगोलिक क्षेत्रों से आये और भारतभूमि में रच बस गए। राजपुत्र पहली बार 11 वीं शताब्दी के संस्कृत शिलालेखों में शाही पदनामों के लिए प्रयुक्त दिखाई देता है। यह राजा के पुत्रों, रिश्तेदारों आदि के लिए प्रयुक्त होता था। मध्ययुगीन साहित्य के अनुसार विभिन्न जातियों के लोग शासक वर्ग में होने की वजह से इस श्रेणी में आ गए। धीरे धीरे राजपूत एक सामाजिक वर्ग के रूप में सामने आया जो कालांतर में वंशानुगत हो गया। 

File:Maha ranapratap singh.jpg - Wikimedia Commons

वर्तमान में राजपूत इन्ही क्षत्रियों के वंशज माने जाते हैं किन्तु क्षत्रिय से राजपूत तक आते आते एक लम्बा समय लग गया और यह अपने वर्तमान स्वरुप को 16 वीं शताब्दी में प्राप्त कर सका। हालाँकि उत्तर भारत में यह छठी शताब्दी से विभिन्न वंशावलियों का वर्णन करने के लिए प्रयुक्त होता है। शुरू में प्रायः 11 वीं शताब्दी में शाही अधिकारीयों के लिए गैर वंशानुगत पदनाम के रूप में राजपुत्र शब्द का प्रयोग होने के उदाहरण मिलते हैं जो धीरे धीरे एक सामाजिक वर्ग के रूप में विकसित हुआ। इस वर्ग में विभिन्न प्रकार के जातीय और भौगोलिक पृष्ठभूमि के लोग शामिल थे। यह बाद में जाकर 16 वीं और 17 वीं शताब्दी तक लगभग वंशानुगत हो चुकी थी।


राजपूत शब्द रजपूत जिसका अर्थ धरतीपुत्र के रूप में भी कहीं कहीं प्रयुक्त हुआ है किन्तु यह वास्तविक रूप से मुग़ल काल में ही प्रयोग में आने लगा। यह राजपुत्र के अपभ्रंश के रूप में राजपूत के रूप में राजा और उसकी संतानों के लिए प्रयुक्त होने लगा। कौटिल्य, कालिदास, बाणभट्ट आदि की रचनाओं में भी क्षत्रियों के लिए राजपुत्र का प्रयोग हुआ है। अरबी लेखक अलबेरुनी ने भी अपनी किताबों में राजपूत या राजपुत्र का जिक्र न करके क्षत्रिय शब्द का प्रयोग किया है।


राजपूतों को उत्तर भारत में भिन्न भिन्न नामों से जाना जाता है जैसे उत्तर प्रदेश में ठाकुर, बिहार में बाबूसाहेब या बबुआन, गुजरात में बापू, पर्वतीय क्षेत्रों में रावत या राणा आदि।


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क्षत्रिय और राजपूत में क्या अंतर है




  • क्षत्रिय भारतीय समाज की वर्ण व्यवस्था का एक अंग है जबकि राजपूत एक जाति है।

  • क्षत्रिय वैदिक संस्कृति से निकला शब्द है वहीँ राजपूत शब्द छठी शताब्दी से लेकर बारहवीं शताब्दी में विकसित हुआ।

  • सभी क्षत्रिय राजपूत नहीं हैं पर सभी राजपूत क्षत्रिय हैं।

उपसंहार

इस प्रकार हम देखते हैं क्षत्रिय प्राचीन भारतीय समाज की वर्ण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। इनका मुख्य कर्तव्य समाज और पशुओं की सुरक्षा करना होता था। संभवतः यह व्यवस्था जातिगत नहीं थी। वर्तमान राजपूतों का उदय इन्हीं क्षत्रिय वर्ण से हुआ माना जाता है जो बाद में वंशानुगत हो गयी और एक जाति के रूप में परिणत हो गयी।

Ref :

https://hi.krishnakosh.org/
http://history-rajput.blogspot.com/2017/02/blog-post.html
https://hi.wikipedia.org/wiki/
https://www.mahashakti.org.in/2015/11/Kashatriyon-Ki-Utpatti-Evam-Etihasik-Mahatva.html

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31 टिप्पणियाँ

  1. गुर्जर वंश के( शिलालेख)
    नीलकुण्ड, राधनपुर, देवली तथा करडाह शिलालेख में प्रतिहारों को गुर्जर कहा गया है ।राजजर शिलालेख" में वर्णित "गुर्जारा प्रतिहारवन" वाक्यांश से। यह ज्ञात है कि प्रतिहार गुर्जरा वंश से संबंधित थे। सोमदेव सूरी ने सन 959 में यशस्तिलक चम्पू में गुर्जरत्रा का वर्णन किया है।वह लिखता है कि न केवल प्रतिहार बल्कि चावड़ा, चालुक्य, आदि गुर्जर वंश भी इस भूमि की रक्षा करते रहे व गुर्जरत्रा को एक वैभवशाली देश बनाये रखा। ब्रोच ताम्रपत्र 978 ई० गुर्जर कबीला(जाति) का सप्त सेंधव अभिलेख हैं पाल वंशी,राष्ट्रकूट या अरब यात्रियों के रिकॉर्ड ने प्रतिहार शब्द इस्तेमाल नहीं किया बल्कि गुर्जरेश्वर ,गुर्जरराज,आदि गुरजरों परिवारों की पहचान करते हैं।

    सिरूर शिलालेख ( :---- यह शिलालेख गोविन्द - III के गुर्जर नागभट्ट - II एवम राजा चन्द्र कै साथ हुए युद्ध के सम्बन्ध मे यह अभिलेख है । जिसमे " गुर्जरान " गुर्जर राजाओ, गुर्जर सेनिको , गुर्जर जाति एवम गुर्जर राज्य सभी का बोध कराता है। ( केरल-मालव-सोराषट्रानस गुर्जरान ) { सन्दर्भ :- उज्जयिनी का इतिहास एवम पुरातत्व - दीक्षित - पृष्ठ - 181 } बादामी के चालुक्य नरेश पुलकेशियन द्वितीय के एहोल अभिलेख में गुर्जर जाति का उल्लेख आभिलेखिक रूप से हुआ है। राजोरगढ़ (अलवर जिला) के मथनदेव के अभिलेख (959 ईस्वी ) में स्पष्ट किया गया है की प्रतिहार वंशी गुर्जर जाती के लोग थे नागबट्टा के चाचा दड्डा प्रथम को शिलालेख में "गुर्जरा-नृपाती-वाम्सा" कहा जाता है, यह साबित करता है कि नागभट्ट एक गुर्जरा था, क्योंकि वाम्सा स्पष्ट रूप से परिवार का तात्पर्य है। सम्राट महिपाला गुर्जर ,विशाल साम्राज्य पर शासन कर रहा था,जिसे कवि पंप द्वारा "दहाड़ता गुर्जर" कहा जाता है। यह अधिक समझ में आता है कि इस शब्द ने अपने परिवार को दर्शाया। भडोच के गुर्जरों के विषय दक्षिणी गुजरात से प्राप्त नौ तत्कालीन ताम्रपत्रो में उन्होंने खुद को गुर्जर नृपति वंश का होना बताया प्राचीन भारत के की प्रख्यात पुस्तक ब्रह्मस्फुत सिद्धांत के अनुसार 628 ई. में श्री चप (चपराना/चावडा) वंश का व्याघ्रमुख नामक गुर्जर राजा भीनमाल में शासन कर रहा था 9वीं शताब्दी में परमार जगददेव के जैनद शिलालेख में कहा है कि गुर्जरा योद्धाओं की पत्नियों ने अपनी सैन्य जीत के परिणामस्वरूप अर्बुडा की गुफाओं में आँसू बहाए। ।

    मार्कंदई पुराण,स्कंध पुराण में पंच द्रविडो में गुर्जरो जनजाति का उल्लेख है। अरबी लेखक अलबरूनी ने लिखा है कि खलीफा हासम के सेनापति ने अनेक प्रदेशों की विजय कर ली थी परंतु वे उज्जैन के गुर्जरों पर विजय प्राप्त नहीं कर सका सुलेमान नामक अरब यात्री ने गुर्जरों के बारे में साफ-साफ लिखा है कि गुर्जर इस्लाम के सबसे बड़े शत्रु है जोधपुर अभिलेख में लिखा हुआ है कि दक्षिणी राजस्थान का चाहमान वंश चेची गुर्जरों के अधीन था।

    कहला अभिलेख में लिखा हुआ है की कलचुरी वंश गुर्जरों के अधीन था। चाटसू अभिलेख में श्रीहम्मीरमहाकाव्यम् श्रीहम्मीरमहाकाव्ये [ सर्गः अथ चतुर्थः सर्गः

    ____________________________________________

    गुर्जर प्रतिहार फोर फादर ऑफ़ राजपूत चीनी यात्री हेन सांग (629-645 ई.) ने भीनमाल का बड़े अच्छे रूप में वर्णन किया है। उसने लिखा है कि “भीनमाल का 20 वर्षीय नवयुवक क्षत्रिय राजा अपने साहस और बुद्धि के लिए प्रसिद्ध है और वह बौद्ध-धर्म का अनुयायी है। यहां के चापवंशी गुर्जर बड़े शक्तिशाली और धनधान्यपूर्ण देश के स्वामी हैं।” हेन सांग (629-645 ई.) के अनुसार सातवी शताब्दी में दक्षिणी गुजरात में भड़ोच राज्य भी विधमान था| भड़ोच राज्य के शासको के कई ताम्र पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनसे इनकी वंशावली और इतिहास का पता चलता हैं| इन शासको ने स्वयं को गुर्जर राजाओ के वंश का माना हैं|

    कर्नल जेम्स टोड कहते है राजपूताना कहलाने वाले इस विशाल रेतीले प्रदेश राजस्थान में, पुराने जमाने में राजपूत जाति का कोई चिन्ह नहीं मिलता परंतु मुझे सिंह समान गर्जने वाले गुर्जरों के शिलालेख और अभिलेख मिलते हैं।

    पंडित बालकृष्ण गौड_______

    लिखते है कि राजपूती इतिहास तेरहवीं सदी से पहले इसकी कही जिक्र तक नही है और कोई एक भी ऐसा शिलालेख दिखादो जिसमे रजपूत या राजपूत शब्द का नाम तक भी लिखा हो। लेकिन गुर्जर शब्द की भरमार है, अनेक शिलालेख तामपत्र है, अपार लेख है, काव्य, साहित्य, भग्न खन्डहरो मे गुर्जर संसकृति के सार गुंजते है ।अत: गुर्जर इतिहास को राजपूत इतिहास बनाने की ढेरो असफल-नाकाम कोशिशे कि गई।

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    1. गुज्जर जाट अहीर राजभर पासी तेली चमार कुर्मी फलाना और भी है
      सभी क्षत्रिय बन रहे है तो अत्याचार किसपर किया था राजपूतों पंडितो ने और तो इनका राज्य कहा है सभी इनको आरक्षण भी चाहिए और छतरी भी बनना हैं वास्तव मे इन्ही लोगों के कारण हिंदुओ में एकता नहीं होंगे ये लॉग झूठा इतिहास फैला रहे हैं सबूत कुछ भी नही हे बस गूगल पर विकिपीडिया पर गलत इतिहास दे द रहे हैं
      इन सभी के लिए राजपूतों ने इतना बलिदान दिया तभी कहा थे ये लोग आज इनको याद आया है कि हम भी छतरी है 😂

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  2. संजन, बडोदा, माने तामपत्र और नीलकुण्ठ , एलहोल पुलकेसीन चालूक्य का अभिलेख, राधन पूरी, देवली और करडाह के शिलालेखों में भी प्रतिहार को गुर्जर जाति का बताया हैं और गुर्जर जाति में ही प्रतिहार गोत्र हैं तो कृपया कर इस लेख को सही करे।

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    1. जितने भी गोत्र है ना गुज्जरों में सभी राजपूतों से बने है राजपूत राजाओं छोटी जाति के कन्या से सादी किए हैं isiliye गोत्र milte hai 😂

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    2. यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में त्रिदेवो ने जन्म लिया, यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु यादव भगवान दत्तात्रेय रूप में, भगवान ब्रह्मा ने यादव भगवान चन्द्र देव के रूप में, महादेव ने यादव ऋषि दुर्वासा रूप में जन्म लिया, भगवान यादव चंद्रदेव को महादेव ने अपने मस्तक पर स्थान दिया हे, जिनके नाम पर यादवों ने सोमनाथ का मंदिर बनवाया था ,यादव चंद्रदेव के पुत्र थे यादव बुध देव, मनु की सबसे बड़ी पुत्री इला जो राम के पूर्वज इसवाकु की बड़ी बहन थी वो यादव घराने की बहू थी, यादव भगवान बुद्ध देव के पुत्र थे यादव पुरुरवा, यादव पुरुरवा के 6 पुत्र थे उनमें 2 महान पुत्र यादव आयु ओर यादव उमावशु, आयु के पुत्र यादव राजा नहुष हुए, उमावशू के वंश में आगे जाकर यादव विश्वामित्र हुए जो बाद में श्री राम के गुरु बने, ऋषि अत्री के वंशज अहीर यादवों को अत्री वंश से होने के कारण ब्राह्मणों का राजा ओर ब्राह्मणों में श्रेष्ठ ब्राह्मण कहा गया है, धरती पर केवल यादव ओर यादवों के वंश ही असली क्षत्रिय ओर ब्राह्मण हे, यादवों में त्रिदेवो सहित सभी देवताओं का रक्त हे, यादव विशुद्ध रक्त वाले भगवान हे, इशवाकू के वंश में हुए राम में केवल 12 कलाए थी, लेकिन चंद्रवंशी यादवों में उनके पूर्वज यादव भगवान दत्तात्रेय के 24 गुण, चंद्रदेव के 64 कलाए जीन कलाओं के साथ श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, ओर ऋषि दुर्वासा का क्रोध इन सभी के साथ यादव जन्म लेते हे,
      नहुष के बड़े पुत्र यादव ययाति हुए, ययाति ने 5 पुत्र थे सबसे बड़े अहीर यादव सम्राट यदू थे, यादव सम्राट यदू को सतयुग के अंत में अहीर ओर यादव उपाधि मिली इसलिए उनके वंशज अहीर यादव ओर बहुत से नाम से जाने जाते हे, ठाकुर, यादव, राणा, महाराणा, सिंह, आदि ये सभी केवल यादवों की उपाधि हे जो उसे द्वापर युग के पहले से प्राप्त हे
      यादव सम्राट यदू के वंश में आगे जाकर यादव राजा हेय्यय हुए, उनके पौत्र यादव सम्राट कर्तविर्य हुए, उनके पुत्र यादव सम्राट अर्जुन हुए जिन्हें सहस्त्रबाहु कर्तविर्य अर्जुन कहा जाता थे, यादव सम्राट कर्तविर्य अर्जुन ने अकेले ही रावण ओर उसकी सेना को अपने एक ही वार से मूर्छित कर यादवों के अस्तबल में सैकड़ों सालों तक बंदी बना कर रखा था, चंद्रदेव से लेकर सहस्त्रबाहु अर्जुन तक जितने भी यादव सम्राट हुए सभी के लाखो सालो तक त्रिलोक पर राजा किया, सूर्य की चाल में आकर यादवों ने ऋषि bhragu के वंश पर अत्याचार किया, जिसके कारण ऋषि bhragu के पुत्र परशुराम ने केवल यादव सम्राट सहस्त्रबाहु अर्जुन यादवों ओर उनके 101 कुल का 21 बार लगभग नाश किया, परशुराम सूर्य वंश को क्षत्रिय नहीं मानता था इसलिए परशुराम ने केवल यादवों का नाश किया, आगे जाकर इसी वंश मै नारायण के पूर्ण अवतार यादव कृष्ण हुए, उनकी बड़ी बहन यादव माता दुर्गा ने यादव योग माया का अवतार लिया ओर विंध्याचल पर्वत पर जाकर बस गई, यादव राज कुमारी कुंती को उनके पूर्वज ऋषि दुर्वासा ने 6 यादव पराक्रमी पुत्रो का वरदान दिया जो, यादव कर्ण, यादव युधिष्ठिर, यादव भीम, यादव अर्जुन, नकुल ओर सहदेव हुए, राजा पांडु को श्राप था कि वो पुत्र पैदा नहीं कर सकता इसलिए कुंती के पुत्रो में केवल यादवों का रक्त था इसलिए ये सभी भी आगे जाकर यादव कहलाए, यादव भीम के पौत्र यादव बर्बरीक हुए जिन्हें यादव भगवान खाटू श्याम कहा जाता हे, महा भारत युद्ध के बाद केवल यादव वंश ही बचा था जिसमें आगे जाकर देवगिरी के अभिर (अहीर) ने 800 इष्वी में मराठा साम्राज्य की नींव रखी, जिसमे आगे जाकर अहीर जीजा बाई ओर उनके पुत्र अहीर छत्रपति शिवाजी हुए, शिवाजी के पिता शाहा जी यादवों के होलसेल वंश से थे, राजा सूरजमल, राजा सुहेल देव, महा राणा प्रताप, आल्हा ऊदल, वीर लोरीक, विजय नगर राज्य की स्थापना करने वाले राजा कृष्ण राय आदि ऐसे बहुत से राजा हुए, चन्द्र वंश का मतलब केवल यादव वंश होता है जितने भी महान राजा हुए वे सभी यादव वंश से ताल्लुक रखते हे, भारत में जितने भिं प्राचीन ओर बड़े मंदिर हे सभी यादवों के द्वारा बनाए गए हे, यादवों के राज्य यादव डायनेस्टी, अहीरराना आज का हरियाणा, विजय नगर डायनेस्टी, मराठा डायनेस्टी, देव गिरी डायनेस्टी, नेपाल डायनेस्टी, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान, चीन ये सभी यादवों के राज्य थे जिनको दासियों के पुत्र राजपूतों ने मुगलों के साथ मिलकर खत्म कर दिए, गुज्जर,जाट, मराठा, सिक्ख ये सभी यादवों के वंश हे
      जय चन्द्र वंश

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    3. पहले गोचर थे फिर गूजर बने फिर गुज्जर बने अब गुर्जर हो गए। शर्म करो

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  3. 1 क्षत्रिय और राजपूत में अंतर है ,,,क्षत्रिय शब्द वेदिक कालिन है 10000 साल पुराना है, जबकि राजपूत शब्द 6ठी से 7वी शताब्दी में अस्तित्व में आया। 2 क्षत्रिय एक वेदिक काल का वर्ग था जो शासन प्रशासन और देश की रक्षा करता था। राजपूत 6 शताब्दी में अस्तित्व आई जाती थी जो शासन प्रशासन और देश की रक्षा करती थी।

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  4. 3. क्षत्रिय कोईभी बन सकता है ,राजपूत बना नहीं जाता यह पैदा होता है। 4.क्षत्रिय शब्द का अर्थ रक्षक है जो देश और जनता की रक्षा करता है ,राजपूत शब्द का अर्थ राजा का पुत्र है । 5 क्षत्रिय सिंधु सभ्यता और वेदिक सभ्यता के वंशज हैं । राजपूत शक,हुण और सिथियन आक्रांताओं के वंशज हैं ।

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    1. यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में त्रिदेवो ने जन्म लिया, यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु यादव भगवान दत्तात्रेय रूप में, भगवान ब्रह्मा ने यादव भगवान चन्द्र देव के रूप में, महादेव ने यादव ऋषि दुर्वासा रूप में जन्म लिया, भगवान यादव चंद्रदेव को महादेव ने अपने मस्तक पर स्थान दिया हे, जिनके नाम पर यादवों ने सोमनाथ का मंदिर बनवाया था ,यादव चंद्रदेव के पुत्र थे यादव बुध देव, मनु की सबसे बड़ी पुत्री इला जो राम के पूर्वज इसवाकु की बड़ी बहन थी वो यादव घराने की बहू थी, यादव भगवान बुद्ध देव के पुत्र थे यादव पुरुरवा, यादव पुरुरवा के 6 पुत्र थे उनमें 2 महान पुत्र यादव आयु ओर यादव उमावशु, आयु के पुत्र यादव राजा नहुष हुए, उमावशू के वंश में आगे जाकर यादव विश्वामित्र हुए जो बाद में श्री राम के गुरु बने, ऋषि अत्री के वंशज अहीर यादवों को अत्री वंश से होने के कारण ब्राह्मणों का राजा ओर ब्राह्मणों में श्रेष्ठ ब्राह्मण कहा गया है, धरती पर केवल यादव ओर यादवों के वंश ही असली क्षत्रिय ओर ब्राह्मण हे, यादवों में त्रिदेवो सहित सभी देवताओं का रक्त हे, यादव विशुद्ध रक्त वाले भगवान हे, इशवाकू के वंश में हुए राम में केवल 12 कलाए थी, लेकिन चंद्रवंशी यादवों में उनके पूर्वज यादव भगवान दत्तात्रेय के 24 गुण, चंद्रदेव के 64 कलाए जीन कलाओं के साथ श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, ओर ऋषि दुर्वासा का क्रोध इन सभी के साथ यादव जन्म लेते हे,
      नहुष के बड़े पुत्र यादव ययाति हुए, ययाति ने 5 पुत्र थे सबसे बड़े अहीर यादव सम्राट यदू थे, यादव सम्राट यदू को सतयुग के अंत में अहीर ओर यादव उपाधि मिली इसलिए उनके वंशज अहीर यादव ओर बहुत से नाम से जाने जाते हे, ठाकुर, यादव, राणा, महाराणा, सिंह, आदि ये सभी केवल यादवों की उपाधि हे जो उसे द्वापर युग के पहले से प्राप्त हे
      यादव सम्राट यदू के वंश में आगे जाकर यादव राजा हेय्यय हुए, उनके पौत्र यादव सम्राट कर्तविर्य हुए, उनके पुत्र यादव सम्राट अर्जुन हुए जिन्हें सहस्त्रबाहु कर्तविर्य अर्जुन कहा जाता थे, यादव सम्राट कर्तविर्य अर्जुन ने अकेले ही रावण ओर उसकी सेना को अपने एक ही वार से मूर्छित कर यादवों के अस्तबल में सैकड़ों सालों तक बंदी बना कर रखा था, चंद्रदेव से लेकर सहस्त्रबाहु अर्जुन तक जितने भी यादव सम्राट हुए सभी के लाखो सालो तक त्रिलोक पर राजा किया, सूर्य की चाल में आकर यादवों ने ऋषि bhragu के वंश पर अत्याचार किया, जिसके कारण ऋषि bhragu के पुत्र परशुराम ने केवल यादव सम्राट सहस्त्रबाहु अर्जुन यादवों ओर उनके 101 कुल का 21 बार लगभग नाश किया, परशुराम सूर्य वंश को क्षत्रिय नहीं मानता था इसलिए परशुराम ने केवल यादवों का नाश किया, आगे जाकर इसी वंश मै नारायण के पूर्ण अवतार यादव कृष्ण हुए, उनकी बड़ी बहन यादव माता दुर्गा ने यादव योग माया का अवतार लिया ओर विंध्याचल पर्वत पर जाकर बस गई, यादव राज कुमारी कुंती को उनके पूर्वज ऋषि दुर्वासा ने 6 यादव पराक्रमी पुत्रो का वरदान दिया जो, यादव कर्ण, यादव युधिष्ठिर, यादव भीम, यादव अर्जुन, नकुल ओर सहदेव हुए, राजा पांडु को श्राप था कि वो पुत्र पैदा नहीं कर सकता इसलिए कुंती के पुत्रो में केवल यादवों का रक्त था इसलिए ये सभी भी आगे जाकर यादव कहलाए, यादव भीम के पौत्र यादव बर्बरीक हुए जिन्हें यादव भगवान खाटू श्याम कहा जाता हे, महा भारत युद्ध के बाद केवल यादव वंश ही बचा था जिसमें आगे जाकर देवगिरी के अभिर (अहीर) ने 800 इष्वी में मराठा साम्राज्य की नींव रखी, जिसमे आगे जाकर अहीर जीजा बाई ओर उनके पुत्र अहीर छत्रपति शिवाजी हुए, शिवाजी के पिता शाहा जी यादवों के होलसेल वंश से थे, राजा सूरजमल, राजा सुहेल देव, महा राणा प्रताप, आल्हा ऊदल, वीर लोरीक, विजय नगर राज्य की स्थापना करने वाले राजा कृष्ण राय आदि ऐसे बहुत से राजा हुए, चन्द्र वंश का मतलब केवल यादव वंश होता है जितने भी महान राजा हुए वे सभी यादव वंश से ताल्लुक रखते हे, भारत में जितने भिं प्राचीन ओर बड़े मंदिर हे सभी यादवों के द्वारा बनाए गए हे, यादवों के राज्य यादव डायनेस्टी, अहीरराना आज का हरियाणा, विजय नगर डायनेस्टी, मराठा डायनेस्टी, देव गिरी डायनेस्टी, नेपाल डायनेस्टी, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान, चीन ये सभी यादवों के राज्य थे जिनको दासियों के पुत्र राजपूतों ने मुगलों के साथ मिलकर खत्म कर दिए, गुज्जर,जाट, मराठा, सिक्ख ये सभी यादवों के वंश हे
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  5. यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में त्रिदेवो ने जन्म लिया, यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु यादव भगवान दत्तात्रेय रूप में, भगवान ब्रह्मा ने यादव भगवान चन्द्र देव के रूप में, महादेव ने यादव ऋषि दुर्वासा रूप में जन्म लिया, भगवान यादव चंद्रदेव को महादेव ने अपने मस्तक पर स्थान दिया हे, जिनके नाम पर यादवों ने सोमनाथ का मंदिर बनवाया था ,यादव चंद्रदेव के पुत्र थे यादव बुध देव, मनु की सबसे बड़ी पुत्री इला जो राम के पूर्वज इसवाकु की बड़ी बहन थी वो यादव घराने की बहू थी, यादव भगवान बुद्ध देव के पुत्र थे यादव पुरुरवा, यादव पुरुरवा के 6 पुत्र थे उनमें 2 महान पुत्र यादव आयु ओर यादव उमावशु, आयु के पुत्र यादव राजा नहुष हुए, उमावशू के वंश में आगे जाकर यादव विश्वामित्र हुए जो बाद में श्री राम के गुरु बने, ऋषि अत्री के वंशज अहीर यादवों को अत्री वंश से होने के कारण ब्राह्मणों का राजा ओर ब्राह्मणों में श्रेष्ठ ब्राह्मण कहा गया है, धरती पर केवल यादव ओर यादवों के वंश ही असली क्षत्रिय ओर ब्राह्मण हे, यादवों में त्रिदेवो सहित सभी देवताओं का रक्त हे, यादव विशुद्ध रक्त वाले भगवान हे, इशवाकू के वंश में हुए राम में केवल 12 कलाए थी, लेकिन चंद्रवंशी यादवों में उनके पूर्वज यादव भगवान दत्तात्रेय के 24 गुण, चंद्रदेव के 64 कलाए जीन कलाओं के साथ श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, ओर ऋषि दुर्वासा का क्रोध इन सभी के साथ यादव जन्म लेते हे,
    नहुष के बड़े पुत्र यादव ययाति हुए, ययाति ने 5 पुत्र थे सबसे बड़े अहीर यादव सम्राट यदू थे, यादव सम्राट यदू को सतयुग के अंत में अहीर ओर यादव उपाधि मिली इसलिए उनके वंशज अहीर यादव ओर बहुत से नाम से जाने जाते हे, ठाकुर, यादव, राणा, महाराणा, सिंह, आदि ये सभी केवल यादवों की उपाधि हे जो उसे द्वापर युग के पहले से प्राप्त हे
    यादव सम्राट यदू के वंश में आगे जाकर यादव राजा हेय्यय हुए, उनके पौत्र यादव सम्राट कर्तविर्य हुए, उनके पुत्र यादव सम्राट अर्जुन हुए जिन्हें सहस्त्रबाहु कर्तविर्य अर्जुन कहा जाता थे, यादव सम्राट कर्तविर्य अर्जुन ने अकेले ही रावण ओर उसकी सेना को अपने एक ही वार से मूर्छित कर यादवों के अस्तबल में सैकड़ों सालों तक बंदी बना कर रखा था, चंद्रदेव से लेकर सहस्त्रबाहु अर्जुन तक जितने भी यादव सम्राट हुए सभी के लाखो सालो तक त्रिलोक पर राजा किया, सूर्य की चाल में आकर यादवों ने ऋषि bhragu के वंश पर अत्याचार किया, जिसके कारण ऋषि bhragu के पुत्र परशुराम ने केवल यादव सम्राट सहस्त्रबाहु अर्जुन यादवों ओर उनके 101 कुल का 21 बार लगभग नाश किया, परशुराम सूर्य वंश को क्षत्रिय नहीं मानता था इसलिए परशुराम ने केवल यादवों का नाश किया, आगे जाकर इसी वंश मै नारायण के पूर्ण अवतार यादव कृष्ण हुए, उनकी बड़ी बहन यादव माता दुर्गा ने यादव योग माया का अवतार लिया ओर विंध्याचल पर्वत पर जाकर बस गई, यादव राज कुमारी कुंती को उनके पूर्वज ऋषि दुर्वासा ने 6 यादव पराक्रमी पुत्रो का वरदान दिया जो, यादव कर्ण, यादव युधिष्ठिर, यादव भीम, यादव अर्जुन, नकुल ओर सहदेव हुए, राजा पांडु को श्राप था कि वो पुत्र पैदा नहीं कर सकता इसलिए कुंती के पुत्रो में केवल यादवों का रक्त था इसलिए ये सभी भी आगे जाकर यादव कहलाए, यादव भीम के पौत्र यादव बर्बरीक हुए जिन्हें यादव भगवान खाटू श्याम कहा जाता हे, महा भारत युद्ध के बाद केवल यादव वंश ही बचा था जिसमें आगे जाकर देवगिरी के अभिर (अहीर) ने 800 इष्वी में मराठा साम्राज्य की नींव रखी, जिसमे आगे जाकर अहीर जीजा बाई ओर उनके पुत्र अहीर छत्रपति शिवाजी हुए, शिवाजी के पिता शाहा जी यादवों के होलसेल वंश से थे, राजा सूरजमल, राजा सुहेल देव, महा राणा प्रताप, आल्हा ऊदल, वीर लोरीक, विजय नगर राज्य की स्थापना करने वाले राजा कृष्ण राय आदि ऐसे बहुत से राजा हुए, चन्द्र वंश का मतलब केवल यादव वंश होता है जितने भी महान राजा हुए वे सभी यादव वंश से ताल्लुक रखते हे, भारत में जितने भिं प्राचीन ओर बड़े मंदिर हे सभी यादवों के द्वारा बनाए गए हे, यादवों के राज्य यादव डायनेस्टी, अहीरराना आज का हरियाणा, विजय नगर डायनेस्टी, मराठा डायनेस्टी, देव गिरी डायनेस्टी, नेपाल डायनेस्टी, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान, चीन ये सभी यादवों के राज्य थे जिनको दासियों के पुत्र राजपूतों ने मुगलों के साथ मिलकर खत्म कर दिए, गुज्जर,जाट, मराठा, सिक्ख ये सभी यादवों के वंश हे
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  6. यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में त्रिदेवो ने जन्म लिया, यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु यादव भगवान दत्तात्रेय रूप में, भगवान ब्रह्मा ने यादव भगवान चन्द्र देव के रूप में, महादेव ने यादव ऋषि दुर्वासा रूप में जन्म लिया, भगवान यादव चंद्रदेव को महादेव ने अपने मस्तक पर स्थान दिया हे, जिनके नाम पर यादवों ने सोमनाथ का मंदिर बनवाया था ,यादव चंद्रदेव के पुत्र थे यादव बुध देव, मनु की सबसे बड़ी पुत्री इला जो राम के पूर्वज इसवाकु की बड़ी बहन थी वो यादव घराने की बहू थी, यादव भगवान बुद्ध देव के पुत्र थे यादव पुरुरवा, यादव पुरुरवा के 6 पुत्र थे उनमें 2 महान पुत्र यादव आयु ओर यादव उमावशु, आयु के पुत्र यादव राजा नहुष हुए, उमावशू के वंश में आगे जाकर यादव विश्वामित्र हुए जो बाद में श्री राम के गुरु बने, ऋषि अत्री के वंशज अहीर यादवों को अत्री वंश से होने के कारण ब्राह्मणों का राजा ओर ब्राह्मणों में श्रेष्ठ ब्राह्मण कहा गया है, धरती पर केवल यादव ओर यादवों के वंश ही असली क्षत्रिय ओर ब्राह्मण हे, यादवों में त्रिदेवो सहित सभी देवताओं का रक्त हे, यादव विशुद्ध रक्त वाले भगवान हे, इशवाकू के वंश में हुए राम में केवल 12 कलाए थी, लेकिन चंद्रवंशी यादवों में उनके पूर्वज यादव भगवान दत्तात्रेय के 24 गुण, चंद्रदेव के 64 कलाए जीन कलाओं के साथ श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, ओर ऋषि दुर्वासा का क्रोध इन सभी के साथ यादव जन्म लेते हे,
    नहुष के बड़े पुत्र यादव ययाति हुए, ययाति ने 5 पुत्र थे सबसे बड़े अहीर यादव सम्राट यदू थे, यादव सम्राट यदू को सतयुग के अंत में अहीर ओर यादव उपाधि मिली इसलिए उनके वंशज अहीर यादव ओर बहुत से नाम से जाने जाते हे, ठाकुर, यादव, राणा, महाराणा, सिंह, आदि ये सभी केवल यादवों की उपाधि हे जो उसे द्वापर युग के पहले से प्राप्त हे
    यादव सम्राट यदू के वंश में आगे जाकर यादव राजा हेय्यय हुए, उनके पौत्र यादव सम्राट कर्तविर्य हुए, उनके पुत्र यादव सम्राट अर्जुन हुए जिन्हें सहस्त्रबाहु कर्तविर्य अर्जुन कहा जाता थे, यादव सम्राट कर्तविर्य अर्जुन ने अकेले ही रावण ओर उसकी सेना को अपने एक ही वार से मूर्छित कर यादवों के अस्तबल में सैकड़ों सालों तक बंदी बना कर रखा था, चंद्रदेव से लेकर सहस्त्रबाहु अर्जुन तक जितने भी यादव सम्राट हुए सभी के लाखो सालो तक त्रिलोक पर राजा किया, सूर्य की चाल में आकर यादवों ने ऋषि bhragu के वंश पर अत्याचार किया, जिसके कारण ऋषि bhragu के पुत्र परशुराम ने केवल यादव सम्राट सहस्त्रबाहु अर्जुन यादवों ओर उनके 101 कुल का 21 बार लगभग नाश किया, परशुराम सूर्य वंश को क्षत्रिय नहीं मानता था इसलिए परशुराम ने केवल यादवों का नाश किया, आगे जाकर इसी वंश मै नारायण के पूर्ण अवतार यादव कृष्ण हुए, उनकी बड़ी बहन यादव माता दुर्गा ने यादव योग माया का अवतार लिया ओर विंध्याचल पर्वत पर जाकर बस गई, यादव राज कुमारी कुंती को उनके पूर्वज ऋषि दुर्वासा ने 6 यादव पराक्रमी पुत्रो का वरदान दिया जो, यादव कर्ण, यादव युधिष्ठिर, यादव भीम, यादव अर्जुन, नकुल ओर सहदेव हुए, राजा पांडु को श्राप था कि वो पुत्र पैदा नहीं कर सकता इसलिए कुंती के पुत्रो में केवल यादवों का रक्त था इसलिए ये सभी भी आगे जाकर यादव कहलाए, यादव भीम के पौत्र यादव बर्बरीक हुए जिन्हें यादव भगवान खाटू श्याम कहा जाता हे, महा भारत युद्ध के बाद केवल यादव वंश ही बचा था जिसमें आगे जाकर देवगिरी के अभिर (अहीर) ने 800 इष्वी में मराठा साम्राज्य की नींव रखी, जिसमे आगे जाकर अहीर जीजा बाई ओर उनके पुत्र अहीर छत्रपति शिवाजी हुए, शिवाजी के पिता शाहा जी यादवों के होलसेल वंश से थे, राजा सूरजमल, राजा सुहेल देव, महा राणा प्रताप, आल्हा ऊदल, वीर लोरीक, विजय नगर राज्य की स्थापना करने वाले राजा कृष्ण राय आदि ऐसे बहुत से राजा हुए, चन्द्र वंश का मतलब केवल यादव वंश होता है जितने भी महान राजा हुए वे सभी यादव वंश से ताल्लुक रखते हे, भारत में जितने भिं प्राचीन ओर बड़े मंदिर हे सभी यादवों के द्वारा बनाए गए हे, यादवों के राज्य यादव डायनेस्टी, अहीरराना आज का हरियाणा, विजय नगर डायनेस्टी, मराठा डायनेस्टी, देव गिरी डायनेस्टी, नेपाल डायनेस्टी, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान, चीन ये सभी यादवों के राज्य थे जिनको दासियों के पुत्र राजपूतों ने मुगलों के साथ मिलकर खत्म कर दिए, गुज्जर,जाट, मराठा, सिक्ख ये सभी यादवों के वंश हे
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  7. यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में त्रिदेवो ने जन्म लिया, यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु यादव भगवान दत्तात्रेय रूप में, भगवान ब्रह्मा ने यादव भगवान चन्द्र देव के रूप में, महादेव ने यादव ऋषि दुर्वासा रूप में जन्म लिया, भगवान यादव चंद्रदेव को महादेव ने अपने मस्तक पर स्थान दिया हे, जिनके नाम पर यादवों ने सोमनाथ का मंदिर बनवाया था ,यादव चंद्रदेव के पुत्र थे यादव बुध देव, मनु की सबसे बड़ी पुत्री इला जो राम के पूर्वज इसवाकु की बड़ी बहन थी वो यादव घराने की बहू थी, यादव भगवान बुद्ध देव के पुत्र थे यादव पुरुरवा, यादव पुरुरवा के 6 पुत्र थे उनमें 2 महान पुत्र यादव आयु ओर यादव उमावशु, आयु के पुत्र यादव राजा नहुष हुए, उमावशू के वंश में आगे जाकर यादव विश्वामित्र हुए जो बाद में श्री राम के गुरु बने, ऋषि अत्री के वंशज अहीर यादवों को अत्री वंश से होने के कारण ब्राह्मणों का राजा ओर ब्राह्मणों में श्रेष्ठ ब्राह्मण कहा गया है, धरती पर केवल यादव ओर यादवों के वंश ही असली क्षत्रिय ओर ब्राह्मण हे, यादवों में त्रिदेवो सहित सभी देवताओं का रक्त हे, यादव विशुद्ध रक्त वाले भगवान हे, इशवाकू के वंश में हुए राम में केवल 12 कलाए थी, लेकिन चंद्रवंशी यादवों में उनके पूर्वज यादव भगवान दत्तात्रेय के 24 गुण, चंद्रदेव के 64 कलाए जीन कलाओं के साथ श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, ओर ऋषि दुर्वासा का क्रोध इन सभी के साथ यादव जन्म लेते हे,
    नहुष के बड़े पुत्र यादव ययाति हुए, ययाति ने 5 पुत्र थे सबसे बड़े अहीर यादव सम्राट यदू थे, यादव सम्राट यदू को सतयुग के अंत में अहीर ओर यादव उपाधि मिली इसलिए उनके वंशज अहीर यादव ओर बहुत से नाम से जाने जाते हे, ठाकुर, यादव, राणा, महाराणा, सिंह, आदि ये सभी केवल यादवों की उपाधि हे जो उसे द्वापर युग के पहले से प्राप्त हे
    यादव सम्राट यदू के वंश में आगे जाकर यादव राजा हेय्यय हुए, उनके पौत्र यादव सम्राट कर्तविर्य हुए, उनके पुत्र यादव सम्राट अर्जुन हुए जिन्हें सहस्त्रबाहु कर्तविर्य अर्जुन कहा जाता थे, यादव सम्राट कर्तविर्य अर्जुन ने अकेले ही रावण ओर उसकी सेना को अपने एक ही वार से मूर्छित कर यादवों के अस्तबल में सैकड़ों सालों तक बंदी बना कर रखा था, चंद्रदेव से लेकर सहस्त्रबाहु अर्जुन तक जितने भी यादव सम्राट हुए सभी के लाखो सालो तक त्रिलोक पर राजा किया, सूर्य की चाल में आकर यादवों ने ऋषि bhragu के वंश पर अत्याचार किया, जिसके कारण ऋषि bhragu के पुत्र परशुराम ने केवल यादव सम्राट सहस्त्रबाहु अर्जुन यादवों ओर उनके 101 कुल का 21 बार लगभग नाश किया, परशुराम सूर्य वंश को क्षत्रिय नहीं मानता था इसलिए परशुराम ने केवल यादवों का नाश किया, आगे जाकर इसी वंश मै नारायण के पूर्ण अवतार यादव कृष्ण हुए, उनकी बड़ी बहन यादव माता दुर्गा ने यादव योग माया का अवतार लिया ओर विंध्याचल पर्वत पर जाकर बस गई, यादव राज कुमारी कुंती को उनके पूर्वज ऋषि दुर्वासा ने 6 यादव पराक्रमी पुत्रो का वरदान दिया जो, यादव कर्ण, यादव युधिष्ठिर, यादव भीम, यादव अर्जुन, नकुल ओर सहदेव हुए, राजा पांडु को श्राप था कि वो पुत्र पैदा नहीं कर सकता इसलिए कुंती के पुत्रो में केवल यादवों का रक्त था इसलिए ये सभी भी आगे जाकर यादव कहलाए, यादव भीम के पौत्र यादव बर्बरीक हुए जिन्हें यादव भगवान खाटू श्याम कहा जाता हे, महा भारत युद्ध के बाद केवल यादव वंश ही बचा था जिसमें आगे जाकर देवगिरी के अभिर (अहीर) ने 800 इष्वी में मराठा साम्राज्य की नींव रखी, जिसमे आगे जाकर अहीर जीजा बाई ओर उनके पुत्र अहीर छत्रपति शिवाजी हुए, शिवाजी के पिता शाहा जी यादवों के होलसेल वंश से थे, राजा सूरजमल, राजा सुहेल देव, महा राणा प्रताप, आल्हा ऊदल, वीर लोरीक, विजय नगर राज्य की स्थापना करने वाले राजा कृष्ण राय आदि ऐसे बहुत से राजा हुए, चन्द्र वंश का मतलब केवल यादव वंश होता है जितने भी महान राजा हुए वे सभी यादव वंश से ताल्लुक रखते हे, भारत में जितने भिं प्राचीन ओर बड़े मंदिर हे सभी यादवों के द्वारा बनाए गए हे, यादवों के राज्य यादव डायनेस्टी, अहीरराना आज का हरियाणा, विजय नगर डायनेस्टी, मराठा डायनेस्टी, देव गिरी डायनेस्टी, नेपाल डायनेस्टी, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान, चीन ये सभी यादवों के राज्य थे जिनको दासियों के पुत्र राजपूतों ने मुगलों के साथ मिलकर खत्म कर दिए, गुज्जर,जाट, मराठा, सिक्ख ये सभी यादवों के वंश हे
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  8. यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में त्रिदेवो ने जन्म लिया, यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु यादव भगवान दत्तात्रेय रूप में, भगवान ब्रह्मा ने यादव भगवान चन्द्र देव के रूप में, महादेव ने यादव ऋषि दुर्वासा रूप में जन्म लिया, भगवान यादव चंद्रदेव को महादेव ने अपने मस्तक पर स्थान दिया हे, जिनके नाम पर यादवों ने सोमनाथ का मंदिर बनवाया था ,यादव चंद्रदेव के पुत्र थे यादव बुध देव, मनु की सबसे बड़ी पुत्री इला जो राम के पूर्वज इसवाकु की बड़ी बहन थी वो यादव घराने की बहू थी, यादव भगवान बुद्ध देव के पुत्र थे यादव पुरुरवा, यादव पुरुरवा के 6 पुत्र थे उनमें 2 महान पुत्र यादव आयु ओर यादव उमावशु, आयु के पुत्र यादव राजा नहुष हुए, उमावशू के वंश में आगे जाकर यादव विश्वामित्र हुए जो बाद में श्री राम के गुरु बने, ऋषि अत्री के वंशज अहीर यादवों को अत्री वंश से होने के कारण ब्राह्मणों का राजा ओर ब्राह्मणों में श्रेष्ठ ब्राह्मण कहा गया है, धरती पर केवल यादव ओर यादवों के वंश ही असली क्षत्रिय ओर ब्राह्मण हे, यादवों में त्रिदेवो सहित सभी देवताओं का रक्त हे, यादव विशुद्ध रक्त वाले भगवान हे, इशवाकू के वंश में हुए राम में केवल 12 कलाए थी, लेकिन चंद्रवंशी यादवों में उनके पूर्वज यादव भगवान दत्तात्रेय के 24 गुण, चंद्रदेव के 64 कलाए जीन कलाओं के साथ श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, ओर ऋषि दुर्वासा का क्रोध इन सभी के साथ यादव जन्म लेते हे,
    नहुष के बड़े पुत्र यादव ययाति हुए, ययाति ने 5 पुत्र थे सबसे बड़े अहीर यादव सम्राट यदू थे, यादव सम्राट यदू को सतयुग के अंत में अहीर ओर यादव उपाधि मिली इसलिए उनके वंशज अहीर यादव ओर बहुत से नाम से जाने जाते हे, ठाकुर, यादव, राणा, महाराणा, सिंह, आदि ये सभी केवल यादवों की उपाधि हे जो उसे द्वापर युग के पहले से प्राप्त हे
    यादव सम्राट यदू के वंश में आगे जाकर यादव राजा हेय्यय हुए, उनके पौत्र यादव सम्राट कर्तविर्य हुए, उनके पुत्र यादव सम्राट अर्जुन हुए जिन्हें सहस्त्रबाहु कर्तविर्य अर्जुन कहा जाता थे, यादव सम्राट कर्तविर्य अर्जुन ने अकेले ही रावण ओर उसकी सेना को अपने एक ही वार से मूर्छित कर यादवों के अस्तबल में सैकड़ों सालों तक बंदी बना कर रखा था, चंद्रदेव से लेकर सहस्त्रबाहु अर्जुन तक जितने भी यादव सम्राट हुए सभी के लाखो सालो तक त्रिलोक पर राजा किया, सूर्य की चाल में आकर यादवों ने ऋषि bhragu के वंश पर अत्याचार किया, जिसके कारण ऋषि bhragu के पुत्र परशुराम ने केवल यादव सम्राट सहस्त्रबाहु अर्जुन यादवों ओर उनके 101 कुल का 21 बार लगभग नाश किया, परशुराम सूर्य वंश को क्षत्रिय नहीं मानता था इसलिए परशुराम ने केवल यादवों का नाश किया, आगे जाकर इसी वंश मै नारायण के पूर्ण अवतार यादव कृष्ण हुए, उनकी बड़ी बहन यादव माता दुर्गा ने यादव योग माया का अवतार लिया ओर विंध्याचल पर्वत पर जाकर बस गई, यादव राज कुमारी कुंती को उनके पूर्वज ऋषि दुर्वासा ने 6 यादव पराक्रमी पुत्रो का वरदान दिया जो, यादव कर्ण, यादव युधिष्ठिर, यादव भीम, यादव अर्जुन, नकुल ओर सहदेव हुए, राजा पांडु को श्राप था कि वो पुत्र पैदा नहीं कर सकता इसलिए कुंती के पुत्रो में केवल यादवों का रक्त था इसलिए ये सभी भी आगे जाकर यादव कहलाए, यादव भीम के पौत्र यादव बर्बरीक हुए जिन्हें यादव भगवान खाटू श्याम कहा जाता हे, महा भारत युद्ध के बाद केवल यादव वंश ही बचा था जिसमें आगे जाकर देवगिरी के अभिर (अहीर) ने 800 इष्वी में मराठा साम्राज्य की नींव रखी, जिसमे आगे जाकर अहीर जीजा बाई ओर उनके पुत्र अहीर छत्रपति शिवाजी हुए, शिवाजी के पिता शाहा जी यादवों के होलसेल वंश से थे, राजा सूरजमल, राजा सुहेल देव, महा राणा प्रताप, आल्हा ऊदल, वीर लोरीक, विजय नगर राज्य की स्थापना करने वाले राजा कृष्ण राय आदि ऐसे बहुत से राजा हुए, चन्द्र वंश का मतलब केवल यादव वंश होता है जितने भी महान राजा हुए वे सभी यादव वंश से ताल्लुक रखते हे, भारत में जितने भिं प्राचीन ओर बड़े मंदिर हे सभी यादवों के द्वारा बनाए गए हे, यादवों के राज्य यादव डायनेस्टी, अहीरराना आज का हरियाणा, विजय नगर डायनेस्टी, मराठा डायनेस्टी, देव गिरी डायनेस्टी, नेपाल डायनेस्टी, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान, चीन ये सभी यादवों के राज्य थे जिनको दासियों के पुत्र राजपूतों ने मुगलों के साथ मिलकर खत्म कर दिए, गुज्जर,जाट, मराठा, सिक्ख ये सभी यादवों के वंश हे
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  11. यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में त्रिदेवो ने जन्म लिया, यादव ऋषि अत्री के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु यादव भगवान दत्तात्रेय रूप में, भगवान ब्रह्मा ने यादव भगवान चन्द्र देव के रूप में, महादेव ने यादव ऋषि दुर्वासा रूप में जन्म लिया, भगवान यादव चंद्रदेव को महादेव ने अपने मस्तक पर स्थान दिया हे, जिनके नाम पर यादवों ने सोमनाथ का मंदिर बनवाया था ,यादव चंद्रदेव के पुत्र थे यादव बुध देव, मनु की सबसे बड़ी पुत्री इला जो राम के पूर्वज इसवाकु की बड़ी बहन थी वो यादव घराने की बहू थी, यादव भगवान बुद्ध देव के पुत्र थे यादव पुरुरवा, यादव पुरुरवा के 6 पुत्र थे उनमें 2 महान पुत्र यादव आयु ओर यादव उमावशु, आयु के पुत्र यादव राजा नहुष हुए, उमावशू के वंश में आगे जाकर यादव विश्वामित्र हुए जो बाद में श्री राम के गुरु बने, ऋषि अत्री के वंशज अहीर यादवों को अत्री वंश से होने के कारण ब्राह्मणों का राजा ओर ब्राह्मणों में श्रेष्ठ ब्राह्मण कहा गया है, धरती पर केवल यादव ओर यादवों के वंश ही असली क्षत्रिय ओर ब्राह्मण हे, यादवों में त्रिदेवो सहित सभी देवताओं का रक्त हे, यादव विशुद्ध रक्त वाले भगवान हे, इशवाकू के वंश में हुए राम में केवल 12 कलाए थी, लेकिन चंद्रवंशी यादवों में उनके पूर्वज यादव भगवान दत्तात्रेय के 24 गुण, चंद्रदेव के 64 कलाए जीन कलाओं के साथ श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, ओर ऋषि दुर्वासा का क्रोध इन सभी के साथ यादव जन्म लेते हे,
    नहुष के बड़े पुत्र यादव ययाति हुए, ययाति ने 5 पुत्र थे सबसे बड़े अहीर यादव सम्राट यदू थे, यादव सम्राट यदू को सतयुग के अंत में अहीर ओर यादव उपाधि मिली इसलिए उनके वंशज अहीर यादव ओर बहुत से नाम से जाने जाते हे, ठाकुर, यादव, राणा, महाराणा, सिंह, आदि ये सभी केवल यादवों की उपाधि हे जो उसे द्वापर युग के पहले से प्राप्त हे
    यादव सम्राट यदू के वंश में आगे जाकर यादव राजा हेय्यय हुए, उनके पौत्र यादव सम्राट कर्तविर्य हुए, उनके पुत्र यादव सम्राट अर्जुन हुए जिन्हें सहस्त्रबाहु कर्तविर्य अर्जुन कहा जाता थे, यादव सम्राट कर्तविर्य अर्जुन ने अकेले ही रावण ओर उसकी सेना को अपने एक ही वार से मूर्छित कर यादवों के अस्तबल में सैकड़ों सालों तक बंदी बना कर रखा था, चंद्रदेव से लेकर सहस्त्रबाहु अर्जुन तक जितने भी यादव सम्राट हुए सभी के लाखो सालो तक त्रिलोक पर राजा किया, सूर्य की चाल में आकर यादवों ने ऋषि bhragu के वंश पर अत्याचार किया, जिसके कारण ऋषि bhragu के पुत्र परशुराम ने केवल यादव सम्राट सहस्त्रबाहु अर्जुन यादवों ओर उनके 101 कुल का 21 बार लगभग नाश किया, परशुराम सूर्य वंश को क्षत्रिय नहीं मानता था इसलिए परशुराम ने केवल यादवों का नाश किया, आगे जाकर इसी वंश मै नारायण के पूर्ण अवतार यादव कृष्ण हुए, उनकी बड़ी बहन यादव माता दुर्गा ने यादव योग माया का अवतार लिया ओर विंध्याचल पर्वत पर जाकर बस गई, यादव राज कुमारी कुंती को उनके पूर्वज ऋषि दुर्वासा ने 6 यादव पराक्रमी पुत्रो का वरदान दिया जो, यादव कर्ण, यादव युधिष्ठिर, यादव भीम, यादव अर्जुन, नकुल ओर सहदेव हुए, राजा पांडु को श्राप था कि वो पुत्र पैदा नहीं कर सकता इसलिए कुंती के पुत्रो में केवल यादवों का रक्त था इसलिए ये सभी भी आगे जाकर यादव कहलाए, यादव भीम के पौत्र यादव बर्बरीक हुए जिन्हें यादव भगवान खाटू श्याम कहा जाता हे, महा भारत युद्ध के बाद केवल यादव वंश ही बचा था जिसमें आगे जाकर देवगिरी के अभिर (अहीर) ने 800 इष्वी में मराठा साम्राज्य की नींव रखी, जिसमे आगे जाकर अहीर जीजा बाई ओर उनके पुत्र अहीर छत्रपति शिवाजी हुए, शिवाजी के पिता शाहा जी यादवों के होलसेल वंश से थे, राजा सूरजमल, राजा सुहेल देव, महा राणा प्रताप, आल्हा ऊदल, वीर लोरीक, विजय नगर राज्य की स्थापना करने वाले राजा कृष्ण राय आदि ऐसे बहुत से राजा हुए, चन्द्र वंश का मतलब केवल यादव वंश होता है जितने भी महान राजा हुए वे सभी यादव वंश से ताल्लुक रखते हे, भारत में जितने भिं प्राचीन ओर बड़े मंदिर हे सभी यादवों के द्वारा बनाए गए हे, यादवों के राज्य यादव डायनेस्टी, अहीरराना आज का हरियाणा, विजय नगर डायनेस्टी, मराठा डायनेस्टी, देव गिरी डायनेस्टी, नेपाल डायनेस्टी, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान, चीन ये सभी यादवों के राज्य थे जिनको दासियों के पुत्र राजपूतों ने मुगलों के साथ मिलकर खत्म कर दिए, गुज्जर,जाट, मराठा, सिक्ख ये सभी यादवों के वंश हे
    जय चन्द्र वंश

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    1. Yr sabh kuch bilkul juth essa to likho jo padkar lage ki ho sakta hai bilkul alag hi fak di tamne to

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  12. Kshatriy bhi koi nahi ban sakta kshatriy shabd ved purand shastro mai maujood hai Ramayan Mahabharat, prathvi raj raso kali Das aadi lekho mai kshatriy shabd ka lekh bahut milta hai kshatriy ka arth kshatra chha or suraksha or bahtar shaan pradan karna jo ek raja or us ke mantri gan Samant adi ke duwar hota tha . Rajput shabd Raja ka putra hai Rajan aadi nam ye sabhi kshatriy hai or na koi alag jo ye itihas angrejo or muglo ne her fer kiya hai.. kshatriy sarvottam shabd hai rajput kshatriy sakha ka ek ansh hai na ki jati

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  13. गड़रिया अहीर गुर्जर जाट ये जटिया क्षत्रिय है और गड़रिया का काम पशुओ को पालना या था या समय आने पर शत्रु से लडना या गदरिया के राजा है जैसे मल्हार राव होल्कर, विजय नगर चंद्र गुप्त मौर्य और पल वंश आदि लिए गदरियो को हर राज्य एम एक अलग उपजाति जैसे बघेल कुरुबा गवड़ा रायका गदरी पाल या गदरी या गद्दी गड़रिया है क्यू

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    1. Bhai hamara bhai itihas hai akela tum logo ka itihas nahi bade kshatriya bane firte ho hamara itihas dekhlo or rahi baat bakri palan ki wo tho apne swabhiman ke liye janglo main rehkar pashupalan kiya jaise ahir gadariya goojar lekin kisi angrojo muglo ko bahu beti nahi di hamara itihas holkar vansh
      Pal vansh
      Vijay Nagar samrajya
      Mourya vansh
      Ye sab gadariya king the or baat
      Karte ho kshatriya wali aaj kal sabhi Kshatriya bane ghoom rahe hai jyada gyan lena ho tho google ye history ki kitabe pad lena

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  14. पिछड़ी जाती मे हो वही रहो। आरक्षण भी लेते हो और छत्रिय बताते हो डूब के मर जाओ कहीं जो आरक्षण जैसी भीख नहीं लेता वही क्षत्रिय है

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    1. Bhai mai arakshan ka virodh karta hu
      Or jiske sareer swasthya ho use arankshan ki jarurat bhi nahi hoti
      Or aarakshan in netao ne vote bank ke liye kara h
      Or ha mai arankshan nahi leta hu
      Kyuki mujhe jarurat hi nahi hai bheekh ki
      Or ha mai Gadariya hu itna bhi bata deta hu

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    2. O mister jyada gyan mat dikhao , jat , ahir or Gurjar khatriy h or vo kshatriya he jinhone dar dar bhatkna manjur kar liya he lekin kisi ke samane sar nahi jhukaya or raj ki bat karte ho to prabhu aapko bata du ki gurjat pratihar vansh ko bhulo mat or time mile to itihas ki book lena or vaha padna aapki aankho ko saf dikhai dega or aarakshan ki bat karte ho to 10 % aarakshan EWS ko jo mila he vo bhi bator liya or yaha post me bade gappe mar rahe ho yar

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  15. Bhnchodo जब इतिहास का ज्ञान न हो तो bakchodi नहीं करनी चाहिए जाति हमारी क्षत्रिय है राजपूत ठाकुर उपाधि मिली है बाद में गधों और कालांतर से सिर्फ हम को ही क्षत्रिय माना गया है हमारे बच्चे बच्चे को पता है बो क्षत्रिय है पर तुमको खुद अपने समाज को social midea pr jabarjasti kshatriya likhwa rhe sharm se Mar jaao tum logo

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  16. Tumhara kam bhens charane ka h tum shudra ho Shtriya sirf Rajput hai

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  17. Gujjer jaat ye sab rajputo ke rakhel ke vanshaj hai������������

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